दिल्ली के राजेंद्र नगर में 16 वर्षीय छात्र द्वारा मेट्रो के सामने कूदकर आत्महत्या करने की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है और इस मामले ने सेंट कोलंबस स्कूल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र ने अपने सुसाइड नोट में स्पष्ट रूप से लिखा था कि उसके कुछ शिक्षक उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। इन्हीं आरोपों के आधार पर छात्र के पिता प्रदीप पाटिल ने स्कूल के हेडमास्टर और तीन शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है, जिसके बाद मामला तेजी से तूल पकड़ता गया और स्कूल प्रशासन को भी कार्रवाई करनी पड़ी।
गुरुवार (20 नवंबर 2025) को स्कूल प्रबंधन ने सभी आरोपित शिक्षकों—हेडमास्टर समेत चार लोगों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। स्कूल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है और जाँच पूरी होने तक इन सभी को स्कूल गतिविधियों से दूर रखा जाएगा। हालांकि, छात्र के परिवार और उनके समर्थन में जुटे लोगों का कहना है कि यह निलंबन सिर्फ दिखावटी है और वे स्कूल के बाहर प्रदर्शन जारी रखेंगे, जब तक आरोपित शिक्षकों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती।
इस घटना के बाद दिल्ली सरकार भी सक्रिय हो गई है। शिक्षा विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च-स्तरीय जाँच समिति गठित की है। यह पाँच सदस्यीय समिति शिक्षा निदेशालय के संयुक्त निदेशक की अध्यक्षता में कार्य करेगी और उसे तीन दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, पुलिस आत्महत्या के लिए उकसाने की आशंका के तहत IPC धारा 305 और 506 के तहत मामले की जाँच कर रही है और इस प्रक्रिया में स्कूल स्टाफ, छात्रों और छात्र के परिवार से गहन पूछताछ की जा रही है।
यह मामला न केवल एक छात्र की समझ से परे खोई हुई ज़िंदगी का दर्द है बल्कि शिक्षा प्रणाली में मौजूद मानसिक उत्पीड़न और दबाव को भी उजागर करता है। अभिभावकों और छात्रों के बीच भारी आक्रोश है और लोग मांग कर रहे हैं कि स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षक व्यवहार पर सख्त नीतियाँ लागू हों ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो। यह घटना एक चेतावनी है कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं—बल्कि छात्रों की भावनाओं, सम्मान और मानसिक सुरक्षा की ज़िम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
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