संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से ठीक पहले कॉन्ग्रेस पार्टी के भीतर एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। पूर्व अध्यक्षा सोनिया गांधी के आवास पर हुई पार्टी के स्ट्रेटजी ग्रुप की अहम बैठक में कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, लेकिन तिरुवनंतपुरम (केरल) के सांसद शशि थरूर नज़र नहीं आए। कुछ दिन पहले भी वे मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं हुए थे। इसके बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या थरूर धीरे-धीरे पार्टी नेतृत्व से दूरी बना रहे हैं?
थरूर की गैर-मौजूदगी को लेकर उनकी टीम का कहना है कि वे इस समय केरल में अपनी 90 वर्षीय माँ के साथ हैं और स्थानीय निकाय चुनाव में प्रचार भी कर रहे हैं। इसी कारण वे दिल्ली नहीं पहुँच सके। दिलचस्प बात यह है कि प्रचार कार्यों की वजह से ही संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल भी बैठक में शामिल नहीं हो पाए, लेकिन केरल के ही वरिष्ठ सांसद के. सुरेश बैठक में मौजूद रहे। इसीलिए थरूर की अनुपस्थिति को लेकर पार्टी के भीतर अधिक चर्चा है।
इससे पहले 18 नवंबर 2025 को SIR पर बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक में भी थरूर शामिल नहीं हुए थे। तब उनकी ओर से बताया गया था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है, जबकि ठीक उससे पहले वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम में नजर आए थे और बाद में उन्होंने पीएम मोदी के भाषण की सोशल मीडिया पर प्रशंसा भी की थी। यह घटनाएँ मिलकर थरूर की गैर-मौजूदगी को और भी सवालों के घेरे में ला रही हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इस बार का शीतकालीन सत्र बेहद अहम है। कॉन्ग्रेस SIR, बेरोजगारी, महँगाई और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की योजना बना रही है। ऐसे में सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि थरूर सत्र के दौरान कितनी सक्रियता दिखाते हैं और क्या वे पूरी तरह पार्टी की लाइन पर नज़र आते हैं या फिर उनकी चुप्पी किसी नए राजनीतिक संकेत की ओर इशारा करेगी।
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