लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने वर्ष 2018 के एक कथित बयान से जुड़े मानहानि मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया है। राहुल गांधी की ओर से अदालत में लिखित आवेदन पेश कर संबंधित टिप्पणी पर खेद व्यक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका बयान शिकायतकर्ता कार्तिकेय सिंह चौहान के संबंध में नहीं था और उनका उद्देश्य उन्हें किसी गलत गतिविधि से जोड़ना नहीं था।
यह मामला केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान द्वारा दायर आपराधिक मानहानि परिवाद से जुड़ा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ मामले की सुनवाई कर रही है।
क्या है राहुल गांधी और कार्तिकेय चौहान का मानहानि मामला?
विवाद की शुरुआत अक्टूबर 2018 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी। झाबुआ में आयोजित एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कथित रूप से पनामा पेपर्स लीक का उल्लेख किया था। आरोप है कि अपने भाषण के दौरान उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे को इस प्रकरण से जोड़ दिया था।
बयान के बाद कार्तिकेय सिंह चौहान ने आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा था कि इससे उनकी और उनके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की थी और बाद में भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में आपराधिक मानहानि का परिवाद दायर किया था।
राहुल गांधी ने अगले दिन दी थी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद राहुल गांधी ने अगले दिन अपनी टिप्पणी पर सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में लगातार चुनाव प्रचार करने के कारण नामों को लेकर भ्रम हो गया था।
उनका पक्ष था कि पनामा पेपर्स से जुड़ा संदर्भ मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान या उनके बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान से संबंधित नहीं था। इसके बावजूद कार्तिकेय चौहान ने अदालत में मानहानि का मामला दायर कर दिया।
भोपाल की MP-MLA कोर्ट ने जारी किया था समन
कार्तिकेय सिंह चौहान की शिकायत पर भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने मामले का संज्ञान लिया। अदालत ने राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समन जारी किया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि चुनावी सभा जैसे सार्वजनिक मंच से दिया गया कथित बयान जानबूझकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला था। वहीं राहुल गांधी की ओर से कहा गया है कि बयान भ्रमवश दिया गया था और शिकायतकर्ता के विरुद्ध कोई आरोप लगाने का उद्देश्य नहीं था।
निचली अदालत की कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे राहुल गांधी
भोपाल की अदालत में चल रही कार्यवाही और व्यक्तिगत उपस्थिति के आदेश के खिलाफ राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में याचिका दायर की। याचिका में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने और व्यक्तिगत पेशी से राहत देने की मांग की गई है।
हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार मामला राहुल गांधी बनाम कार्तिकेय सिंह चौहान के नाम से विचाराधीन है। इससे पहले अदालत ने कहा था कि वह केवल अंतरिम राहत के प्रश्न पर सुनवाई करने के बजाय मामले का अंतिम रूप से निपटारा करने के लिए तैयार है।
लिखित आवेदन में राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी की ओर से हाईकोर्ट के समक्ष पेश लिखित आवेदन में संबंधित बयान पर खेद व्यक्त किया गया है। आवेदन में कहा गया है कि कथित टिप्पणी का संबंध कार्तिकेय सिंह चौहान से नहीं था।
राहुल गांधी के वकीलों का कहना है कि बयान एक गलती और भ्रम के कारण हुआ था। यह भी दावा किया गया है कि गलती का अहसास होते ही अगले दिन सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दे दिया गया था।
उनकी ओर से अदालत में यह पक्ष रखा गया कि बयान से किसी की भावनाएं या प्रतिष्ठा प्रभावित हुई हो तो उन्हें इसका खेद है। हालांकि शिकायतकर्ता के विरुद्ध जानबूझकर कोई गलत या मानहानिकारक आरोप लगाने से इनकार किया गया है।
‘खेद’ या ‘बिना शर्त माफी’ पर अलग-अलग रिपोर्ट
मामले को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों में आवेदन की भाषा के बारे में कुछ अंतर दिखाई दिया है। कुछ रिपोर्टों में इसे लिखित रूप से खेद व्यक्त करना बताया गया है, जबकि अन्य रिपोर्टों में इसे बिना शर्त माफी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
हालांकि राहुल गांधी के पक्ष की मुख्य दलील यह है कि कथित बयान शिकायतकर्ता से संबंधित नहीं था और भ्रम के कारण गलत संदर्भ सामने आया था। आवेदन की कानूनी व्याख्या और उसका मामले पर प्रभाव हाईकोर्ट के आदेश से स्पष्ट होगा।
व्यक्तिगत पेशी से राहत की मांग
राहुल गांधी को भोपाल की एमपी-एमएलए अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा गया था। इससे छूट प्राप्त करने के लिए उनकी ओर से हाईकोर्ट में अंतरिम आवेदन लगाया गया है।
राहुल गांधी के वकीलों ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि उन्हें व्यक्तिगत पेशी से राहत दी जाए और निचली अदालत की कार्यवाही पर विचार किया जाए। दूसरी ओर शिकायतकर्ता कार्तिकेय सिंह चौहान की ओर से अधिवक्ता संकल्प कोचर पक्ष रख रहे हैं।
हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को अब यह तय करना है कि राहुल गांधी के लिखित खेद और स्पष्टीकरण को देखते हुए उन्हें अंतरिम राहत दी जाए या निचली अदालत में मानहानि मामले की सुनवाई जारी रहे।
अदालत इस बात पर भी विचार कर सकती है कि क्या उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया आपराधिक मानहानि का मामला बनता है और क्या राहुल गांधी की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक है।
अदालत के सामने प्रमुख कानूनी सवाल
इस मामले में मुख्य प्रश्न यह है कि क्या राहुल गांधी का कथित बयान स्पष्ट रूप से कार्तिकेय सिंह चौहान को संदर्भित करता था। इसके अतिरिक्त अदालत को यह भी देखना होगा कि बयान के पीछे जानबूझकर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की मंशा थी या वह चुनाव प्रचार के दौरान हुई तथ्यात्मक गलती थी।
लिखित खेद व्यक्त करने से मामला अपने आप समाप्त नहीं होता। आपराधिक मानहानि की कार्यवाही समाप्त करने, उस पर रोक लगाने या समझौते के आधार पर निपटारा करने का अंतिम निर्णय अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा।
आठ साल पुराना मामला फिर चर्चा में
वर्ष 2018 में दर्ज यह मामला लगभग आठ साल बाद एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में आ गया है। राहुल गांधी वर्तमान में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं, जबकि शिवराज सिंह चौहान केंद्र सरकार में मंत्री हैं।
ऐसे में हाईकोर्ट की सुनवाई और आगामी आदेश पर कांग्रेस, भाजपा तथा कानूनी विशेषज्ञों की नजरें बनी हुई हैं। अदालत का फैसला यह तय कर सकता है कि राहुल गांधी को व्यक्तिगत पेशी से राहत मिलेगी या भोपाल की विशेष अदालत में मानहानि का मुकदमा आगे बढ़ेगा।
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