अपने-अपने देशों में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को नजरअंदाज करते हुए बांग्लादेश और पाकिस्तान ने भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित “सामूहिक हिंसा” की निंदा की है और आरोपितों को सख्त सजा दिलाने की मांग की है। दोनों देशों के बयानों को लेकर कूटनीतिक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।
रविवार (28 दिसंबर 2025) को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस.एम. महबुबुल आलम ने इस संबंध में एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा, “हम मुस्लिम, ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की जा रही क्रूर हत्याओं, भीड़ द्वारा हमलों, मनमानी गिरफ्तारियों और धार्मिक आयोजनों में हस्तक्षेप से बेहद चिंतित हैं।”
Pakistan, known for deplorable conditions of minorities, issued a statement against India after vandalism reports during Christmas: pic.twitter.com/nqNIPl4OHd
— Sidhant Sibal (@sidhant) December 29, 2025
बयान में आगे कहा गया, “हम घृणा के इन कृत्यों की निंदा करते हैं और इन्हें जानबूझकर किए गए लक्षित अपराध मानते हैं। हम भारतीय अधिकारियों से निष्पक्ष जांच करने और दोषियों को जवाबदेह ठहराने की अपेक्षा करते हैं। हर देश का यह दायित्व है कि वह अपने अल्पसंख्यक समुदायों की रक्षा और सम्मान सुनिश्चित करे।”
उधर, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी इसी तरह का बयान जारी करते हुए भारत में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर चिंता जताई। बयान में कहा गया, “भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार एक गंभीर चिंता का विषय है।” इसमें क्रिसमस के दौरान हुई कथित तोड़फोड़ की घटनाओं का जिक्र करते हुए दावा किया गया कि मुसलमानों को निशाना बनाकर “राज्य प्रायोजित अभियानों” के तहत उनके घर तोड़े जा रहे हैं और कथित रूप से पीट-पीटकर हत्याएं की जा रही हैं।
पाकिस्तानी बयान में आगे कहा गया कि “ये घटनाएं हालात को और गंभीर बना देती हैं।” साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई कि वह भारत में कथित रूप से कमजोर समुदायों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए ध्यान दे और कदम उठाए।
इन बयानों को लेकर यह सवाल उठ रहे हैं कि जहां एक ओर पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न और जबरन पलायन की घटनाओं की खबरें लगातार सामने आती रहती हैं, वहीं दूसरी ओर वही देश भारत को अल्पसंख्यक अधिकारों पर उपदेश देते नजर आ रहे हैं। यही विरोधाभास इस पूरे मामले को और अधिक चर्चा का विषय बना रहा है।
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