सीपीआई के महासचिव डी. राजा ने नक्सलियों द्वारा दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार करने की मांग की है। सोमवार को राजा ने कहा कि यदि भाजपा और आरएसएस सत्ता में बने रहेंगे तो भारत का भविष्य साम्राज्यवादी हो जाएगा और देश व संविधान बचाने के लिए इन शक्तियों को सत्ता से हटाना आवश्यक है। राजा ने सरकार के ‘नक्सल मुक्त भारत’ के नारे पर भी प्रश्न उठाया और यह आरोप लगाया कि पहले ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ जैसी बातें कही जा चुकी हैं—आगे चलकर ‘कम्युनिस्ट मुक्त भारत’ जैसा नतीजा न निकले, इस आशंका का इज़हार किया।
राजा ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि नक्सलियों के संभावित प्रस्तावों पर बातचीत की जानी चाहिए और सरकार को उनके द्वारा रखे गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका तर्क रहा कि युद्धोपाय ही एकमात्र समाधान नहीं हो सकता और समस्या की जड़ तक पहुँचना जरूरी है।
#WATCH | Delhi: CPI General Secretary D Raja says, "I demand that the government accept the proposal made by the Naxals. What is this Naxal Mukt Bharat? Already, they spoke about the Congress Mukt Bharat. What happened to Congress Mukt Bharat? Tomorrow they will say Communist… pic.twitter.com/bEx8PpgcYr
— ANI (@ANI) September 29, 2025
इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार के सख्त रुख को दोहराया। शाह ने रविवार (28 सितंबर 2025) को कहा कि नक्सलवाद केवल सशस्त्र अभियान से समाप्त नहीं होगा—इसके पीछे की विचारधारा से भी निपटना होगा। उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों ने कई नक्सलियों को मारा, कई गिरफ्तार हुए और कई आत्मसमर्पण कर चुके हैं, तथा सरकार आत्मसमर्पण नीति और कानूनी कार्रवाइयों के माध्यम से भी कार्रवाई कर रही है।
शाह ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब निर्दोषों की हत्या होती है तो सुरक्षा बलों को कठोर कार्रवाई करनी पड़ती है और उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा, “गोलियों का जवाब गोलियों से दिया जाना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि केवल सैनिक कार्रवाई ही नहीं, वैचारिक समर्थन देने वालों की पहचान कर उनसे भी निपटना आवश्यक है।
अमित शाह ने भारत मंथन 2025 के संदर्भ में सरकार का लक्ष्य दोहराया और 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का इरादा फिर बताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और वैचारिक दोनों मोर्चों पर एक साथ काम किया जा रहा है और सरकार का रुख निर्णायक है।
राजा और शाह के बयान इस मुद्दे पर दो भिन्न नीतिगत दृष्टिकोण दर्शाते हैं—जहाँ डी. राजा संवाद और राजनीतिक-सामाजिक पहल की बात कर रहे हैं, वहीं अमित शाह सुरक्षा और कड़ा दमनात्मक रुख बनाए रखने पर ज़ोर दे रहे हैं। इस बहस में दोनों ही पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे हैं और नक्सल समस्या के समाधान के लिए राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षा स्तरों पर उठाए जाने वाले कदमों पर देश में बहस जारी रहेगी।
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