केरल के 61 वर्षीय शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता सी. सदानंदन मास्टर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए नामित किया है। सदानंदन मास्टर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के समर्पित स्वयंसेवक रहे हैं और उनका जीवन साहस, संघर्ष और राष्ट्रवाद के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक है। 1994 में वामपंथी विचारधारा छोड़ने और RSS से जुड़ने की कीमत उन्हें उस समय चुकानी पड़ी, जब CPI(M) से जुड़े कट्टरपंथियों ने उन पर जानलेवा हमला कर उनके दोनों पैर काट दिए। इस बर्बर हमले का उद्देश्य एक स्पष्ट संदेश देना था कि जो भी वामपंथ से अलग होगा, उसका यही अंजाम होगा।
Shri C. Sadanandan Master’s life is the epitome of courage and refusal to bow to injustice. Violence and intimidation couldn’t deter his spirit towards national development. His efforts as a teacher and social worker are also commendable. He is extremely passionate towards youth…
— Narendra Modi (@narendramodi) July 13, 2025
25 जनवरी 1994 को, जब सदानंदन मास्टर कन्नूर के मट्टनूर क्षेत्र में अपनी बहन की शादी की तैयारी कर लौट रहे थे, तभी कुछ कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया, पीटा और बीच सड़क पर उनके दोनों पैर काट दिए। हमले के बाद हमलावरों ने वहां एक बम भी फेंका ताकि कोई उनकी मदद न कर सके। लेकिन इस भयावह हमले के बावजूद सदानंदन मास्टर ने हार नहीं मानी। अस्पताल में लंबे इलाज के बाद उन्हें कृत्रिम पैर लगाए गए, और उन्होंने छह महीनों में चलना दोबारा सीख लिया। इसके बाद वह फिर से RSS और समाजसेवा में जुट गए।
सदानंदन मास्टर का जीवन वामपंथ से राष्ट्रवाद की विचारधारा की ओर लौटने की एक प्रेरक यात्रा है। कभी खुद एक कम्युनिस्ट छात्र कार्यकर्ता रहे मास्टर, मलयालम कवि की कविता ‘भारत दर्शानांगल’ से प्रेरित होकर पुनः संघ से जुड़े और आजीवन उसके कार्यों में समर्पित रहे। 2016 में भाजपा ने उन्हें कूथूपरम्बू विधानसभा से टिकट भी दिया, हालांकि वे चुनाव हार गए थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सदानंदन मास्टर को राज्यसभा में नामित किए जाने पर बधाई देते हुए कहा कि उनका जीवन साहस और अन्याय के सामने न झुकने की मिसाल है। पीएम मोदी ने उन्हें युवाओं के सशक्तिकरण के प्रति समर्पित बताया और सांसद के रूप में उनकी भूमिका के लिए शुभकामनाएं दीं।
सदानंदन मास्टर को 2007 में न्याय मिला, जब केरल की अदालत ने उन पर हमला करने वाले कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं को सजा और जुर्माने का आदेश दिया। इस फैसले को हाई कोर्ट ने 2025 में भी बरकरार रखा। राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा में नामित चार हस्तियों में वे अकेले ऐसे व्यक्ति हैं, जिनका जीवन विचारधारा के प्रति त्याग और साहसिक संघर्ष की गाथा है। अन्य नामों में पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, वकील उज्ज्वल निकम और इतिहासकार मीनाक्षी जैन शामिल हैं।