मालेगांव 2008 विस्फोट मामले में 17 वर्षों के लंबे मुकदमे के बाद एनआईए कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी सातों आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। इस फैसले से पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी अब कानूनी रूप से निर्दोष घोषित हो चुके हैं।
कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की प्रतिक्रिया भी सामने आई, जिसमें उन्होंने कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि पूरे भगवा और हिंदुत्व विचारधारा की जीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें झूठे केस में फंसाकर न केवल प्रताड़ित किया गया, बल्कि भगवा और साधु-संन्यासियों की पूरी परंपरा को बदनाम करने की साजिश की गई।
NIA कोर्ट में जज को संबोधित करते हुए साध्वी प्रज्ञा सिंह ने कहा, "मैंने शुरू से ही कहा था कि जिन्हें भी जांच के लिए बुलाया जाता है, उनके पीछे कोई न कोई आधार ज़रूर होना चाहिए।
मुझे जांच के लिए बुलाया गया और मुझे गिरफ़्तार करके प्रताड़ित किया गया।
इससे मेरा पूरा जीवन बर्बाद हो… pic.twitter.com/t2bCKbHSus
— One India News (@oneindianewscom) July 31, 2025
अदालत में भावुक होकर उन्होंने कहा, “मैं एक साध्वी थी, साधु का जीवन जी रही थी, लेकिन मुझे जबरन आरोपी बना दिया गया। कोई भी हमारे साथ खड़ा नहीं हुआ। आज यह सच्चाई की जीत है और जिन लोगों ने हमें झूठे मुकदमे में फंसाया, उन्हें भगवान सजा देंगे।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा कहा था कि जांच किसी ठोस आधार पर होनी चाहिए, न कि किसी पूर्वाग्रह या राजनीतिक एजेंडे के तहत।
इस बीच लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित ने भी अदालत में बयान देते हुए कहा कि वह किसी भी जांच एजेंसी को दोष नहीं देते, लेकिन यह मानते हैं कि एजेंसियों के अंदर बैठे कुछ लोग ही व्यवस्था को गलत दिशा में ले जाते हैं। उन्होंने न्यायालय का आभार प्रकट किया और कहा कि “आपने मुझे वही विश्वास और सम्मान लौटाया है, जिसके साथ मैं देश की सेवा कर रहा था।” उन्होंने कहा कि वह इस फैसले को एक सामान्य नागरिक के लिए भी न्याय व्यवस्था में विश्वास की पुनर्स्थापना मानते हैं।
अदालत ने फैसले में यह भी कहा कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले, जिसके चलते उन्हें दोषमुक्त किया गया। हालांकि, कोर्ट ने महाराष्ट्र एटीएस के एडीजी को आरोपी सुधाकर चतुर्वेदी के घर में विस्फोटक रखने के आरोप की पुन: जांच करने का निर्देश दिया है।
यह मामला लंबे समय से राजनीति और राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बना रहा था। फैसले के बाद जहां एक ओर बरी हुए लोगों और उनके समर्थकों में राहत की भावना दिखी, वहीं इस मामले की जांच, न्यायिक प्रक्रिया और पूर्व के आरोपों पर भी कई सवाल फिर से उठ खड़े हुए हैं।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel