ईरान में बढ़ती महंगाई, गिरती मुद्रा और गहराती आर्थिक बदहाली के खिलाफ जनता सड़कों पर उतर आई है। देशभर में चल रहे इन प्रदर्शनों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मचा दी है। जहां एक ओर ईरानी सरकार सख्ती के संकेत दे रही है, वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खुली चेतावनियों ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है।
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,300 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं टाइम मैग्जीन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई जा रही है। एक डॉक्टर के हवाले से कहा गया है कि सिर्फ छह अस्पतालों में ही अब तक कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है।
ईरान का सरकारी मीडिया लगातार प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकी’ और ‘तोड़फोड़ करने वाले’ बताकर कार्रवाई को जायज ठहराने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप पर तीखा हमला बोला है। सरकारी टीवी पर प्रसारित भाषण में खामेनेई ने कहा कि ट्रंप के ‘हाथ ईरानियों के खून से सने हैं।’ यह बयान उन्होंने जून में इजरायल के साथ हुए युद्ध और उसमें अमेरिकी समर्थन के संदर्भ में दिया।
#BreakingNews : ट्रंप ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी – हिंसा बढ़ी तो अमेरिका करेगा सख्त कार्रवाई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में तेज़ी से फैल रहे बड़े पैमाने के विरोध प्रदर्शनों के बीच तेहरान को सख्त चेतावनी दी है।
ट्रंप ने कहा,
"ईरान अभी बहुत बड़ी मुसीबत में है।… pic.twitter.com/ci7CxmgmzR
— One India News (@oneindianewscom) January 10, 2026
खामेनेई ने अपने भाषण में प्रदर्शनकारियों को भी निशाने पर लिया, जबकि उनके समर्थकों ने ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे लगाए। उन्होंने कहा कि इस्लामिक गणराज्य खून देकर बना है और वह किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है। खामेनेई ने यहां तक दावा किया कि ट्रंप का अंजाम भी 1979 में ईरान के शाह जैसा हो सकता है।
दूसरी ओर राष्ट्रपति ट्रंप ने हालात पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ईरान ‘बहुत बड़ी मुसीबत’ में है और सरकार के लिए बेहतर होगा कि वह प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाना बंद करे। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका भी कार्रवाई करेगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब जमीनी सैन्य कार्रवाई नहीं होगा, बल्कि ईरान को ‘जहां दर्द होगा, वहीं चोट’ दी जाएगी।
एक इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि 86 वर्षीय खामेनेई शायद देश छोड़ने की तैयारी में हैं। हालात को काबू में करने के लिए ईरान ने देशभर में इंटरनेट शटडाउन लागू कर दिया है। इंटरनेट मॉनिटर नेटब्लॉक्स और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है। एमनेस्टी के अनुसार, इंटरनेट बंद करने का मकसद हिंसा और मौतों की असली तस्वीर दुनिया से छिपाना है।
नॉर्वे स्थित एनजीओ ‘ईरान ह्यूमन राइट्स’ ने दावा किया है कि मरने वालों में कम से कम नौ बच्चे भी शामिल हैं। इस बीच भारत ने भी स्थिति पर करीबी नजर रखने की बात कही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि ईरान में करीब 10,000 भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है।
तेहरान समेत कई बड़े शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगा रहे हैं। ये प्रदर्शन 2022–23 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए आंदोलनों के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं और 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरानी सत्ता के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखे जा रहे हैं।
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