रोहिणी आचार्य ने बिना नाम लिए अपने भाई तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर किए गए उनके हालिया पोस्ट को बिहार की राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है। रोहिणी ने इशारों-इशारों में परिवार और पार्टी के भीतर ही विरासत को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों का आरोप लगाया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
अपने पोस्ट में रोहिणी ने लिखा कि बड़ी शिद्दत से बनाई गई “बड़ी विरासत” को खत्म करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, बल्कि अपने ही और कुछ “नए बने अपने” षड्यंत्रकारी काफी होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हैरानी तब होती है जब जिस पहचान और वजूद की वजह से सब कुछ है, उसी को बहकावे में आकर मिटाने की कोशिश अपने ही करने लगते हैं।
बड़ी शिद्दत से बनायी और खड़ी की गयी "बड़ी विरासत" को तहस – नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, "अपने" और अपनों के चंद षड्यंत्रकारी "नए बने अपने" ही काफी होते हैं ..
हैरानी तो तब होती है , जब "जिसकी" वजह से पहचान होती है , जिसकी वजह से वजूद होता है , उस पहचान, उस वजूद के…
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) January 10, 2026
रोहिणी ने आगे लिखा कि जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है और अहंकार सिर पर चढ़ जाता है, तब विनाशक ही आंख, नाक और कान बनकर बुद्धि-विवेक हर लेता है। उनके इस बयान को सीधे तौर पर नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल के रूप में देखा जा रहा है।
हाल के दिनों में रोहिणी आचार्य के कई पोस्ट बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बने हैं। इससे पहले भी उन्होंने पार्टी के अंदरूनी मामलों को लेकर तीखे बयान दिए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका यह ताजा पोस्ट राजद के भीतर चल रही खींचतान और नेतृत्व को लेकर असंतोष की ओर इशारा करता है।
हालांकि रोहिणी ने अपने पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उनके शब्दों के तीर साफ तौर पर तेजस्वी यादव की कार्यशैली और हालिया फैसलों की ओर इशारा करते हैं। यह बयान राजद और यादव परिवार के भीतर बढ़ती दरारों की चर्चा को और तेज कर सकता है।
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