Supreme Court of India ने शुक्रवार (13 मार्च 2026) को Madhya Pradesh सरकार के उस सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव से जुड़े University Grants Commission (UGC) के नियम लागू करने की बात कही गई थी।
यह याचिका Sarthak Bhagat और Ajit Bharti की ओर से दायर की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने क्या कहा
मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि फरवरी में जारी स्थगन आदेश के संदर्भ में 2023 और 2026 के UGC दिशानिर्देशों को एक साथ चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती।
CJI: if 2026 regulation has been stayed by this court, if caste based discrimination happens, where will they go ? if its 2023 regulation, why didn't you challenge it earlier ?
— Live Law (@LiveLawIndia) March 13, 2026
अदालत ने याचिकाकर्ताओं के वकील से सवाल करते हुए कहा कि यदि 2026 के नियमों पर पहले ही रोक लग चुकी है, तो जाति-आधारित भेदभाव की स्थिति में लोग कहाँ जाएँगे।
पीठ ने यह भी कहा कि यदि मामला 2023 के नियमों से जुड़ा है, तो उसे पहले क्यों चुनौती नहीं दी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार
जब याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि वे 2023 और 2026 दोनों नियमों को चुनौती देना चाहते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।
Supreme Court refuses to entertain petitions challenging the 2023 and 2026 UGC guidelines together.
-> The bench said the matters cannot be CLUBBED & asked petitioners to file separate petitions if they want the court to examine the issues.
pic.twitter.com/j5ymsh95PZ
— The Analyzer (News Updates🗞️) (@Indian_Analyzer) March 13, 2026
अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता 2023 के नियमों को चुनौती देने के लिए अलग से नई याचिका दाखिल कर सकते हैं। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि इस आदेश का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में दाखिल होने वाली याचिका को अनिवार्य रूप से स्वीकार ही किया जाएगा।
यूट्यूबर अजीत भारती ने दी जानकारी
मामले को लेकर यूट्यूबर और पत्रकार Ajit Bharti ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने UGC नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उनकी ओर से Shashank Shekhar Jha अदालत में पेश हुए थे।
हमने सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी नियमावली पर केस फाइल किया था। @shashank_ssj हमारा पक्ष रख रहे थे। कोर्ट ने फरवरी में दिए स्टे की बात करते हुए, उस पर चर्चा से मना कर दिया।
हालाँकि, हमारी याचिका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 2023 की यूजीसी नियमावली को लागू करने…
— Ajeet Bharti (@ajeetbharti) March 13, 2026
अदालत ने फरवरी में जारी स्थगन आदेश का हवाला देते हुए इस पर आगे सुनवाई से इनकार कर दिया।
2023 नियमों को चुनौती देने की तैयारी
याचिकाकर्ता Sarthak Bhagat ने भी सोशल मीडिया पर बताया कि वे Ajit Bharti के साथ मिलकर 2023 के UGC नियमों को चुनौती देने के लिए अलग से नई याचिका दायर करेंगे।
उन्होंने कहा कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही 2026 के UGC दिशानिर्देशों पर रोक लगा चुका है, इसलिए अदालत ने उस हिस्से पर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।
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