बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के सबसे बड़े बेटे तारिक रहमान करीब 17 साल बाद अपने वतन लौट आए हैं। वह लंबे समय से लंदन में रह रहे थे और आगामी फरवरी में होने वाले आम चुनावों से पहले उनकी यह वापसी बांग्लादेश की राजनीति में अहम मानी जा रही है। तारिक रहमान के साथ उनकी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी जायमा रहमान भी बांग्लादेश पहुँची हैं।
तारिक रहमान की वापसी को लेकर उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ढाका में लाखों की संख्या में कार्यकर्ता उनके स्वागत के लिए सड़कों पर उतरे। इसे बीएनपी के लिए एक बड़े राजनीतिक संदेश और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच उनकी बेटी जायमा रहमान ने अपने फेसबुक अकाउंट पर विमान के भीतर की तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें वह अपने माता-पिता के साथ दिखाई दे रही हैं। तारिक रहमान की मां खालिदा जिया फिलहाल बांग्लादेश में ही रहती हैं, लेकिन पिछले कुछ महीनों से उनकी तबीयत गंभीर बनी हुई है। कई लोग तारिक रहमान की वापसी के पीछे इसे भी एक अहम वजह मान रहे हैं।
#WATCH | ढाका | बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) के समर्थक ढाका एयरपोर्ट की ओर मार्च कर रहे हैं,
जहाँ जल्द ही पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान पहुँचने वाले हैं।
वे 17 वर्षों के लंदन निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौट रहे हैं।#TariqueRahman #BNP #DhakaAirport… pic.twitter.com/kbVBoabf3l
— One India News (@oneindianewscom) December 25, 2025
गौरतलब है कि तारिक रहमान पर बांग्लादेश में मनी लॉन्ड्रिंग, भ्रष्टाचार और तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की हत्या की साजिश सहित कई गंभीर आरोप लगे थे, जिन मामलों में उन्हें दोषी भी ठहराया गया था। वर्ष 2008 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था, हालांकि बाद में अंतरिम सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया। इसके बाद इलाज के लिए वह ब्रिटेन चले गए और सितंबर 2008 से 2025 तक लंदन में स्व-निर्वासन में रहे।
दिसंबर 2009 में ढाका में आयोजित बीएनपी की 5वीं राष्ट्रीय परिषद में तारिक रहमान को पार्टी का वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुना गया था। इसके बाद वह लंदन में रहते हुए ही पार्टी की गतिविधियों और रणनीति को दिशा देते रहे। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2015 में उन्होंने ब्रिटेन में ‘व्हाइट एंड ब्लू कंसल्टेंट्स लिमिटेड’ नाम से एक निजी पीआर और कम्युनिकेशन फर्म भी पंजीकृत कराई थी।
फर्म के पंजीकरण के दौरान ब्रिटिश प्रशासन को दिए गए दस्तावेजों में उन्होंने स्वयं को ब्रिटिश नागरिक बताया था, हालांकि 2016 में उन्होंने संशोधन कर अपनी राष्ट्रीयता ‘बांग्लादेशी’ करवा ली। 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद तारिक रहमान के खिलाफ दर्ज सभी मामले हटा दिए गए, जिसके बाद उन्होंने देश लौटने का फैसला किया।
तारिक रहमान ने वापसी के साथ ही नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को समर्थन देने की बात भी कही है। उनकी वापसी ऐसे समय में हुई है, जब बीएनपी मजबूत राजनीतिक स्थिति में मानी जा रही है। पिछले साल छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद शेख हसीना की सरकार का तख्ता पलट हो गया था, जिससे बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा परिवर्तन आया।
फिलहाल देश में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार सत्ता में है और लगभग दो वर्षों की राजनीतिक उथल-पुथल के बाद स्थिरता बहाल करने के लिए चुनावों की घोषणा की गई है। बांग्लादेश में आम चुनाव अगले साल फरवरी में होने हैं।
करीब 60 वर्षीय तारिक रहमान, जो इस समय बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं, चुनावों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी पार्टी के अच्छे प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है। अमेरिका स्थित इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट के एक सर्वे में दावा किया गया है कि बीएनपी को चुनावों में सबसे ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। इस चुनावी दौड़ में इस्लामवादी जमात-ए-इस्लामी भी शामिल है, जबकि शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है।
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