चीन ने हाल ही में रूस-भारत-चीन (RIC) त्रिपक्षीय सहयोग फॉर्मेट की बहाली का समर्थन करते हुए कहा है कि यह न केवल तीनों देशों के हित में है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और प्रगति के लिए भी आवश्यक है। यह पहल रूस की ओर से शुरू की गई थी, जिसे चीन ने खुले तौर पर समर्थन दिया। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में 2020 से चले आ रहे सैन्य गतिरोध के कारण संबंधों में लंबे समय से ठहराव था, हालांकि हालिया उच्च स्तरीय बैठकों के बाद संबंधों को सामान्य करने की कोशिशें जारी हैं।
चीन का बड़ा बयान:
"चीन-रूस-भारत सहयोग तीनों देशों के लिए लाभकारी है और भारत व रूस के साथ मिलकर त्रिपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।"
क्या नई विश्व व्यवस्था बन रही है…? 🇨🇳🇷🇺🇮🇳#ChinaRussiaIndia | #TrilateralCooperation | #NewWorldOrder | #GlobalAlliance | #BRICS… pic.twitter.com/ypiItKfsIz
— One India News (@oneindianewscom) July 18, 2025
रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने कहा कि मास्को RIC फॉर्मेट की बहाली में रुचि रखता है और इस मुद्दे पर भारत और चीन दोनों से बातचीत कर रहा है। उनका मानना है कि ब्रिक्स के संस्थापक तीनों देश होने के नाते इस त्रिपक्षीय सहयोग का जारी रहना ज़रूरी है। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह भारत और रूस के साथ मिलकर संवाद बनाए रखने को तैयार है।
दरअसल, चीन की इस पहल के पीछे रणनीतिक कारण हैं। भारत के क्वाड (QUAD) जैसे पश्चिम समर्थित गठबंधन में शामिल होने और चीन की बढ़ती वैश्विक आलोचना के बीच बीजिंग चाहता है कि वह भारत को क्षेत्रीय बहुपक्षीय ढांचों में बनाए रखे, ताकि अमेरिका के प्रभाव को संतुलित किया जा सके। वहीं, रूस यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों से टकराव के चलते भारत जैसे रणनीतिक साझेदार को अपने करीब बनाए रखने के लिए RIC को एक महत्वपूर्ण मंच मानता है।
हालांकि, RIC की प्रासंगिकता पर सवाल इसलिए उठे हैं क्योंकि भारत-चीन के बीच सीमा विवाद और चीन द्वारा पाकिस्तान को भारत विरोधी गतिविधियों में समर्थन दिए जाने से द्विपक्षीय विश्वास कमजोर हुआ है। बावजूद इसके, रूस की मध्यस्थता और ऐतिहासिक संतुलनकारी भूमिका RIC को पुनर्जीवित करने में मददगार हो सकती है। भारत के लिए भी, रूस के साथ सहयोग का यह फॉर्मेट कूटनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकता है, बशर्ते चीन के साथ सीमा संबंधी तनावों का समाधान हो।
अंततः, RIC की बहाली की यह कोशिश क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और भारत-चीन संबंधों को सुधारने की दिशा में एक रणनीतिक कदम के रूप में देखी जा रही है।