महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधान परिषद में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति हिंदू, बौद्ध या सिख धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म से संबंधित है और उसने फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र प्राप्त किया है, तो ऐसे सभी प्रमाणपत्र सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार रद्द कर दिए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे लोग यदि सरकारी नौकरियों या अन्य आरक्षण लाभों का फायदा उठा रहे हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, और यदि उन्होंने चुनाव जीता है, तो उनका निर्वाचन भी निरस्त किया जा सकता है। साथ ही, आर्थिक लाभ की वसूली की भी सिफारिश की जाएगी।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए बड़ी घोषणा की है.
उन्होंने साफ कहा कि राज्य सरकार की तरफ से हिंदू, बौद्ध और सिख धर्म के अलावा अन्य धर्मों के लोगों की तरफ से धोखाधड़ी से प्राप्त अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र रद्द कर दिए जाएंगे.… pic.twitter.com/AH3G9As6j5
— One India News (@oneindianewscom) July 18, 2025
इस घोषणा की पृष्ठभूमि में भाजपा विधायक अमित गोरखे द्वारा उठाया गया मुद्दा था, जिसमें उन्होंने “क्रिप्टो ईसाई” शब्द का प्रयोग करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग सार्वजनिक रूप से अनुसूचित जाति से जुड़े दिखते हैं लेकिन गुप्त रूप से ईसाई धर्म का पालन करते हैं और आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने 26 नवंबर 2024 को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए बताया कि अनुसूचित जाति आरक्षण का लाभ केवल हिंदू, बौद्ध और सिख समुदाय को ही मिल सकता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार बलपूर्वक, धोखाधड़ी या प्रलोभन के माध्यम से कराए गए धर्मांतरण से निपटने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान लाने की योजना बना रही है। इस संदर्भ में पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में गठित एक पैनल ने रिपोर्ट सौंपी है, जिसका अध्ययन करके सरकार एक कठोर कानून लाने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत ऐसे मामलों में पहले से कार्रवाई संभव है, लेकिन अधिक स्पष्ट और सख्त कानून की जरूरत है।
इस विषय पर चर्चा के दौरान भाजपा नेता चित्रा वाघ ने एक दर्दनाक घटना का जिक्र किया, जिसमें एक महिला को गुप्त रूप से ईसाई धर्म मानने वाले परिवार में शादी करने के बाद प्रताड़ित किया गया और जबरन धर्मांतरण का दबाव बनाया गया, जिसके चलते उसकी मृत्यु हो गई। वहीं, प्रवीण दरेकर ने दावा किया कि झुग्गी-झोपड़ियों और गरीब बस्तियों में धर्मांतरण के लिए गुप्त अभियान चल रहे हैं।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने अंत में यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सहमति से धर्म परिवर्तन पर रोक नहीं लगाएगी, लेकिन जबरदस्ती, धोखाधड़ी या प्रलोभन द्वारा कराए जा रहे धर्मांतरण के मामलों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य के आगामी धर्मांतरण विरोधी कानून को देश के अन्य राज्यों की तुलना में अधिक कठोर बनाए जाने की भी योजना है।