भारतीय रेलवे ने एक संवेदनशील और समावेशी पहल के तहत अब परीक्षार्थियों को पगड़ी, बिंदी, कलावा जैसे धार्मिक प्रतीकों के साथ रेलवे परीक्षा देने की अनुमति दे दी है। इस निर्णय को ‘सेक्युलर गाइडलाइन’ नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य आस्था और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना है। रेलवे बोर्ड के प्रवक्ता दिलीप कुमार ने बताया कि धार्मिक प्रतीकों की सही जांच के बाद ही परीक्षार्थी इन्हें पहनकर परीक्षा में बैठ सकेंगे। यह फैसला कर्नाटक और पंजाब में हुए उन विवादों के बाद लिया गया है, जिनमें छात्रों से उनके धार्मिक प्रतीक हटवा दिए गए थे, जिससे विरोध की स्थिति उत्पन्न हुई थी।
इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने छात्रों, अधिकारियों, कोचिंग संस्थानों और विशेषज्ञों से चर्चा कर सुझाव लिए और फिर इस गाइडलाइन को लागू कराया। इसका मकसद रेलवे की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, समयबद्ध और संवेदनशील बनाना है।
रेलवे ने इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया में कई सुधार किए हैं। 2024 में पहली बार ग्रुप C सहित विभिन्न पदों के लिए वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी किया गया है, जिसमें असिस्टेंट लोको पायलट, टेक्नीशियन, एनटीपीसी, पैरामेडिकल, सुरक्षा बल और लेवल-1 की भर्तियाँ शामिल हैं। अब परीक्षा केंद्र अधिकतम 250 किमी के दायरे में होंगे, और विशेष परिस्थितियों में यह दूरी 500 किमी तक हो सकती है।
सुरक्षा और पारदर्शिता के लिहाज से सभी परीक्षा केंद्रों पर 100% CCTV निगरानी रहेगी और परीक्षार्थियों की पहचान AI आधारित रियल टाइम फेस मैचिंग और KYC के जरिए की जाएगी। वेबसाइट को यूजर फ्रेंडली बनाया गया है, जिसमें वन टाइम रजिस्ट्रेशन की सुविधा है। साथ ही, दिव्यांग छात्रों के लिए ऑडियो गाइड और विजुअल सहायता जैसी विशेष सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं।
यह बदलाव भारतीय रेलवे की भर्ती प्रणाली को ज्यादा आधुनिक, समावेशी और संवेदनशील बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।