पश्चिमी अफ्रीकी देश माली में एक चिंताजनक घटना सामने आई है, जहाँ राजस्थान, ओडिशा और तेलंगाना के रहने वाले तीन भारतीय नागरिकों का 1 जुलाई 2025 को अपहरण कर लिया गया है। ये तीनों डायमंड सीमेंट फैक्ट्री में कार्यरत थे और वहां काम के सिलसिले में मौजूद थे। आशंका है कि इस अपहरण को अलकायदा से जुड़े आतंकी संगठन जमात नुसरत अल-इस्लाम वल-मुसलमीन (JNIM) ने अंजाम दिया है, जो इससे पहले भी माली, नाइजर और बुर्किना फासो में विदेशी नागरिकों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना चुका है।
अपहृत भारतीयों में शामिल हैं:
- प्रकाश चंद जोशी (जयपुर, राजस्थान)
- अमरलिंगेश्वर राव (मिर्यालगुडा, तेलंगाना) – वर्ष 2015 से माली में कार्यरत
- पी. वेंकटरमन (गंजम, ओडिशा) – ब्लू स्टार प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े, पिछले 6 महीने से माली में तैनात
विदेश मंत्रालय ने इनकी पहचान की पुष्टि करते हुए बताया है कि वे माली के अधिकारियों, स्थानीय एजेंसियों और पीड़ितों के परिवारों के संपर्क में हैं। जयपुर में प्रकाश जोशी की पत्नी ने बताया कि हथियारबंद लोग उन्हें फैक्ट्री से जबरन उठाकर ले गए, और तब से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। तेलंगाना में अमरलिंगेश्वर राव की पत्नी और तीन बच्चों वाला परिवार बेहद परेशान है, जबकि ओडिशा में वेंकटरमन की मां को पहले “पुलिस हिरासत” में होने की जानकारी मिली, लेकिन बाद में बंधक बनाए जाने की खबर सामने आई।
इस डायमंड सीमेंट फैक्ट्री का संचालन भारतीय प्रसादित्य ग्रुप करता है, जो कई अफ्रीकी देशों में व्यावसायिक हित रखता है। अभी तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
माली का साहेल क्षेत्र, जो माली, नाइजर और बुर्किना फासो को शामिल करता है, 2012 से चरमपंथ और हिंसा का गढ़ बन गया है। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स (GTI) के अनुसार, यह क्षेत्र अब दुनिया में आतंकवाद से जुड़ी मौतों का प्रमुख केंद्र बन गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में माली में करीब 400 भारतीय नागरिक काम कर रहे हैं, जिनमें अधिकांश कंस्ट्रक्शन, माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़े हैं।
इस घटना ने ना सिर्फ पीड़ित परिवारों को गहरी चिंता में डाल दिया है, बल्कि यह भारत सरकार और विदेश मंत्रालय के लिए एक बड़ी सुरक्षा और कूटनीतिक चुनौती बनकर उभरी है।