कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यक्रमों पर रोक लगाने की कोशिश में बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार के आदेश पर कर्नाटक हाई कोर्ट ने रोक लगाते हुए साफ कहा है कि ऐसा कदम संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन है।
दरअसल, हाई कोर्ट ने हुबली के पुलिस कमिश्नर द्वारा संघ के कार्यक्रमों पर रोक लगाने वाले आदेश को अवैध और असंवैधानिक ठहराते हुए उस पर अंतरिम स्थगन (स्टे) लगा दिया है। कोर्ट ने फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर पुलिस कमिश्नर को ऐसा आदेश जारी करने का संवैधानिक अधिकार कहां से मिला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला आरएसएस की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस नागप्रसन्ना की बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(A) और 19(1)(B) के तहत प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा आयोजित करने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में सरकार या प्रशासन किसी संगठन की सभा या कार्यक्रम पर मनमाने तरीके से रोक नहीं लगा सकता।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने RSS पर रोक लगाने वाले कांग्रेस सरकार के आदेश पर लगाया स्टे, हुबली के कमिश्नर को लगाई फटकार #RSS #CongressFear #KarnatakaHC #RisingBharat #Nationalism
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— One India News (@oneindianewscom) October 28, 2025
क्या है पूरा मामला?
18 अक्तूबर को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत किसी भी स्थान पर 10 से अधिक लोगों का बिना अनुमति एकत्र होना अपराध घोषित कर दिया गया था। यह आदेश सीधे तौर पर आरएसएस के शाखाओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर लागू होता। इतना ही नहीं, आदेश में कहा गया था कि यदि किसी पार्क या मैदान में अधिक संख्या में लोग दिखे, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस आदेश को संघ ने अदालत में चुनौती दी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इसे संविधान-विरोधी और नागरिक स्वतंत्रता पर हमला बताया।
संघ को रोकने की ‘कांग्रेसी साजिश’?
मामले को लेकर भाजपा और संघ समर्थक नेताओं ने कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक द्वेष का आरोप लगाया है। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि यह आदेश कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे के इशारे पर जारी किया गया था। दरअसल, कुछ दिन पहले प्रियंक खड़गे ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर राज्य में आरएसएस की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की थी।
भाजपा का कहना है कि कांग्रेस सरकार संघ के विचारों से डरती है और उन्हें रोकने के लिए संवैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग कर रही है। फिलहाल, इस मामले की आगे की सुनवाई अभी जारी रहेगी।
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