भारत में मॉनसून सीजन की शुरुआत इस साल असाधारण रूप से जल्दी हुई है, और इससे जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर गौर करना ज़रूरी है।
केरल में मॉनसून की एंट्री (24 मई 2025)
- IMD (भारतीय मौसम विज्ञान विभाग) के अनुसार, 24 मई को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में दस्तक दे दी।
- यह 2009 के बाद से सबसे जल्दी शुरुआत है (तब 23 मई को हुआ था)।
- सामान्यतः, मॉनसून 1 जून को केरल में प्रवेश करता है।
पिछले वर्षों में मॉनसून की शुरुआत की तारीखें
| वर्ष | मॉनसून की केरल में एंट्री |
|---|---|
| 2024 | 30 मई |
| 2023 | 8 जून |
| 2022 | 29 मई |
| 2021 | 3 जून |
| 2020 | 1 जून |
| 2019 | 8 जून |
| 2018 | 29 मई |
क्या जल्दी मॉनसून का मतलब ज़्यादा बारिश?
IMD ने स्पष्ट किया है कि मॉनसून की एंट्री की तारीख और पूरे देश में बारिश की कुल मात्रा के बीच कोई सीधा संबंध नहीं होता। बारिश की मात्रा वैश्विक, क्षेत्रीय और स्थानीय कारकों पर निर्भर करती है।
Southwest Monsoon has set in over Kerala, today the 24 th May 2025:
Southwest Monsoon has set in over Kerala today, the 24th May, 2025, against the normal date of 1st June. Thus, southwest monsoon has set in over Kerala 8 days before the normal date. This is the earliest date… pic.twitter.com/n9TcdkG3Ym
— India Meteorological Department (@Indiametdept) May 24, 2025
वैज्ञानिक कारण:
- अल-नीनो (El Niño) की स्थिति इस वर्ष अनुपस्थित है — जो सामान्य से कम वर्षा का प्रमुख कारण होती है।
- IMD ने 2025 के मानसून में सामान्य से अधिक बारिश की संभावना जताई है।
राजधानी दिल्ली का मौसम अपडेट
- न्यूनतम तापमान: 28.4°C (1.7°C कम सामान्य से)
- अधिकतम तापमान अनुमान: ~37°C
- बारिश और आंधी की संभावना: शनिवार और रविवार
- सापेक्ष आर्द्रता (सुबह 8:30 बजे): 62%
- वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI): 120 (मध्यम श्रेणी)
AQI स्तर और श्रेणियाँ:
| AQI रेंज | स्थिति |
|---|---|
| 0–50 | अच्छा |
| 51–100 | संतोषजनक |
| 101–200 | मध्यम |
| 201–300 | खराब |
| 301–400 | बहुत खराब |
| 401–500 | गंभीर |
महत्वपूर्ण निष्कर्ष
- केरल में जल्दी मॉनसून की एंट्री एक महत्वपूर्ण संकेत है, लेकिन पूरे भारत में बारिश की स्थिति इससे तय नहीं होती।
- दिल्ली में आने वाले दिनों में तेज़ हवाएं और बारिश राहत ला सकती हैं, साथ ही प्रदूषण स्तर भी गिर सकता है।
- खेती और जल संसाधन प्रबंधन के लिए यह एक सकारात्मक संकेत हो सकता है, अगर मानसून सामान्य से अच्छा रहता है।