महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे ब्रदर्स की साख को बड़ा झटका तब लगा जब उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के गठबंधन को BEST क्रेडिट सोसायटी चुनाव में एक भी सीट हासिल नहीं हो पाई। यह चुनाव इसलिए खास माना जा रहा था क्योंकि दोनों भाइयों की पार्टियों ने पहली बार मिलकर एक उत्कर्ष पैनल बनाकर चुनावी मैदान में कदम रखा था और 21 सीटों के लिए अपने पूरे 21 उम्मीदवार उतारे थे। इनमें 18 उम्मीदवार शिवसेना (UBT) से, 2 एमएनएस से और 1 अनुसूचित जाति एवं जनजाति संघ से था। बावजूद इसके गठबंधन को जनता का समर्थन नहीं मिल सका और परिणामस्वरूप उन्हें करारी शिकस्त झेलनी पड़ी।
चुनाव में सबसे बड़ी जीत BEST वर्कर्स यूनियन के खाते में गई, जिसे शशांक राव पैनल कहा जाता है। इस पैनल ने 21 में से 14 सीटें जीतकर एक बार फिर कर्मचारियों के बीच अपनी पकड़ मजबूत साबित कर दी। वहीं भाजपा समर्थित पैनल ने भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए 7 सीटें जीत लीं और अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस तरह निदेशक मंडल की सभी सीटें या तो वर्कर्स यूनियन या फिर भाजपा खेमे में गईं, जबकि ठाकरे गठबंधन खाली हाथ रह गया।
इस नतीजे के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने ठाकरे बंधुओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “दो शून्यों का जोड़ हमेशा शून्य ही होता है, यह सरल गणित है।” वहीं शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने इस हार पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कहा कि यह स्थानीय स्तर का चुनाव है, जिसका राज्य की बड़ी राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। दूसरी ओर, शशांक राव ने अपनी जीत को BEST कर्मचारियों के विश्वास की जीत करार दिया।
इस चुनाव की अहमियत इसलिए भी अधिक थी क्योंकि यह ठाकरे ब्रदर्स की साझेदारी की पहली परीक्षा मानी जा रही थी। उद्धव और राज ठाकरे लंबे समय से अलग-अलग रास्तों पर थे और इस गठबंधन को लेकर उम्मीद थी कि यह मुंबई में विपक्ष की राजनीति को नई दिशा देगा। मगर पहले ही चुनाव में करारी हार मिलने से गठबंधन की साख और भविष्य दोनों पर सवाल उठ गए हैं। अब निगाहें आने वाले BMC चुनावों पर होंगी, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि ठाकरे ब्रदर्स इस नाकामी के बाद अपनी रणनीति में किस तरह बदलाव करते हैं।
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