मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के हतनारा गांव में मुहर्रम के जुलूस के दौरान गुरुवार, 25 जून 2026 की रात दर्दनाक हादसा हो गया। जुलूस में ले जाए जा रहे ताजिए का ऊपरी हिस्सा गांव से गुजर रही 11 केवी हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गया। तार छूते ही ताजिए में तेज करंट फैल गया, जिसकी चपेट में उसे उठाकर चल रहे कई लोग आ गए।
हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि नौ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए रतलाम मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
मृतकों की पहचान रशीद खान, सड्डू हुसैन और अरबाज खान के रूप में हुई है। हादसे के बाद गांव में मातम का माहौल है। मृतकों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
मेवाती मोहल्ले से गुजरते समय हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार हतनारा गांव में पारंपरिक मुहर्रम जुलूस निकाला जा रहा था। रात के समय बड़ी संख्या में लोग ताजिए के साथ जुलूस में शामिल थे। जुलूस जब गांव के मेवाती मोहल्ले से गुजर रहा था, तभी ताजिए का ऊपरी हिस्सा ऊपर से गुजर रही 11 केवी बिजली लाइन से टकरा गया।
हाईटेंशन तार के संपर्क में आते ही ताजिए और उसे पकड़े हुए लोगों में करंट फैल गया। करंट इतना तेज था कि कई लोग झटका लगते ही जमीन पर गिर पड़े। अचानक हुए हादसे से जुलूस में चीख-पुकार मच गई और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्थानीय लोगों ने तुरंत बिजली आपूर्ति बंद कराने और घायलों को बचाने का प्रयास शुरू किया। घायलों को निजी वाहनों और उपलब्ध साधनों से पहले नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तथा बाद में रतलाम मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया।
अस्पताल पहुंचाए गए कुल 12 लोग
करंट लगने के बाद कुल 12 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया था। चिकित्सकों ने जांच के बाद तीन लोगों को मृत घोषित कर दिया, जबकि नौ घायलों का इलाज जारी है।
कुछ घायलों को गंभीर विद्युत झटके और जलने की चोटें आई हैं। अस्पताल प्रशासन ने घायलों के इलाज के लिए चिकित्सकों की विशेष टीम तैनात की है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी अस्पताल तथा घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने घायलों की स्थिति की जानकारी ली और मामले की जांच शुरू कर दी है।
बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप
हादसे के बाद मृतकों के परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रत्येक वर्ष मुहर्रम के अवसर पर इसी रास्ते से ताजिया निकाला जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले वर्षों में जुलूस के दौरान एहतियात के तौर पर संबंधित बिजली लाइन की आपूर्ति कुछ समय के लिए बंद कर दी जाती थी। आरोप है कि इस बार बिजली विभाग का लाइनमैन आसपास मौजूद होने के बावजूद हाईटेंशन लाइन की सप्लाई बंद नहीं की गई।
ग्रामीणों का दावा है कि बिजली आपूर्ति समय पर बंद कर दी जाती तो यह हादसा टाला जा सकता था। हालांकि बिजली विभाग की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।
गांव के बीच काफी नीचे है हाईटेंशन लाइन
स्थानीय लोगों ने गांव के बीच से गुजर रही 11 केवी बिजली लाइन की ऊंचाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि तार काफी नीचे हैं और उनके नीचे से ऊंचे वाहनों तथा धार्मिक जुलूसों का निकलना जोखिम भरा रहता है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस लाइन को ऊंचा करने या गांव के बाहर स्थानांतरित करने की मांग पहले भी की जाती रही है। हादसे के बाद लोगों ने एक बार फिर जिला प्रशासन और बिजली विभाग से लाइन को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं होगी। जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के साथ-साथ गांव में बिजली लाइनों की ऊंचाई और सुरक्षा मानकों की तकनीकी जांच भी की जानी चाहिए।
पुलिस ने शुरू की हादसे की जांच
पुलिस के अनुसार हादसे से संबंधित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि जुलूस से पहले प्रशासन और बिजली विभाग को सूचना दी गई थी या नहीं तथा सुरक्षा के लिए बिजली बंद करने की कोई व्यवस्था की गई थी या नहीं।
पुलिस यह भी जांच करेगी कि हाईटेंशन लाइन निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार पर्याप्त ऊंचाई पर थी या नहीं। इसके अलावा जुलूस के मार्ग, ताजिए की ऊंचाई और आयोजकों द्वारा किए गए सुरक्षा इंतजामों की भी समीक्षा की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की लापरवाही सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग सामने आए आंकड़े
घटना के तुरंत बाद सामने आई शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई थी। बाद में अस्पताल और प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार कुल 12 लोगों को करंट लगने के बाद अस्पताल पहुंचाया गया, जिनमें तीन लोगों की मौत हो गई और नौ घायलों का इलाज जारी है।
एक मृतक के शव को परिजन अस्पताल की औपचारिकताएं पूरी होने से पहले अपने साथ ले गए थे, जिसके कारण शुरुआती प्रशासनिक आंकड़ों में मृतकों की संख्या कम बताई गई थी।
हतनारा गांव में शोक का माहौल
हादसे के बाद हतनारा गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। मृतकों के घरों पर ग्रामीणों और रिश्तेदारों की भीड़ जमा है। स्थानीय समाज के लोगों ने पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने, घायलों का निशुल्क इलाज कराने और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
घटना ने धार्मिक एवं सार्वजनिक जुलूसों के दौरान बिजली सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बड़े धार्मिक आयोजनों से पहले जुलूस के पूरे मार्ग का संयुक्त निरीक्षण किया जाना चाहिए।
सार्वजनिक जुलूसों की सुरक्षा पर उठे सवाल
रतलाम का यह हादसा बताता है कि सार्वजनिक और धार्मिक जुलूसों के दौरान बिजली लाइनों, ऊंची संरचनाओं और निर्धारित मार्ग की जांच कितनी आवश्यक है।
ऐसे आयोजनों से पहले पुलिस, स्थानीय प्रशासन, बिजली विभाग और आयोजन समिति के बीच समन्वय होना चाहिए। जुलूस के रास्ते में हाईटेंशन लाइन होने पर बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद करने, तारों की ऊंचाई जांचने और आवश्यक सुरक्षा कर्मचारी तैनात करने जैसे कदम बड़े हादसों को रोक सकते हैं।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि यह हादसा अचानक हुई चूक का परिणाम था या सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही बरती गई थी।
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