पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी ऑडिट संस्था CAG ने सुप्रीम कोर्ट में करीब 700 पन्नों की रिपोर्ट दाखिल करते हुए आरोप लगाया है कि 2017 की मालदा बाढ़ के दौरान राहत के नाम पर लगभग ₹100 करोड़ का गबन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ पीड़ितों के लिए जारी की गई राशि उन लोगों को बाँट दी गई जो इसके हकदार नहीं थे, जबकि वास्तविक पीड़ित नौ साल बाद भी मदद से वंचित हैं।
CAG की जाँच में ममता सरकार पर बाढ़ राहत कोष के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि मालदा जिले के 12 ब्लॉकों से सरकारी खजाने की बड़ी रकम निकाली गई, लेकिन वह ज़रूरतमंद लोगों तक नहीं पहुँची। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर चहेते लोगों को फायदा पहुँचाया गया और जब हिसाब माँगा गया तो कई जरूरी दस्तावेजों के “गायब” होने की बात कही गई।
A shocking 700-page CAG report submitted to the Calcutta High Court has exposed what could be a massive ₹100-crore scam in Malda’s flood relief funds under Mamata Banerjee’s TMC regime, a ruthless, systematic loot while genuine victims languish in misery.
The CAG findings lay… pic.twitter.com/1cAHupTJE6
— Amit Malviya (@amitmalviya) January 2, 2026
भ्रष्टाचार का सबसे चौंकाने वाला मामला हरिश्चंद्रपुर-II ब्लॉक से सामने आया है। यहाँ एक ही व्यक्ति को एक ही नुकसान के लिए 42 बार मुआवजा दिया गया। जहाँ सामान्य पीड़ित को प्रति मकान ₹17,600 मिलना था, वहीं कथित तौर पर कुछ लोगों को औसतन ₹70,000 तक दिए गए। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि एक ही व्यक्ति के खाते में अलग-अलग किस्तों में कुल ₹5.90 करोड़ की रकम जमा कराई गई।
CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, कागजों पर हेराफेरी कर नुकसान न झेलने वाले पक्के मकानों को भी बाढ़ से “तबाह” दिखाया गया। करीब 1,609 ऐसे पक्के मकान बताए गए, जिन्हें वास्तव में कोई क्षति नहीं हुई थी, लेकिन उनके नाम पर ₹7.5 करोड़ जारी कर दिए गए। प्रशासन ने बिना पर्याप्त जांच के यह राशि पास कर दी।
Today itself, the CAG exposed a massive scam under the TMC government—a ₹100-crore flood relief scam in Malda, where innocent victims were looted by the TMC.
And now, TMC’s former blue-eyed boy turned whistleblower, Humayun Kabir, has blown the lid off yet another pervasive… pic.twitter.com/L4IsRl3DHj
— Amit Malviya (@amitmalviya) January 2, 2026
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि करीब 71,000 कच्चे मकानों के नाम पर भारी फंड निकाला गया और वह ऐसे लोगों को दे दिया गया, जिनका पीड़ितों की सूची में नाम तक नहीं था। इससे साफ है कि राहत वितरण की पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएँ हुईं।
इस कथित घोटाले में नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए हैं। बताया गया है कि 36 पंचायत समिति सदस्य और सरकार से वेतन पाने वाले 72 ग्राम पंचायत सदस्य खुद को ही बाढ़ पीड़ित बताकर सरकारी पैसे का लाभ ले गए। पीड़ितों के वकील अनिंद्य घोष के अनुसार, उन्होंने उन 30 BDO (ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर) के नाम भी उजागर किए हैं, जो उस समय संबंधित इलाकों में तैनात थे और जिनकी मौजूदगी में यह पूरा खेल चला।
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