बिहार में वोटर लिस्ट सत्यापन पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: जारी रहेगा विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग से एक हफ्ते में जवाब तलब
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे राजनीतिक विवाद और कानूनी चुनौतियों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को राहत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया पर फिलहाल कोई रोक नहीं लगेगी और मतदाता सूची का सत्यापन जारी रहेगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से एक सप्ताह में जवाब भी माँगा है और 28 जुलाई 2025 को अगली सुनवाई तय की है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने चुनाव आयोग से कई कड़े सवाल किए। कोर्ट ने पूछा कि यह प्रक्रिया बिहार में नवंबर में संभावित विधानसभा चुनावों से क्यों जोड़ी जा रही है, और इसे चुनावी प्रक्रिया से अलग क्यों नहीं किया जा सकता?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को “लोकतंत्र की जड़ से जुड़ा” बताया और कहा कि यह मतदान के अधिकार से संबंधित मामला है। अदालत ने कहा कि संवैधानिक संस्था के कार्यों में अदालत हस्तक्षेप नहीं करेगी, लेकिन इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होना आवश्यक है।
#WATCH | Supreme Court allows the Election Commission of India to continue with its exercise of conducting a Special Intensive Revision (SIR) of electoral rolls in poll-bound Bihar.
Advocate Ashwini Upadhyay says, "…Our demand is that this verification drive should continue.… https://t.co/oJmLpCF2Ta pic.twitter.com/35h0A1WzyS
— ANI (@ANI) July 10, 2025
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने दलील दी कि मतदाता सूची में समय-समय पर नाम जोड़ने या हटाने के लिए संशोधन जरूरी है और SIR इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने अनुच्छेद 326 का हवाला देते हुए कहा कि केवल भारतीय नागरिकों को ही मतदाता सूची में शामिल किया जा सकता है, जबकि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि निर्वाचन आयोग को नागरिकता साबित करने की जिम्मेदारी नहीं है, यह काम गृह मंत्रालय का है। साथ ही कोर्ट ने सुझाव दिया कि आधार, राशन कार्ड और वोटर ID जैसे दस्तावेजों को पहचान के समर्थन में इस्तेमाल किया जा सकता है।
#WATCH | Supreme Court allows the Election Commission of India to continue with its exercise of conducting a Special Intensive Revision (SIR) of electoral rolls in poll-bound Bihar.
Congress MP KC Venugopal says, "…It is a relief for the democracy. The matter will now be heard… https://t.co/oJmLpCF2Ta pic.twitter.com/wNQ7McEboz
— ANI (@ANI) July 10, 2025
सुप्रीम कोर्ट ने 10 से अधिक याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की, जिनमें एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की याचिका भी शामिल है। इसके अलावा RJD सांसद मनोज झा, TMC सांसद महुआ मोइत्रा, कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, और शिवसेना, JMM, CPI, CPI(M-L) समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं ने भी इस प्रक्रिया को चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि 7.9 करोड़ मतदाताओं की समीक्षा के दौरान बिना उचित प्रक्रिया के लोगों के नाम हटाए जा सकते हैं, जिससे वोटिंग अधिकारों का उल्लंघन होगा।
फिलहाल कोर्ट ने प्रक्रिया पर स्थगन नहीं लगाया है, लेकिन चुनाव आयोग को कहा है कि किसी को सुने बिना मतदाता सूची से बाहर न किया जाए। आयोग से पूछा गया है कि:
- क्या उसके पास SIR का अधिकार है?
- यह प्रक्रिया किस कानून के तहत की जा रही है?
- और इसे कब और कैसे किया जाना उचित है?