भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी टलने की उम्मीद जिंदा, सुप्रीम कोर्ट 14 जुलाई को करेगा सुनवाई
केरल की रहने वाली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया, जिन्हें यमन में 16 जुलाई 2025 को फांसी दी जानी है, उनकी फांसी टलने की उम्मीद अब भी कायम है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने “सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल” की ओर से दायर याचिका स्वीकार कर ली है और अब इस पर 14 जुलाई को सुनवाई की जाएगी। याचिका में भारत सरकार और विदेश मंत्रालय को निर्देश देने की माँग की गई है ताकि वे समय रहते हस्तक्षेप करें और फांसी पर रोक लगवाने के प्रयास करें।
निमिषा प्रिया पर यमन में एक स्थानीय नागरिक तलाल अब्दो मेहदी की हत्या का आरोप है। वह 2008 में नर्स के तौर पर यमन गई थीं और वहीं उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया था। वर्ष 2020 में उन्हें हत्या के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई, जिसे यमन की उच्च अदालत ने भी बरकरार रखा। इसके बाद उनकी दया याचिका यमन के राष्ट्रपति ने भी खारिज कर दी।
ब्लड मनी आखिरी विकल्प
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, यमन की अदालत ने ब्लड मनी यानी मुआवजे के विकल्प को अब भी खुला रखा है। शरिया कानून के अनुसार, यदि मृतक के परिजन ब्लड मनी स्वीकार कर लें तो दोषी को फांसी से माफ किया जा सकता है। इस विकल्प को अंतिम उपाय मानते हुए याचिका में भारत सरकार से पीड़ित के परिवार से बातचीत कराने और मध्यस्थता की सुविधा देने की अपील की गई है।
बहुत कम समय शेष
याचिकाकर्ता के वकील रागेंथ बसंत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित सुनवाई की माँग की। उन्होंने बताया कि फांसी की तारीख बेहद नजदीक है और ब्लड मनी के जरिए समझौता कराने के लिए समय पर कार्रवाई बेहद जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने पहले सोमवार को सुनवाई का सुझाव दिया था, लेकिन वकील ने इसे और जल्द करने की अपील की, जिसके बाद 14 जुलाई को सुनवाई तय की गई।
अब उम्मीद जताई जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट भारत सरकार को जल्द निर्देश देगा, जिससे निमिषा प्रिया को बचाने के प्रयास तेज किए जा सकें। यदि ब्लड मनी के जरिए समझौता हो गया तो उनकी जान बच सकती है।