श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम यानी SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई गंभीर खुलासे हुए हैं। जांच टीम ने 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच उपलब्ध CCTV फुटेज की जांच में करीब 70 ऐसी घटनाओं को चिह्नित किया है, जिनमें चढ़ावे की गिनती से जुड़े कुछ कर्मचारी कथित तौर पर नकदी की गड्डियां और खुले नोट छिपाते दिखाई दिए। SIT ने इसे प्रथम दृष्टया चोरी, आपराधिक गबन और विश्वासघात से जुड़े अपराधों के संकेत के रूप में देखा है।
नौ पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट 23 जून को उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को सौंपी गई थी। सोमवार, 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में भी इस रिपोर्ट को रखा गया, जिसके बाद इसके विस्तृत निष्कर्ष सामने आए। इसलिए यह कहना अधिक सटीक होगा कि SIT ने सोमवार रात पहली बार रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की, बल्कि पहले से सरकार को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट के विवरण बैठक के बाद सामने आए।
40 दिनों में करीब 70 संदिग्ध घटनाएं CCTV में कैद
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून तक लगभग 40 दिनों के CCTV फुटेज में करीब 70 संदिग्ध घटनाएं मिलीं। जांचकर्ताओं का कहना है कि उपलब्ध फुटेज में चढ़ावा गिनने वाले कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां और खुले नोट कथित तौर पर कपड़ों, जेबों और दूसरे छिपे स्थानों में रखते दिखाई दिए। कुछ रिपोर्टों में जूतों और मोजों में नकदी छिपाने का भी उल्लेख किया गया है।
जांच में छह आरोपियों—अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रामशंकर मिश्रा—को प्रथम दृष्टया चोरी, आपराधिक गबन, आपराधिक विश्वासघात और चोरी की संपत्ति रखने जैसे कथित अपराधों से जोड़ा गया है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है। मामले में कुल आठ लोग गिरफ्तार किए गए हैं, लेकिन SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में CCTV और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कथित चोरी में छह आरोपियों की प्रथम दृष्टया भूमिका बताई गई है। बाकी दो—गिनती कक्ष के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव—की भूमिका कथित साजिश, सहायता, निगरानी में लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के संदर्भ में जांच के दायरे में है।
जेब रहित कपड़े और तलाशी का नियम था, लेकिन नहीं हुआ पालन
जांच में सबसे बड़ी खामियों में कर्मचारियों की तलाशी व्यवस्था सामने आई है। चढ़ावे की गिनती से जुड़े Standard Operating Procedures यानी SOP में कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले कपड़े पहनने, गिनती कक्ष में प्रवेश और बाहर निकलते समय तलाशी लेने तथा सुरक्षा गार्ड की मौजूदगी जैसे प्रावधान थे। जांच के अनुसार इन नियमों का प्रभावी पालन नहीं किया गया।
SIT के अनुसार सभी संदिग्ध चोरी की घटनाएं गिनती कक्ष के भीतर हुईं। ऐसे में कर्मचारियों की नियमित जांच नहीं होना एक बड़ी वजह मानी गई, जिससे कथित चोरी लंबे समय तक पकड़ में नहीं आई। जांच रिपोर्ट ने गिनती कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की निगरानी और अनिवार्य सुरक्षा प्रक्रियाओं को लागू न करने पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
यूनिफॉर्म तय थी, लेकिन धीरे-धीरे व्यवस्था हुई कमजोर
SIT के मुताबिक गिनती कर्मचारियों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड को भी सख्ती से लागू नहीं किया गया। तय नियमों के बावजूद कर्मचारियों ने अपने हिसाब से कपड़े पहनकर संवेदनशील गिनती प्रक्रिया में भाग लेना शुरू कर दिया। निजी सामान को गिनती क्षेत्र में ले जाने पर प्रभावी रोक भी नहीं रही।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्धारित यूनिफॉर्म, कर्मचारियों की नियमित तलाशी, निजी वस्तुओं पर रोक, आकस्मिक निरीक्षण और दैनिक रिपोर्टिंग जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बायोमैट्रिक उपस्थिति व्यवस्था भी लागू नहीं थी।
एंट्री-एग्जिट पर प्रभावी चेकिंग नहीं
SIT की जांच में प्रवेश और निकास के समय सुरक्षा जांच की कमी को गंभीर खामी माना गया है। रिपोर्ट के अनुसार यदि कर्मचारियों की नियमित तलाशी और सुरक्षा जांच होती, तो कथित तौर पर नकदी को गिनती कक्ष से बाहर ले जाना इतना आसान नहीं होता।
CCTV फुटेज में उपलब्ध संदिग्ध घटनाओं ने जांच एजेंसियों का ध्यान इसी कमजोर सुरक्षा व्यवस्था की ओर खींचा। SIT का मानना है कि लाइव CCTV फीड की सक्रिय निगरानी होती, तो कई कथित घटनाओं को वास्तविक समय में पकड़ा और रोका जा सकता था।
CCTV कैमरे लगे थे, मगर लाइव मॉनिटरिंग कमजोर
गिनती कक्ष में CCTV कैमरे लगे होने के बावजूद SIT ने निगरानी व्यवस्था को प्रभावी नहीं माना। जांचकर्ताओं के अनुसार यदि ट्रस्ट के जिम्मेदार अधिकारी लाइव CCTV फीड पर नियमित नजर रखते, तो कई संदिग्ध गतिविधियों का समय रहते पता चल सकता था।
एक अन्य बड़ी खामी CCTV रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की अवधि से जुड़ी मिली। आंतरिक ऑडिट में रिकॉर्डिंग को 180 दिन तक सुरक्षित रखने की सिफारिश के बावजूद वीडियो केवल लगभग 45 दिनों तक संरक्षित किए जा रहे थे। पुराने फुटेज ऑटोमैटिक तरीके से ओवरराइट हो जाने के कारण SIT यह तय नहीं कर सकी कि कथित अनियमितताएं 27 अप्रैल से पहले कितने समय से चल रही थीं।
क्या लंबे समय से चल रही थी कथित चोरी?
SIT ने कहा है कि आरोपियों के वित्तीय विश्लेषण, बरामद नकदी, संपत्तियों और पूछताछ में सामने आए तथ्यों से संदेह मजबूत हुआ कि कथित गतिविधियां 27 अप्रैल से पहले भी चल रही हो सकती थीं। हालांकि पुराने CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने के कारण जांच टीम अभी नुकसान की पूरी अवधि और कुल रकम का निर्धारण नहीं कर सकी है।
पुलिस भी आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और हाल में खरीदी गई संपत्तियों की जांच कर रही है। आठ गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े ठिकानों से पुलिस ने करीब ₹80 लाख नकद और संपत्ति संबंधी दस्तावेज जब्त किए होने की जानकारी दी है। कुल कथित चोरी की रकम और उसके संभावित मास्टरमाइंड की जांच अभी जारी है।
अनिल मिश्रा की भूमिका पर SIT ने उठाए गंभीर सवाल
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व वरिष्ठ ट्रस्टी अनिल मिश्रा की कथित प्रशासनिक और निगरानी संबंधी भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार वह वित्तीय मामलों और नकदी प्रबंधन से जुड़े कार्यों की देखरेख के साथ State Bank of India के साथ समन्वय में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
SIT के अनुसार अनिल मिश्रा ट्रस्ट और SBI के बीच चढ़ावे की गिनती, प्रबंधन और सुरक्षा के लिए तैयार किए गए MoU और SOP की प्रक्रिया से जुड़े थे। इसलिए नियम लागू होने के बाद उनकी समीक्षा और अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी उनके कार्यक्षेत्र से जुड़ी थी।
जांच टीम का कहना है कि अनिवार्य तलाशी न होने और अन्य सुरक्षा खामियों की जानकारी के बावजूद प्रभावी सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई। लिखित निर्देश, नियमित तलाशी, निर्धारित यूनिफॉर्म, निजी सामान पर रोक, अचानक निरीक्षण और दैनिक रिपोर्टिंग जैसी व्यवस्थाओं को पर्याप्त रूप से लागू नहीं किया गया।
यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि प्रारंभिक SIT रिपोर्ट ने अनिल मिश्रा को कथित नकदी चोरी करने वाले छह आरोपियों की सूची में शामिल नहीं किया है। उनके खिलाफ मुख्य निष्कर्ष प्रशासनिक, निगरानी और सुरक्षा प्रक्रियाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में कथित विफलता से जुड़े हैं।
गिनती कक्ष प्रभारी की भूमिका भी जांच के घेरे में
ट्रस्ट द्वारा नियुक्त गिनती कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका को भी SIT ने महत्वपूर्ण माना है। जांचकर्ताओं का कहना है कि सभी कथित चोरी की घटनाएं गिनती कक्ष में हुईं और नियमित तलाशी नहीं होना उन प्रमुख कारणों में था, जिनसे अनियमितताएं कथित तौर पर जारी रहीं।
SIT ने सुभाष श्रीवास्तव, गिनती कक्ष में तैनात कुछ निगरानी कर्मचारियों और टिन्नू यादव के खिलाफ कथित आपराधिक साजिश, सहायता, समान मंशा और गंभीर लापरवाही जैसे पहलुओं पर कार्रवाई की सिफारिश की।
टिन्नू यादव के पास बिना लिखित आदेश हुंडियों की चाबियां
रिपोर्ट का एक और बड़ा निष्कर्ष रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से जुड़ा है। SIT के मुताबिक मंदिर परिसर की दानपेटियों यानी हुंडियों की चाबियां कथित तौर पर उसके पास थीं, लेकिन इसके लिए कोई औपचारिक लिखित आदेश उपलब्ध नहीं था। जांच टीम ने ऐसी व्यवस्था को अनुचित और जवाबदेही से रहित बताया है।
टिन्नू यादव पहले ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय के चालक के रूप में काम कर चुका था और बाद में मंदिर प्रशासन से जुड़े कार्यों में प्रभावशाली भूमिका निभाने लगा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार उसे दानपेटियों और संवेदनशील क्षेत्रों तक कथित रूप से अनधिकृत पहुंच हासिल थी।
रिश्तेदार मनीष यादव को गिनती टीम में लगवाने का आरोप
SIT के अनुसार टिन्नू यादव ने अपने रिश्तेदार मनीष कुमार यादव को चढ़ावे की गिनती करने वाली टीम में शामिल कराने की सिफारिश की थी। इससे मनीष को अत्यंत संवेदनशील नकदी गिनती प्रक्रिया तक पहुंच मिली।
मनीष कुमार यादव उन छह लोगों में शामिल है, जिन्हें प्रारंभिक रिपोर्ट में कथित चोरी और गबन से जुड़े अपराधों में प्रथम दृष्टया नामित किया गया है। मामले में उसकी वित्तीय गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
छह आरोपी प्रथम दृष्टया कथित चोरी से जुड़े
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में इन छह लोगों के नाम कथित चोरी और आपराधिक गबन से जुड़े प्रथम दृष्टया साक्ष्यों के आधार पर सामने आए हैं:
अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रामशंकर मिश्रा।
मूल जानकारी में ‘कल्पेश पांडेय’ नाम दिया गया था, जबकि उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में आरोपी का नाम करुणेश पांडेय बताया गया है। इसी तरह रामशंकर मिश्रा और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू दो अलग-अलग व्यक्ति हैं।
SIT ने स्पष्ट किया है कि ये निष्कर्ष प्रारंभिक हैं। संस्थागत जिम्मेदारी, प्रशासनिक विफलता, संभावित व्यापक साजिश और व्यवस्था में सुधार से जुड़े पहलुओं की जांच अभी जारी है।
अविनाश शुक्ला से ₹20.39 लाख और 1,121 डॉलर बरामद
पुलिस जांच में आरोपी अविनाश शुक्ला से जुड़ी बरामदगी ने भी मामले को गंभीर बनाया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार उससे जुड़े ठिकानों से ₹20.39 लाख नकद, 1,121 अमेरिकी डॉलर, सोने के आभूषण, चांदी की वस्तुएं, अन्य कीमती सामान और एक SUV बरामद हुई।
आठ गिरफ्तार आरोपियों में अविनाश से जुड़ी बरामदगी को सबसे बड़ी बरामदगियों में बताया गया है। पुलिस उसके बैंक खातों, संपत्तियों और कथित वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है।
पूछताछ में सामने आया ₹19 लाख का कथित खर्च
पुलिस सूत्रों के अनुसार हिरासत में पूछताछ के दौरान अविनाश शुक्ला ने करीब ₹19 लाख के कथित खर्च और लेनदेन की जानकारी दी। जांचकर्ताओं का दावा है कि उसने एक भाई की शादी पर लगभग ₹6 लाख खर्च किए और दूसरे भाई को ₹5 से ₹6 लाख के बीच रकम दी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक उसने एक कार खरीदने पर करीब ₹3.5 लाख खर्च किए, एक मित्र को लगभग ₹2.5 लाख ट्रांसफर किए और महंगा मोबाइल फोन भी उपहार में दिया। जांच एजेंसियां अब उन खातों और लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जिन्हें कथित रकम ट्रांसफर की गई।
इन विवरणों को आरोपी का न्यायिक रूप से सिद्ध अपराध नहीं माना जा सकता। ये पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आए पूछताछ और जांच के दावे हैं, जिनकी अंतिम कानूनी स्थिति आगे की जांच और अदालत की प्रक्रिया से तय होगी।
अनुकल्प मिश्रा से जुड़े ठिकानों से ₹16.8 लाख मिलने का दावा
पुलिस सूत्रों के अनुसार अनुकल्प मिश्रा करीब ₹15,000 मासिक वेतन पर ठेका कर्मचारी के रूप में चढ़ावा गिनने के काम से जुड़ा था। उससे संबंधित ठिकानों की तलाशी में कथित तौर पर करीब ₹16.8 लाख नकद मिले।
जांच एजेंसियां एक महंगे मकान, फार्महाउस, प्रीमियम मोटरसाइकिल और बुक की गई SUV समेत उसकी कथित संपत्तियों की जांच कर रही हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ये संपत्तियां उसकी ज्ञात आय के अनुरूप थीं या नहीं।
लवकुश, करुणेश और अन्य आरोपियों से भी बड़ी बरामदगी
पुलिस सूत्रों के अनुसार लवकुश मिश्रा से जुड़े ठिकानों से करीब ₹14.25 लाख, रामशंकर मिश्रा से करीब ₹7.3 लाख और करुणेश पांडेय से संबंधित तलाशी में ₹18 लाख से अधिक नकदी बरामद होने का दावा किया गया है।
जांच एजेंसियां आठों आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खाते, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं। जब्त मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं, ताकि कथित वित्तीय लेनदेन, संचार और संभावित अन्य संबंधों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।
SBI और बैंक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में केवल ट्रस्ट अधिकारियों की निगरानी ही नहीं, बल्कि गिनती प्रक्रिया से जुड़े बैंक प्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार निर्धारित ड्रेस कोड लागू नहीं कराया गया और जिम्मेदार बैंक अधिकारियों का अनिवार्य मासिक रोटेशन भी नहीं हुआ।
बैंक प्रतिनिधि गिनती के दौरान मौजूद रहते थे, लेकिन जांच के अनुसार वे भी सहमत सुरक्षा प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित करने में प्रभावी नहीं रहे।
SIT ने चांदी की ईंटें गायब होने के दावे को खारिज किया
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि SIT को मंदिर को दान में मिली बड़ी मात्रा में चांदी या अन्य कुछ कीमती वस्तुओं के गायब होने के दावों के समर्थन में साक्ष्य नहीं मिले।
जांच में लगभग 38 किलो चांदी, 22.576 किलो चांदी की ईंटें और विश्व सिंधी सेवा समाज की ओर से दान की गई कुल 200 किलो चांदी की आठ ईंटों के रिकॉर्ड की जांच की गई। SIT ने कहा कि ये वस्तुएं रिकॉर्ड में दर्ज थीं और अधिकृत प्रक्रिया के तहत आगे की गई कार्रवाई के दस्तावेज उपलब्ध थे।
इसी तरह चांदी का एक हार और चांदी की पादुकाएं गायब होने के आरोप भी जांच में पुष्ट नहीं हुए। SIT के अनुसार ये वस्तुएं ट्रस्ट की सुरक्षित अभिरक्षा में हैं।
13 जून को योगी सरकार ने बनाई थी SIT
उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध के बाद 13 जून 2026 को मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। टीम ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी।
प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद 25 जून को FIR दर्ज हुई और आठ आरोपियों—अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव—को गिरफ्तार किया गया।
अंतिम रिपोर्ट में तय हो सकती है व्यापक जवाबदेही
SIT ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा रिपोर्ट प्रारंभिक है। संस्थागत विफलता, अधिकारियों की जवाबदेही, कथित चोरी की कुल रकम और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए व्यवस्था में बदलाव से जुड़े मुद्दे अंतिम जांच का हिस्सा हैं।
फिलहाल जांच का सबसे बड़ा सवाल यह है कि उपलब्ध 40 दिनों के CCTV फुटेज में ही करीब 70 संदिग्ध घटनाएं दिखाई दीं, तो पुरानी रिकॉर्डिंग उपलब्ध होती तो तस्वीर कितनी व्यापक हो सकती थी। जांच एजेंसियां अभी कुल कथित नुकसान, आरोपियों के वित्तीय नेटवर्क और संभावित अन्य भूमिकाओं का पता लगाने में जुटी हैं।
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