अब लाल सागर में जहाजों पर हमला किया तो यमन के हूतियों की खैर नहीं
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इन पर सतत निगरानी रखने के लिए एक अहम प्रस्ताव पारित किया है। अब अगर हूती जहाजों को फिर से निशाना बनाते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।
यह प्रस्ताव अमेरिका और यूनान द्वारा संयुक्त रूप से प्रस्तुत किया गया था, जिसे 12 देशों का समर्थन मिला। हालांकि रूस, चीन और अल्जीरिया ने इससे दूरी बनाए रखी और यमन की संप्रभुता के उल्लंघन की आशंका जताई। इनका इशारा अमेरिका द्वारा हूती ठिकानों पर किए गए हालिया हवाई हमलों की ओर था।
प्रस्ताव के प्रमुख बिंदु:
- संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस को 15 जनवरी 2026 तक हूती हमलों पर मासिक रिपोर्ट सुरक्षा परिषद को देनी होगी।
- प्रस्ताव में हूती हमलों की निंदा की गई और उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया है।
अमेरिका और यूनान का रुख:
अमेरिका की कार्यवाहक राजदूत डोरोथी शिया ने प्रस्ताव को “ईरान समर्थित हूती आतंकवाद के खिलाफ सतर्कता बनाए रखने की दिशा में एक जरूरी कदम” बताया। उन्होंने दो वाणिज्यिक पोत—एमवी मैजिक सीज और एमवी एटरनिटी सी पर हमलों का हवाला दिया, जिनके डूबने से कई नाविकों की जान गई और कुछ अभी भी बंधक हैं।
यूनान के संयुक्त राष्ट्र दूत एवानजेलोस सेकेरिस ने कहा कि हूती हमलों से वैश्विक समुद्री समुदाय में अविश्वास और असुरक्षा बढ़ी है। उन्होंने जोर दिया कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक स्थिरता के लिए नौवहन की स्वतंत्रता आवश्यक है।
हमले क्यों हो रहे हैं?
हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में जहाजों पर ये हमले 7 अक्टूबर 2023 के बाद शुरू किए, जब हमास ने इज़रायल पर हमला किया और इज़रायली सेना ने गाजा में जवाबी कार्रवाई शुरू की। हूतियों का दावा है कि वे इजरायली कार्रवाई के विरोध में यह सब कर रहे हैं, लेकिन इसके चलते वैश्विक समुद्री मार्ग पर संकट गहराता जा रहा है।
अब संयुक्त राष्ट्र की निगरानी और दबाव के बाद अगर हूती फिर से लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाते हैं, तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।