योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार अब धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। अयोध्या, काशी और मथुरा के विकास के बाद अब राज्य सरकार नाथ संप्रदाय से जुड़े धार्मिक स्थलों को ‘गुरु गोरखनाथ सर्किट’ के तहत विकसित करने की योजना पर काम कर रही है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में फैले नाथ परंपरा से जुड़े मंदिरों, मठों, गुफाओं और तपस्थलों को एक संगठित धार्मिक पर्यटन मार्ग में बदलना है। इससे न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि राज्य में आध्यात्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
गोरखपुर बनेगा सर्किट का केंद्र
गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर इस पूरे सर्किट का मुख्य केंद्र होगा। नाथ संप्रदाय में गुरु गोरखनाथ का विशेष महत्व है और गोरखनाथ मंदिर को इस परंपरा का सबसे बड़ा आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। यहां हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिनमें नेपाल से आने वाले भक्त भी शामिल हैं।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, सरकार गोरखपुर को एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
कई जिलों को जोड़ेगा धार्मिक कॉरिडोर
प्रस्तावित ‘गुरु गोरखनाथ सर्किट’ के तहत बुंदेलखंड से पूर्वांचल तक कई जिलों को जोड़ा जाएगा। इसमें महोबा, चित्रकूट, बरेली, अमेठी, बलरामपुर समेत कई प्रमुख स्थान शामिल हैं।
सरकार इन क्षेत्रों में सड़क, पार्किंग, शौचालय, ध्यान केंद्र और अन्य पर्यटन सुविधाओं का तेजी से विकास कर रही है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके।
महोबा और बरेली में तेजी से विकास कार्य
गोरखगिरि पर्वत को नाथ साधना का महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। यहां स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत करोड़ों रुपए की लागत से विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिसमें ध्यान केंद्र, ओपन एयर थिएटर और पैदल मार्ग शामिल हैं।
वहीं बरेली में अलखनाथ मंदिर, त्रिवटी नाथ मंदिर, तुलसी मठ और पशुपतिनाथ मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों का सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास किया जा रहा है।
अमेठी में बनेगी 25 फीट ऊंची प्रतिमा, नेपाल से जुड़ाव बढ़ेगा
अमेठी के जायस को गुरु गोरखनाथ की जन्मस्थली माना जाता है। यहां सरकार 25 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित कर रही है, जिसमें गुरु गोरखनाथ योग मुद्रा में दिखाई देंगे।
सरकार की योजना भविष्य में इस सर्किट को नेपाल तक विस्तार देने की भी है। काठमांडू और गोरखा जैसे क्षेत्रों का नाथ परंपरा से गहरा संबंध माना जाता है। इससे भारत-नेपाल के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नया आयाम मिल सकता है।
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