उत्तर प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र को आधुनिक और आकर्षक बनाने के लिए योगी सरकारने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार अब कैप्सूल पॉड्स, कारवाँ टूरिज्म और थीम-आधारित ठहराव जैसे नए और इनोवेटिव ‘स्टे विकल्पों’ को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए उद्यमियों और स्टार्टअप्स से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं।
इन परियोजनाओं को “न्यू टूरिज्म स्टार्टअप यूनिट” श्रेणी में शामिल किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य युवा यात्रियों को आकर्षित करना और छोटे शहरों में पर्यटन को बढ़ावा देना है।
एक्सपीरियंस-ड्रिवन और किफायती पर्यटन पर जोर
सरकार का फोकस अब पारंपरिक होटलों से हटकर ऐसे स्टे विकल्पों पर है जो अनुभव-आधारित (experience-driven), टेक्नोलॉजी-समर्थित और किफायती हों। यह पहल खासतौर पर उन यात्रियों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो कम बजट में अनोखा और यादगार ट्रैवल अनुभव चाहते हैं।
Uttar Pradesh is advancing experience-driven tourism infrastructure by promoting innovative concepts such as hobbit-style homes, mud cottages, capsule pods, luxury caravans and open-air star bed setups. To accelerate implementation, the state has operationalised a special tourism… pic.twitter.com/aS2qtfLuLZ
— INVEST UP (@_InvestUP) April 24, 2026
स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन
इस योजना के तहत सरकार पर्यटन स्टार्टअप्स को बड़ा आर्थिक सहयोग दे रही है:
- ₹10 लाख से ₹10 करोड़ तक की परियोजनाओं पर 25% से शुरू होने वाली सब्सिडी
- स्टांप ड्यूटी में 100% छूट
- जमीन उपयोग परिवर्तन और विकास शुल्क में राहत
- महिला और SC/ST उद्यमियों को अतिरिक्त 5% सब्सिडी
सभी प्रस्तावों की समीक्षा State Level Special Tourism Committee (SLSTC) द्वारा की जाएगी, जो प्रोजेक्ट के अनुसार प्रोत्साहन तय करेगी।
नए स्टे मॉडल्स से बदलेगा पर्यटन अनुभव
राज्य सरकार कई नए और इनोवेटिव स्टे मॉडल्स को बढ़ावा दे रही है:
कैप्सूल पॉड्स
जापानी डिजाइन से प्रेरित छोटे, आधुनिक और टेक्नोलॉजी से लैस स्लीपिंग यूनिट। Varanasi जैसे शहरों में ये पहले से लोकप्रिय हो रहे हैं।
कारवाँ टूरिज्म
चलते-फिरते घर जिनमें सभी जरूरी सुविधाएँ होती हैं। Lucknow–Ayodhya मार्ग पर इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है।
ओपन-टू-स्काई (स्टार बेड)
खुले आसमान के नीचे ठहरने और तारों का आनंद लेने का अनोखा अनुभव। बुंदेलखंड और तराई क्षेत्र इसके लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं।
हॉबिट हाउस
पर्यावरण के अनुकूल, थीम-आधारित ठहराव जो स्थानीय सामग्री से बनाए जाते हैं। Lakhimpur Kheri और Banda में ऐसे मॉडल्स का परीक्षण हो चुका है।
रोजगार और छोटे शहरों को मिलेगा बढ़ावा
अधिकारियों के अनुसार, ये स्टे मॉडल पारंपरिक होटलों की तुलना में कम लागत में और तेजी से विकसित किए जा सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, खासकर उन इलाकों में जहाँ बड़े होटल प्रोजेक्ट संभव नहीं हैं।
सरकार का लक्ष्य पर्यटन को सिर्फ “डेस्टिनेशन” तक सीमित न रखकर “एक्सपीरियंस” आधारित बनाना है, जिससे अधिक से अधिक पर्यटक आकर्षित हों।
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