पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है, जहां इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने एक नया मोड़ ले लिया है। हाल ही में इज़रायल ने ईरान के इस्फहान स्थित प्रमुख परमाणु केंद्र और मिसाइल कार्यक्रम पर जबरदस्त हमला किया है। इस हमले के बाद ईरान ने इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा कि कोई खतरनाक रिसाव नहीं हुआ है। हालांकि, ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्फहान में सुबह-सुबह तेज़ धमाकों की आवाजें सुनी गईं। यह क्षेत्र पहले भी इज़रायली हमलों का निशाना बन चुका है।
इसी बीच इज़रायली रक्षा बलों (IDF) ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की कुद्स फोर्स में फिलिस्तीनी डिवीजन के प्रमुख सईद इज़ादी को मार गिराया है। IDF के अनुसार, यह कार्रवाई ईरानी शहर क़ुम में एक अपार्टमेंट पर किए गए सटीक हवाई हमले में अंजाम दी गई। इज़रायल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह “हमारे बंधकों और मारे गए नागरिकों के लिए न्याय का कार्य” है। उन्होंने इस ऑपरेशन को इज़रायली खुफिया एजेंसी और वायुसेना की “बड़ी उपलब्धि” बताया।
कौन था सईद इज़ादी?
रक्षा मंत्री काट्ज़ के अनुसार, सईद इज़ादी ने 7 अक्टूबर 2023 को इज़रायल में हमास द्वारा किए गए नरसंहार से पहले हमास को धन और हथियार मुहैया कराए थे। उन्होंने एक खुफिया दस्तावेज़ का हवाला देते हुए कहा कि जून 2021 में हमास के तत्कालीन नेता यह्या सिनवार और मोहम्मद देइफ ने ईरानी कुद्स फोर्स प्रमुख इस्माइल क़ानी को एक पत्र लिखा था, जिसमें इज़रायल पर हमले की योजना को मूर्त रूप देने के लिए 50 करोड़ डॉलर की सहायता मांगी गई थी। काट्ज़ ने दावा किया कि इज़ादी ने इस पत्र का जवाब देते हुए कहा था कि भले ही ईरान आर्थिक संकट और जनता की कठिनाइयों से जूझ रहा हो, लेकिन इज़रायल और अमेरिका के खिलाफ जिहाद उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और हमास को मदद जारी रहेगी।
इज़रायली सेना ने कहा कि यह कार्रवाई उन सभी दुश्मनों के लिए एक संदेश है जो इज़रायल की सुरक्षा और अस्तित्व को चुनौती देते हैं। काट्ज़ ने जोर देकर कहा कि “इज़रायल की लंबी बांह” अब उन सभी तक पहुंचेगी जो हमारे नागरिकों के खिलाफ आतंक फैलाने की साजिश रचते हैं।
इस बीच इज़रायल ने अपनी सीमाओं की रक्षा को और मजबूत किया है। हाल ही में गोलन हाइट्स में एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया गया। IDF ने इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया और कहा कि इज़रायली सेना देश पर मंडराने वाले हर खतरे का जवाब देने के लिए तैयार है।
उधर ईरान ने राजनयिक स्तर पर समर्थन जुटाने के लिए सक्रियता बढ़ा दी है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची शनिवार को तुर्की के इस्तांबुल पहुंचे, जहां वे इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और अरब लीग के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे। यह बैठक विशेष रूप से ईरान-इज़रायल संघर्ष और गाज़ा संकट पर चर्चा के लिए बुलाई गई है, जिसमें करीब 40 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
इज़रायल की इन हालिया सैन्य कार्रवाइयों ने न केवल ईरान के भीतर सक्रिय आतंक नेटवर्क को झटका दिया है, बल्कि यह दर्शाता है कि अब संघर्ष केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वह खुफिया रणनीति, परमाणु सुरक्षा, और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के स्तर तक फैल चुका है। यह टकराव आने वाले दिनों में और अधिक उग्र हो सकता है, जिससे पूरा पश्चिम एशिया क्षेत्र अस्थिरता के एक और गंभीर दौर में प्रवेश कर सकता है।
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