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क्या है ‘इस्लामिक जिहाद’, जिसके रॉकेट से गाजा के अस्पताल में मरे 500: ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से निकला है PIJ, हमास की तरह ही इजरायल को नक़्शे से मिटाना है मकसद

PIJ सदस्य हिंसा को मध्य पूर्व के नक्शे से इज़रायल को हटाने का इकलौता तरीका मानते हैं। पीआईजे इज़राइल और फिलिस्तीन के सह-अस्तित्व वाले किसी भी दो-राष्ट्रों वाली व्यवस्था को अस्वीकार करता हैं।

Last updated: 2023/10/18 at 3:45 PM
One India News Team
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गाजा शहर के अल-अहली अरब अस्पताल में मिसाइल हमले में सैकड़ों लोगों के मारे जाने की सूचना के बाद मंगलवार (17 अक्टूबर, 2023) की रात को इजरायली सेना ने कहा कि ये हमला उसने नहीं किया है। साथ ही अपने दावे के समर्थन में पुख़्ता सबूत इजरायल डिफेंस फोर्स ने अपने एक्स हैंडल पर साझा किए।

Contents
इस्लामी जिहाद (PJI) क्या है?कब वजूद में आया ये संगठनक्या है पीआईजे का मकसदये देश है पीआईजे का स्पॉन्सरपीआईजे हमास से कैसे है अलगपीआईजे के कौन हैं नेता

इसके लिए इज़रायली रक्षा बलों ने गाजा के फिलिस्तीनी सशस्त्र विद्रोही गुट फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद (PJI) को दोषी ठहराया था। सेना का कहना था कि उनकी तरफ छोड़ा जा रहा रॉकेट मिसफ़ायर होकर अस्पताल पर गिरा था। वहीं गाजा में हमास से जुड़े स्वास्थ्य अधिकारियों ने विस्फोट को इज़रायली हवाई हमला करार दिया था। उन्होंने दावा किया कि देर शाम एक हवाई हमले में गाजा के शहर के इस अस्पताल को निशाना बनाया गया था। इजरायल ने इस हमले के लिए जिस गुट को जिम्मेदार ठहराया है वो क्या है, आपको जानने की ज़रूरत है।

इस्लामी जिहाद (PJI) क्या है?

अमेरिकी विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों में विशेषज्ञता वाले थिंक टैंक काउंसिल ‘ऑन फॉरेन रिलेशन्स (OFR)’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘फ़िलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद‘ (PIJ) एक इस्लामी फ़िलिस्तीनी राष्ट्रवादी संगठन है। ये इज़रायल के अस्तित्व का हिंसक विरोध करता है। अमेरिकी विदेश विभाग की आतंकवाद पर 2006 की रिपोर्ट के मुताबिक, 1997 में PIJ के आतंकवादी संगठन होने का ऐलान किया था।

पीआईजे पूरे फिलिस्तीन में एक इस्लामी शासन लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता में इजरायली नागरिकों और सैन्य कर्मियों को निशाना बनाता है। हालाँकि, फतह या हमास के उलट पीआईजे राजनीतिक प्रक्रिया में शिरकत नहीं करता है।

कब वजूद में आया ये संगठन

फिलिस्तीनी इस्लामी जिहाद के संस्थापक फतेही शाकाकी (Fathi Shaqaqi) और अब्द अल-अजीज अवदा (Abd al-Aziz Awda) मिस्र में छात्र थे। ये दोनों 1970 के दशक के आखिर तक मिस्र ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ के सदस्य थे। उन्हें लगा कि ब्रदरहुड बहुत उदारवादी होता जा रहा था और फिलिस्तीनी के फायदों के लिए उसकी प्रतिबद्धता काफी नहीं है। इसके बाद इन दोनों ने ‘फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद’ (पीआईजे) बनाने का फैसला किया।

इसके साथ ही पीआईजे इजराइल के उग्रवादी विनाश और एक संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य की पुनर्स्थापना के लिए प्रतिबद्ध एक अलग इकाई के तौर पर उभरा। ये बात गौर करने वाली है कि पीआईजे ने सुन्नी समूह होने के बावजूद 1979 की ईरानी क्रांति के दौरान अपनाए गए क्रांतिकारी, धार्मिक शिया नीतियों से प्रेरणा ली थी, जिसने एक इस्लामी शासन की स्थापना की।

इस इस्लामी जिहादी संगठन की स्थापना 1980 के दशक में गाजा पट्टी में इजरायली कब्जे से लड़ने और गाजा और वेस्ट बैंक में मौजूदगी बनाए रखने के लिए की गई थी। ये गाजा में दूसरा सबसे बड़े सशस्त्र समूह है। अक्सर इस्लामिक जिहाद बड़े आतंकी हमास संगठन के साथ मिलकर ही काम करता है।

हालाँकि, हमास ने 2007 से गाजा को काबू में कर यहाँ अपना शासन जमाया। बीते 35 साल में गाजा में हमास की ही तूती बोलती है। ईरान इन दोनों समूहों को फंडिंग करता है, साथ ही हथियारों की सप्लाई करता है। इज़रायल और ‘संयुक्त राज्य अमेरिका’ (USA) दोनों को आतंकवादी संगठन मानते हैं।

क्या है पीआईजे का मकसद

दरअसल, ‘फ़िलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद’ 1948 से पहले के जनादेश वाले फ़िलिस्तीन की भौगोलिक सीमाओं के साथ एक संप्रभु, इस्लामी फ़िलिस्तीनी राज्य को दोबारा से स्थापित करना चाहता है। पीआईजे हिंसक तरीकों से इज़रयल के विनाश की वकालत करता है।

यही नहीं, ये अरब-इजरायल संघर्ष को क्षेत्रीय विवाद के तौर पर नहीं बल्कि एक वैचारिक युद्ध के तौर पर देखता है। PIJ सदस्य हिंसा को मध्य पूर्व के नक्शे से इज़रायल को हटाने का इकलौता तरीका मानते हैं। पीआईजे इज़राइल और फिलिस्तीन के सह-अस्तित्व वाले किसी भी दो-राष्ट्रों वाली व्यवस्था को अस्वीकार करता हैं।

अन्य फिलिस्तीनी अलगाववादी समूहों के उलट पीआईजे बातचीत करने या राजनयिक प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार करता है। यह फिलिस्तीनी प्राधिकरण के भीतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व की माँग नहीं करता है। यही वजह है कि पीआईजे पर इजरायली ठिकानों पर कई आतंकवादी हमले कर  1993 के इजरायल और फिलिस्तीन ओस्लो समझौते की कोशिशों में रूकावट डालने की कोशिश करने का भी आरोप है।

ये देश है पीआईजे का स्पॉन्सर

अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, ईरान पीआईजे बजट के अधिकांश हिस्से की फंडिंग करता है। वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका ने सीरिया पर इस समूह के लिए “सुरक्षित शरणस्थल” देने और पीआईजे मुख्यालय को दमिश्क में रहने की रजामंदी देने का भी आरोप लगाया है।

पीआईजे हमास से कैसे है अलग

पीआईजे एक तरह से हमास का प्रतिद्वंद्वी उग्रवादी समूह है। ये अक्सर हमास से फ़िलिस्तीनियों के समर्थन के लिए प्रतिस्पर्धा करता रहता है। हालाँकि, पीआईजे कोई सामाजिक सेवाएँ नहीं देता है।

इसके अलावा ये इज़राइल के साथ किसी भी तरह की की राजनयिक बातचीत में शामिल होने का इरादा रखता है। हमास से बहुत छोटे इस आतंकी संगठन पीआईजे के सदस्य इस्लाम के लिए इसके ऐतिहासिक अहमियत की वजह से इस जमीन को बेहद पाक मानते हैं। यही वजह है कि ये समूह हिंसक तरीकों से इज़राइल का पूरी तरह से खात्मा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

पीआईजे के कौन हैं नेता

मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए फतेही शाकाकी गाजा से मिस्र चला गया। वहाँ ये मिस्र ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ के साथ सक्रिय हो गए। आखिरकार उसने इस संगठन के बढ़ते समभाव को देखते हुई इसकी खासी बुराई की।

इसके बाद वो काफी वक्त से पीआईजे के आध्यात्मिक नेता रहे अब्द अल-अज़ीज़ अवदा के साथ साथ चला गया। सीरियाई संरक्षण के तहत दमिश्क में बसने से पहले शाकाकी देश निकावे की वजह से मध्य पूर्व में घूमता रहा था। आखिरकार सीरियाई संरक्षण के तहत वो दमिश्क में बस गया।

शाकाकी 1995 में कथित तौर पर इजरायली एजेंटों के हाथों माल्टा में मारे जाने तक इस संगठन का चीफ बना रहा था। इसके बाद उसकी जगह ब्रिटेन में पढ़े फ़िलिस्तीनी रमज़ान अब्दुल्ला शल्लाह ने ले ली। अब्दुल्ला शल्लाह 1990 से 1995 तक दक्षिण फ्लोरिडा के विश्वविद्यालय में मध्य पूर्वी कोर्स पढ़ाया करता था।

अमेरिका की संघीय जाँच एजेंसी के अधिकारियों ने फ़िलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद के आठ नेताओं को 2003 में 50 आरोपों में दोषी ठहराया गया था। इनमें से केवल एक सामी अल-एरियन को गिरफ्तार किया जा सका था और उस पर मुकदमा चलाया गया था। हालाँकि, अल-एरियन ने आतंकवाद से संबंध रखने से इनकार किया था।

 

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One India News Team October 18, 2023
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