पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से सिख धार्मिक धरोहर से जुड़ी एक गंभीर घटना सामने आई है। फारूकाबाद में स्थित करीब 125 साल पुराने गुरुद्वारा सिंह सभा को कथित तौर पर ध्वस्त कर दिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह गुरुद्वारा गुरुद्वारा सच्चा सौदा के पास स्थित था और 24-25 जून 2026 की रात अज्ञात लोगों द्वारा गिराया गया। घटना के बाद सिख समुदाय में गहरा आक्रोश है और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुद्वारा सिंह सभा ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल माना जाता था। रिपोर्ट में इसे सिंह सभा आंदोलन से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल बताया गया है। इस घटना के बाद सिख प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील की है।
सिख प्रतिनिधियों का आरोप है कि इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से लापरवाही बरती जा रही थी। स्थानीय सिख प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने इस मामले में आंखें मूंद रखी थीं। घटना के बाद पाकिस्तान में भी सिख समुदाय के लोगों ने विरोध दर्ज कराया।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि गुरुद्वारे की मुख्य गुंबद को करीब चार साल पहले भूमाफिया से जुड़े लोगों ने नुकसान पहुंचाया था। रिपोर्ट के अनुसार, उस समय भी सिख समुदाय ने पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन Evacuee Trust Property Board यानी ETPB और Pakistan Sikh Gurdwara Parbandhak Committee यानी PSGPC की ओर से इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
घटना के बाद स्थानीय विरोध को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल स्थल को सील कर दिया है और आगे किसी भी तरह के निर्माण या तोड़फोड़ पर रोक लगाए जाने की बात सामने आई है। सिख प्रतिनिधियों का कहना है कि केवल सीलिंग पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुरुद्वारे की मूल स्थिति बहाल करने और दोषियों पर कार्रवाई की जरूरत है।
यह मामला पाकिस्तान में अल्पसंख्यक धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस का विषय बन गया है। पाकिस्तान में हिंदू और सिख धार्मिक स्थलों की देखरेख मुख्य रूप से Evacuee Trust Property Board के तहत आती है। ETPB की अपनी वेबसाइट के अनुसार, उसका एक प्रमुख कार्य सिख और हिंदू धार्मिक स्थलों का प्रबंधन और तीर्थयात्रियों को सुविधा देना है।
इससे पहले भी फारूकाबाद क्षेत्र से गुरुद्वारे की उपेक्षा से जुड़ी खबरें सामने आई थीं। फरवरी 2026 में एक वायरल वीडियो का उल्लेख किया गया था, जिसमें फारूकाबाद स्थित एक गुरुद्वारे के परिसर में खाद्य सामग्री तैयार किए जाने और निशान साहिब से जुड़े स्थान पर सामान रखे जाने का दावा किया गया था। उस रिपोर्ट में भी यह स्थल ETPB की देखरेख में बताया गया था।
सिख समुदाय का कहना है कि गुरुद्वारे केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और पहचान से जुड़े धरोहर स्थल हैं। इसलिए ऐसे स्थलों की सुरक्षा केवल स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पाकिस्तान सरकार और संबंधित बोर्डों की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी भी है।
इस घटना ने पाकिस्तान की उस छवि पर भी सवाल खड़े किए हैं, जिसमें वह समय-समय पर पुराने हिंदू और सिख धार्मिक नामों तथा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की बात करता रहा है। लेकिन गुरुद्वारा सिंह सभा जैसी ऐतिहासिक इमारत के ध्वस्तीकरण ने अल्पसंख्यक धरोहरों की वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
अब सिख संगत और धार्मिक प्रतिनिधियों की मांग है कि गुरुद्वारा सिंह सभा को दोबारा मूल स्वरूप में बनाया जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, भूमाफिया या दोषियों की पहचान की जाए और ETPB तथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel