मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला परिसर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश सामने आया है। शीर्ष अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI को निर्देश दिया है कि मामले की अगली सुनवाई तक परिसर में किसी प्रकार का ढांचागत परिवर्तन न किया जाए।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं पर हिंदू पक्ष, राज्य सरकार, धार के जिलाधिकारी और ASI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के पूरे फैसले पर रोक लगाने से इनकार किया है।
परिसर में कोई Structural Change नहीं करेगा ASI
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि मामले के लंबित रहने के दौरान ASI भोजशाला परिसर की मौजूदा संरचना में कोई बदलाव नहीं करेगा।
इसका अर्थ है कि परिसर में:
- कोई नया निर्माण नहीं किया जाएगा।
- मौजूदा ढांचे को हटाया या बदला नहीं जाएगा।
- धार्मिक स्वरूप को प्रभावित करने वाला परिवर्तन नहीं होगा।
- ऐसी मरम्मत या पुनर्निर्माण गतिविधि नहीं होगी जिससे विवादित संरचना की स्थिति बदल जाए।
हालांकि नियमित संरक्षण और सुरक्षा से जुड़े आवश्यक कार्य अदालत के आदेश तथा कानून के अधीन किए जा सकते हैं। पूर्व के एक आदेश में भी सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला के चरित्र में परिवर्तन पर यथास्थिति बनाए रखने की बात कही थी।
शुक्रवार की नमाज पर क्या व्यवस्था रहेगी?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला परिसर के भीतर शुक्रवार की नमाज की पुरानी व्यवस्था समाप्त हो गई थी। मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से पिछले लगभग चार दशकों से चली आ रही स्थिति बहाल करने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल परिसर के अंदर नमाज की अनुमति बहाल नहीं की। इसके बजाय राज्य प्रशासन से कहा गया है कि भोजशाला परिसर के पास शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज के लिए अलग और उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराया जाए।
यह व्यवस्था अंतरिम होगी और अंतिम फैसला आने तक लागू रह सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह किसी पक्ष के अंतिम अधिकार का निर्धारण नहीं है।
CJI ने वैकल्पिक जगह का दिया प्रस्ताव
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि क्या भोजशाला के आसपास नमाजियों के लिए कोई खुली या उपयुक्त जगह उपलब्ध कराई जा सकती है।
पीठ ने कहा कि जब तक याचिकाओं पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक ऐसी अंतरिम व्यवस्था से धार्मिक गतिविधि और कानून-व्यवस्था दोनों का संतुलन बनाया जा सकता है।
कोर्ट ने जनवरी 2026 में बसंत पंचमी के अवसर पर भी दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग स्थान और समय निर्धारित करते हुए पूजा तथा नमाज की अस्थायी व्यवस्था दी थी।
मुस्लिम पक्ष ने पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की
मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी और अन्य मुस्लिम पक्षकारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी और अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में दलीलें रखीं।
मुस्लिम पक्ष ने कहा कि समुदाय वर्षों से प्रत्येक शुक्रवार परिसर में नमाज पढ़ता रहा है। हाईकोर्ट के निर्णय के बाद इस व्यवस्था को अचानक समाप्त कर दिया गया और समुदाय को परिसर से पूरी तरह बाहर कर दिया गया।
वकीलों ने मांग की कि अंतिम फैसला आने तक वर्ष 2003 के ASI आदेश के तहत लागू व्यवस्था या उससे पहले की यथास्थिति बहाल की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यह मांग स्वीकार नहीं की, लेकिन परिसर के पास वैकल्पिक नमाज स्थल देने का निर्देश देकर अंतरिम संतुलन बनाने का प्रयास किया।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने 15 मई 2026 को भोजशाला-कमाल मौला परिसर को देवी वाग्देवी यानी सरस्वती को समर्पित मंदिर और संस्कृत शिक्षा का ऐतिहासिक केंद्र माना था।
हाईकोर्ट ने ASI का वर्ष 2003 का वह आदेश रद्द कर दिया था, जिसके तहत:
- हिंदुओं को मंगलवार को पूजा की अनुमति थी।
- मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज की अनुमति थी।
- बसंत पंचमी पर विशेष धार्मिक व्यवस्था बनाई जाती थी।
हाईकोर्ट ने हिंदू समुदाय को नियमित पूजा का अधिकार दिया और परिसर में मुस्लिम समुदाय की शुक्रवार की नमाज की व्यवस्था समाप्त कर दी।
ASI सर्वे रिपोर्ट में क्या सामने आया था?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मार्च 2024 में भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराने का आदेश दिया था। ASI ने लगभग 98 दिनों तक सर्वे किया और दो हजार से अधिक पन्नों की रिपोर्ट अदालत में पेश की।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि मौजूदा संरचना से पहले परमारकालीन एक बड़ी इमारत मौजूद थी और वर्तमान परिसर के निर्माण में पुराने मंदिर से जुड़े स्थापत्य अवशेषों तथा स्तंभों का दोबारा इस्तेमाल हुआ हो सकता है।
मुस्लिम पक्ष ने ASI के निष्कर्षों और उनकी व्याख्या पर आपत्ति जताई थी तथा रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताया था।
वाग्देवी प्रतिमा वापस लाने के निर्देश पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस निर्देश पर भी सवाल उठाया, जिसमें सरकार और संबंधित अधिकारियों से लंदन में रखी देवी वाग्देवी की प्रतिमा वापस भारत लाने के प्रयास करने को कहा गया था।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सवाल किया कि कोई संवैधानिक अदालत किसी दूसरे देश के संग्रहालय से वस्तु वापस लाने का ऐसा निर्देश किस कानूनी आधार पर दे सकती है।
मुस्लिम पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि ब्रिटिश म्यूजियम में रखी प्रतिमा के भोजशाला परिसर से मिलने को लेकर ऐतिहासिक विवाद है। एक पक्ष इसे भोजशाला से संबंधित बताता है, जबकि दूसरे पक्ष का दावा है कि यह धार के पुराने राजमहल के खंडहरों से मिली थी।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला रोक दिया?
नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने अभी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूरे निर्णय पर रोक नहीं लगाई है।
शीर्ष अदालत ने फिलहाल:
- ASI को ढांचागत बदलाव से रोका है।
- संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।
- परिसर के पास नमाज के लिए अलग स्थान देने को कहा है।
- हाईकोर्ट के निर्णय से जुड़े कानूनी प्रश्नों पर जवाब मांगा है।
- सभी लंबित अपीलों को साथ सुनने पर सहमति जताई है।
इसलिए हाईकोर्ट का मूल फैसला अभी प्रभावी है, लेकिन उसका अंतिम भविष्य सुप्रीम कोर्ट में अपीलों के परिणाम पर निर्भर करेगा।
भोजशाला-कमाल मौला विवाद क्या है?
मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला परिसर एक ASI संरक्षित स्मारक है। हिंदू समुदाय इसे राजा भोज द्वारा स्थापित देवी वाग्देवी का मंदिर और प्राचीन संस्कृत शिक्षा केंद्र मानता है।
मुस्लिम समुदाय इस परिसर को कमाल मौला मस्जिद के रूप में मानता है और दावा करता है कि वहां लंबे समय से शुक्रवार की नमाज पढ़ी जाती रही है।
दोनों समुदायों के दावों को ध्यान में रखते हुए ASI ने वर्ष 2003 में साझा पूजा व्यवस्था बनाई थी। इसी व्यवस्था के तहत मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज आयोजित होती थी।
बसंत पंचमी पर पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने बनाई थी व्यवस्था
जनवरी 2026 में बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने के कारण दोनों समुदायों के धार्मिक कार्यक्रमों के समय को लेकर विवाद पैदा हुआ था।
उस समय सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग स्थान और समय निर्धारित करके पूजा तथा नमाज दोनों की अनुमति दी थी। अदालत ने प्रशासन को कानून-व्यवस्था, प्रवेश, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की संख्या नियंत्रित करने के निर्देश दिए थे।
वर्तमान सुनवाई में CJI ने इसी व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत लंबित विवाद में अस्थायी संतुलन बनाने के लिए व्यावहारिक समाधान दे सकती है।
अगली सुनवाई में क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष, मध्य प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और ASI से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई में अदालत इन विषयों पर विचार कर सकती है:
- हाईकोर्ट को परिसर का धार्मिक स्वरूप घोषित करने का अधिकार था या नहीं।
- Places of Worship Act, 1991 का मामले पर क्या प्रभाव पड़ता है।
- वर्ष 2003 की साझा पूजा व्यवस्था रद्द करना उचित था या नहीं।
- ASI सर्वे रिपोर्ट के निष्कर्ष कितने निर्णायक हैं।
- मुस्लिम पक्ष की शुक्रवार की नमाज का अधिकार बहाल होना चाहिए या नहीं।
- वाग्देवी प्रतिमा वापस लाने के निर्देश का कानूनी आधार क्या है।
- अंतिम सुनवाई तक परिसर की धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्था कैसी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने जरूरत पड़ने पर मामले की नियमित या प्रतिदिन सुनवाई करने की इच्छा भी जताई है।
फिलहाल भोजशाला में क्या स्थिति रहेगी?
मौजूदा अंतरिम स्थिति के अनुसार:
- भोजशाला परिसर में ASI कोई संरचनात्मक बदलाव नहीं करेगा।
- हाईकोर्ट के आदेश के तहत हिंदू पूजा की व्यवस्था जारी रहेगी।
- मुस्लिम समुदाय को फिलहाल परिसर के अंदर शुक्रवार की नमाज की अनुमति नहीं होगी।
- प्रशासन शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच परिसर के पास वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराएगा।
- सभी व्यवस्थाएं सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश के अधीन रहेंगी।
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