जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले की जांच में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। जम्मू की विशेष NIA अदालत ने पाकिस्तान में मौजूद लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में हाफिज सईद को पहलगाम हमले की पाकिस्तान से संचालित साजिश का प्रमुख आरोपी बताया है। NIA के अनुरोध पर अदालत द्वारा जारी वारंट के बाद एजेंसी अब उसे घोषित अपराधी घोषित कराने और उसके खिलाफ गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगी।
8 जुलाई को जारी हुआ गैर-जमानती वारंट
रिपोर्टों के अनुसार जम्मू की विशेष अदालत ने 8 जुलाई 2026 को हाफिज सईद के खिलाफ ओपन-डेटेड गैर-जमानती वारंट जारी किया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले की निष्पक्ष, संपूर्ण और प्रभावी जांच के लिए हाफिज सईद की गिरफ्तारी और हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। यह वारंट पाकिस्तान को औपचारिक कानूनी माध्यमों से भेजे जाने की संभावना है।
ओपन-डेटेड NBW की कोई निर्धारित समाप्ति तिथि नहीं होती। आरोपी की गिरफ्तारी होने या अदालत द्वारा वारंट वापस लिए जाने तक यह प्रभावी रह सकता है।
6 जुलाई को दाखिल हुई सप्लीमेंट्री चार्जशीट
NIA ने हाफिज सईद के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट 6 जुलाई 2026 को जम्मू की विशेष अदालत में दाखिल की थी। एजेंसी ने उसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उसके प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट यानी TRF का प्रमुख बताया है।
NIA के अनुसार चार्जशीट में निम्न बिंदुओं से जुड़े साक्ष्य शामिल किए गए हैं:
- पाकिस्तान में रची गई कथित साजिश
- हमले की योजना और निगरानी में हाफिज सईद की कथित भूमिका
- लश्कर और TRF के बीच संबंध
- घटनास्थल से मिले फोरेंसिक साक्ष्य
- आतंकियों के मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड
- पाकिस्तान स्थित संचालकों से कथित संपर्क
- स्थानीय मददगारों और विदेशी आतंकियों की भूमिका
एजेंसी ने हाफिज सईद पर भारतीय न्याय संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA की आतंकवाद एवं भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने से संबंधित धाराएं लगाई हैं।
क्या अब सीधे गैरमौजूदगी में मुकदमा शुरू हो जाएगा?
गैर-जमानती वारंट जारी होने से मुकदमा तुरंत शुरू नहीं होता। इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
पहले आरोपी को अदालत में उपस्थित कराने के लिए समन और वारंट जारी किए जाते हैं। यदि आरोपी जानबूझकर उपस्थित नहीं होता और गिरफ्तारी से बचता रहता है, तो उसे घोषित अपराधी घोषित किया जा सकता है।
इसके बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 356 के तहत अदालत आरोपी की गैरमौजूदगी में जांच, मुकदमा और फैसला आगे बढ़ा सकती है।
Trial in Absentia क्या है?
Trial in Absentia का अर्थ है आरोपी की शारीरिक मौजूदगी के बिना मुकदमा चलाना।
नए आपराधिक कानून के तहत गंभीर अपराधों में फरार घोषित आरोपी के खिलाफ यह प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, बशर्ते अदालत संतुष्ट हो कि आरोपी जानबूझकर कानूनी प्रक्रिया से बच रहा है और उसे उपस्थित कराने के सभी उचित प्रयास किए जा चुके हैं।
इस प्रक्रिया में आरोपी के लिए वकील की व्यवस्था, गवाहों के बयान, साक्ष्यों की जांच और न्यायिक सुनवाई सामान्य मुकदमे की तरह ही होती है।
NIA ने पाकिस्तान से प्रत्यर्पण पर क्या कहा?
NIA ने अदालत को बताया कि हाफिज सईद पाकिस्तान में मौजूद है और उसे भारत लाने के उपलब्ध कानूनी विकल्प लगभग समाप्त हो चुके हैं।
भारत पहले भी कई आतंकवादी मामलों में उसके प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है। लेकिन पाकिस्तान की ओर से सकारात्मक सहयोग नहीं मिलने के कारण उसे भारतीय अदालत के सामने पेश नहीं किया जा सका।
इसी आधार पर NIA ने अदालत से गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने की अनुमति देने की दिशा में प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है।
पहलगाम हमले में 26 लोगों की हुई थी मौत
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में पहलगाम के बैसरन मैदान में आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाया था।
हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी, जिनमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय नागरिक शामिल था। NIA की जांच के अनुसार यह हमला पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों द्वारा धर्म के आधार पर लोगों की पहचान कर किया गया लक्षित हमला था।
हमले में मारे गए अधिकांश लोग अपने परिवारों के साथ छुट्टियां मनाने पहलगाम आए थे। घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया और आतंकियों तथा उनके मददगारों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया गया।
पहली चार्जशीट में किन्हें बनाया गया था आरोपी?
NIA ने दिसंबर 2025 में दाखिल पहली चार्जशीट में पहलगाम हमला करने वाले तीन पाकिस्तानी आतंकियों को आरोपी बनाया था:
- फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान
- हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान भाई
- हमजा अफगानी
ये तीनों जुलाई 2025 में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF के संयुक्त ऑपरेशन महादेव में मारे गए थे।
चार्जशीट में पाकिस्तान में मौजूद लश्कर कमांडर साजिद सैफुल्ला जट्ट उर्फ लंगड़ा को भी आरोपी बनाया गया। जांच एजेंसी के अनुसार उसने आतंकियों को बैसरन क्षेत्र के निर्देशांक उपलब्ध कराए और हमले के संचालन में मदद की।
दो स्थानीय मददगार भी आरोपी
NIA ने पहलगाम के बशीर अहमद और उसके भतीजे परवेज अहमद को भी आरोपी बनाया है।
एजेंसी का आरोप है कि दोनों ने हमलावरों को रहने, भोजन और अन्य सहायता उपलब्ध कराई। उन्हें जून 2025 में गिरफ्तार किया गया था। इन आरोपों का अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।
मोबाइल फोन से पाकिस्तान कनेक्शन का दावा
NIA की पहली चार्जशीट में दावा किया गया था कि मारे गए आतंकियों से बरामद मोबाइल फोन में पाकिस्तान स्थित साजिद जट्ट से हुई बातचीत और बैसरन क्षेत्र के स्थान से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड मिले।
जांच में बरामद फोन पाकिस्तान में बेचे जाने की जानकारी भी सामने आई। एजेंसी का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों से यह स्थापित हुआ कि हमले की योजना, निर्देशन और नियंत्रण पाकिस्तान से किया गया था।
हाफिज सईद पर क्या आरोप हैं?
NIA ने हाफिज सईद पर आरोप लगाया है कि उसने:
- पहलगाम हमले की साजिश तैयार की
- लश्कर और TRF के नेटवर्क के जरिए हमला संचालित किया
- आतंकियों को निर्देश और संसाधन उपलब्ध कराए
- भारत में धार्मिक आधार पर लक्षित हत्याओं की योजना बनाई
- सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दिया
- भारत के खिलाफ युद्ध जैसी गतिविधियों में भूमिका निभाई
ये अभी जांच एजेंसी के आरोप हैं। न्यायिक रूप से दोष सिद्ध होने के लिए अदालत में साक्ष्यों का परीक्षण आवश्यक होगा।
हाफिज सईद कौन है?
हाफिज मोहम्मद सईद पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक और प्रमुख है। भारत उसे वर्ष 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों सहित कई बड़ी आतंकी घटनाओं का मुख्य साजिशकर्ता मानता है।
मुंबई हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी। हाफिज सईद संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी है और भारत की सर्वाधिक वांछित आतंकियों की सूची में शामिल है।
ऑपरेशन सिंदूर से पहलगाम हमले का संबंध
पहलगाम हमले के बाद भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित नौ आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया था।
भारत सरकार ने कहा था कि कार्रवाई में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाया गया। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कई दिनों तक सैन्य तनाव और सीमा पार हमले हुए।
हालांकि पाकिस्तान के “दर्जनभर एयरबेस पूरी तरह तबाह” होने जैसे दावों को आधिकारिक और स्वतंत्र पुष्टि के बिना तथ्य के रूप में नहीं लिखा जाना चाहिए।
घोषित अपराधी बनने के बाद क्या होगा?
हाफिज सईद को घोषित अपराधी बनाने के बाद अदालत:
- उसकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चला सकती है
- उसके खिलाफ गवाहों के बयान दर्ज कर सकती है
- दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण कर सकती है
- दोष सिद्ध होने पर सजा सुना सकती है
- उसकी भारतीय संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दे सकती है
- अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया मजबूत कर सकती है
यदि वह भविष्य में गिरफ्तार होता है या भारत लाया जाता है, तो उसे कानून के अनुसार उपलब्ध अपील और बचाव के अधिकार दिए जाएंगे।
भारत के लिए कानूनी कार्रवाई क्यों महत्वपूर्ण?
हाफिज सईद के पाकिस्तान में मौजूद होने के कारण उसके खिलाफ भारतीय अदालतों में कई मामलों की सुनवाई आगे नहीं बढ़ पाई थी।
नए कानून के तहत गैरमौजूदगी में मुकदमा चलने से जांच एजेंसियों को पाकिस्तान स्थित आतंकवादी सरगनाओं के खिलाफ साक्ष्य अदालत में रखने और न्यायिक फैसला हासिल करने का रास्ता मिलेगा।
ऐसा फैसला भविष्य में अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट, प्रत्यर्पण अनुरोध, संपत्ति जब्ती और आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़ी कार्रवाई को भी मजबूत कर सकता है।
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