कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर जिले की एक अदालत में जज की कुर्सी के पास कथित रूप से अनुष्ठान करने के आरोप में 65 वर्षीय महिला को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी महिला की पहचान मंजुला के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार मामला चिक्काबल्लापुर स्थित प्रथम अतिरिक्त वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं JMFC न्यायालय का है। आरोप है कि महिला अदालत कक्ष में पहुंची और जज की कुर्सी के आसपास कुछ क्रियाएं करते हुए सफेद सरसों के दाने छिड़के।
घटना अदालत परिसर में लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। फुटेज सामने आने के बाद न्यायालय की मुख्य प्रशासनिक अधिकारी नेत्रा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद चिक्काबल्लापुर सिटी पुलिस ने मंजुला को गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेश किए जाने के बाद उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
CCTV में क्या दिखाई दिया?
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार CCTV फुटेज में महिला जज की कुर्सी और न्यायिक मंच के पास खड़ी दिखाई देती है।
आरोप है कि वह कुछ शब्द या मंत्र बोल रही थी और कुर्सी के आसपास सफेद सरसों के दाने छिड़क रही थी। फुटेज की जांच के बाद अदालत प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और पुलिस को सूचना दी।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी अदालत कक्ष के अंदर कैसे पहुंची, उस समय सुरक्षा व्यवस्था क्या थी और क्या किसी व्यक्ति ने उसे अंदर प्रवेश करने में मदद की थी।
#WATCH | Karnataka | Chikkaballapur City Police arrest a 65-year-old woman, identified as Manjula, for allegedly performing black magic on the chair of the 1st Additional Senior Civil Judge and JMFC Court in Chikkaballapur.
CCTV footage captured the woman allegedly sprinkling… pic.twitter.com/7urZKOb7wa
— ANI (@ANI) July 14, 2026
लंबित जमीन विवाद को प्रभावित करने की कोशिश का संदेह
प्रारंभिक जांच में पुलिस को संदेह है कि महिला का कोई सिविल या जमीन संबंधी मामला उसी अदालत में लंबित हो सकता है।
आरोप है कि महिला ने न्यायिक फैसले को अपने पक्ष में प्रभावित करने की अंधविश्वासपूर्ण धारणा से यह कथित अनुष्ठान किया। हालांकि पुलिस ने अभी जांच पूरी नहीं की है और उसके वास्तविक उद्देश्य की आधिकारिक पुष्टि बाकी है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि महिला ने यह कदम स्वयं उठाया था या उसे किसी अन्य व्यक्ति ने ऐसा करने के लिए कहा था।
किस कानून के तहत दर्ज हुआ मामला?
महिला के खिलाफ कर्नाटक अमानवीय कुप्रथाओं और काला जादू की रोकथाम एवं उन्मूलन अधिनियम, 2017 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इस कानून का उद्देश्य तथाकथित अलौकिक या जादुई शक्तियों के नाम पर लोगों का शोषण करने वाली अमानवीय, हानिकारक और धोखाधड़ीपूर्ण प्रथाओं को रोकना है। कानून वर्ष 2017 में पारित हुआ था और संबंधित अधिसूचना के बाद 2020 में लागू हुआ।
पुलिस मामले में अन्य आपराधिक धाराओं और अदालत परिसर की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की भी जांच कर सकती है। अंतिम धाराएं FIR और जांच के दस्तावेजों से स्पष्ट होंगी।
14 दिन की न्यायिक हिरासत
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मंजुला को सक्षम अदालत के सामने पेश किया। अदालत ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
न्यायिक हिरासत का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी दोषी साबित हो गई है। पुलिस को अब कथित घटना से संबंधित CCTV फुटेज, अदालत के प्रवेश रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और आरोपी के संभावित उद्देश्य से जुड़े साक्ष्य जुटाने होंगे।
कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े करती है। आमतौर पर न्यायाधीश का न्यायिक मंच और कुर्सी संवेदनशील क्षेत्र होते हैं, जहां अनधिकृत व्यक्ति का पहुंचना प्रतिबंधित होता है।
जांच में इन प्रश्नों के जवाब तलाशे जा सकते हैं:
- महिला अदालत कक्ष में किस रास्ते से दाखिल हुई?
- क्या घटना अदालत की कार्यवाही शुरू होने से पहले या बाद में हुई?
- क्या उस समय कोई सुरक्षाकर्मी मौजूद था?
- अदालत कक्ष खुला क्यों छोड़ा गया था?
- क्या किसी अन्य व्यक्ति ने महिला की मदद की?
- घटना के समय का पूरा CCTV रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं?
पुलिस ने संकेत दिया है कि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका की संभावना की भी जांच की जा रही है।
क्या सफेद सरसों के दाने छिड़कना अपने आप अपराध है?
सिर्फ सरसों के दाने छिड़कना अपने आप हर परिस्थिति में काला जादू कानून के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। अपराध तय करने के लिए घटना का उद्देश्य, उससे पैदा किया गया भय, किसी व्यक्ति को प्रभावित या नुकसान पहुंचाने की मंशा और कानून की अनुसूची में दर्ज निषिद्ध गतिविधियों का परीक्षण आवश्यक होता है।
अप्रैल 2026 में महाराष्ट्र से जुड़े एक अलग मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था कि केवल सफेद सरसों के दाने छिड़कने का आरोप, बिना डर पैदा करने, शोषण या दुर्भावनापूर्ण काला जादू गतिविधि के पर्याप्त साक्ष्य के, संबंधित कानून के तहत अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। वह फैसला महाराष्ट्र के अलग कानून और अलग तथ्यों पर आधारित था, इसलिए उसका कर्नाटक के इस मामले पर स्वतः लागू होना आवश्यक नहीं है।
चिक्काबल्लापुर मामले में पुलिस को यह साबित करना होगा कि आरोपी की कथित कार्रवाई कर्नाटक अधिनियम में परिभाषित प्रतिबंधित गतिविधियों के दायरे में आती है।
काला जादू क्या माना जाता है?
सामान्य बोलचाल में काला जादू, टोना-टोटका या तंत्र-मंत्र जैसे शब्द उन गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं जिनमें अलौकिक शक्तियों के जरिए किसी व्यक्ति, घटना या फैसले को प्रभावित करने का दावा किया जाता है।
ऐसे दावों में प्रायः मंत्र, तावीज, वशीकरण, अनुष्ठान, आत्माओं या अदृश्य शक्तियों का इस्तेमाल करने जैसी बातें कही जाती हैं। लेकिन आधुनिक विज्ञान में किसी मंत्र, पदार्थ या कथित अलौकिक क्रिया से न्यायिक फैसले, बीमारी, भाग्य या किसी व्यक्ति के व्यवहार को नियंत्रित करने का विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
कर्नाटक का कानून प्रत्येक धार्मिक परंपरा या व्यक्तिगत आस्था को अपराध नहीं बनाता। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसी गतिविधियों को रोकना है जिनसे लोगों को नुकसान पहुंचाया जाए, भय पैदा किया जाए, उनका आर्थिक या शारीरिक शोषण हो अथवा अमानवीय प्रथाएं अपनाई जाएं।
अंधविश्वास का मनोवैज्ञानिक प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार कथित काला जादू का डर व्यक्ति पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव डाल सकता है। किसी व्यक्ति को यह विश्वास हो जाए कि उसके साथ कोई नकारात्मक अनुष्ठान किया गया है, तो वह तनाव, भय, नींद की समस्या या अन्य मनोदैहिक लक्षण महसूस कर सकता है।
इसी कारण ऐसे मामलों में वैज्ञानिक सोच, कानूनी कार्रवाई और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता महत्वपूर्ण मानी जाती है।
भारत में काला जादू के खिलाफ कानून
भारत में काला जादू या अंधविश्वास से जुड़ी सभी गतिविधियों के लिए एक समान केंद्रीय कानून नहीं है। कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर विशेष कानून बनाए हैं।
कर्नाटक में 2017 का कानून अमानवीय और शोषणकारी कुप्रथाओं को प्रतिबंधित करता है। महाराष्ट्र में भी मानव बलि तथा अन्य अमानवीय और अघोरी प्रथाओं के खिलाफ अलग कानून लागू है। अन्य राज्यों में ऐसे मामलों में सामान्य आपराधिक कानून, धोखाधड़ी, हमला, धमकी, हत्या या शोषण से जुड़ी धाराओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।
आगे क्या करेगी पुलिस?
चिक्काबल्लापुर पुलिस की जांच में मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं पर ध्यान दिया जा सकता है:
- CCTV फुटेज की फोरेंसिक जांच
- सफेद दानों या अन्य वस्तुओं की पहचान
- अदालत कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के बयान
- आरोपी का लंबित मुकदमे से संबंध
- महिला के मोबाइल कॉल और संपर्कों की जांच
- किसी दूसरे व्यक्ति के निर्देश या साजिश की संभावना
- अदालत परिसर की सुरक्षा में हुई लापरवाही
- कथित गतिविधि से भय या न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित करने की मंशा
पुलिस जांच और अदालत में पेश साक्ष्यों के बाद ही यह तय होगा कि महिला के खिलाफ लगाए गए आरोप कानून के तहत साबित होते हैं या नहीं।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel