लखनऊ से आतंकवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाई से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश की विशेष NIA अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS (इस्लामिक स्टेट) की गतिविधियों में सहयोग करने के दोषी राकिब इमाम अंसारी को 5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 6 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
विशेष न्यायाधीश उमाकांत जिंदल ने यह फैसला उस समय सुनाया जब मुकदमे की सुनवाई के दौरान राकिब इमाम अंसारी ने अदालत में स्वयं अपना अपराध स्वीकार कर लिया। दोषी के जुर्म कबूल करने के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर सजा सुनाई।
कोर्ट में कबूला अपना गुनाह
मामले की सुनवाई के दौरान राकिब इमाम अंसारी ने अदालत में एक प्रार्थना पत्र देकर अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद विशेष NIA अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए 5 वर्ष के कठोर कारावास और 6 हजार रुपये के आर्थिक दंड की सजा सुनाई।
यह मामला प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS के लिए नए लोगों की भर्ती, कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार-प्रसार, देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कथित साजिश से जुड़ा है।
मुंबई से शुरू हुई थी जांच
इस पूरे मामले की शुरुआत मुंबई के काला चौकी थाना में दर्ज एक मामले से हुई थी। जांच के दौरान एजेंसियों को शाहनवाज और रिजवान अली नामक दो फरार आरोपियों की जानकारी मिली, जिन्हें ISIS का सक्रिय सदस्य बताया गया।
जांच आगे बढ़ने पर उत्तर प्रदेश ATS भी इस मामले में शामिल हुई। ATS के अधिकारी दारोगा मोहम्मद अकरम ने 3 नवंबर 2023 को लखनऊ के गोमतीनगर स्थित ATS थाने में इस संबंध में FIR दर्ज कराई। इसी जांच के दौरान राकिब इमाम अंसारी का नाम सामने आया।
जांच में सामने आया AMU से जुड़ा एंगल
ATS की जांच में यह भी सामने आया कि शाहनवाज और रिजवान अली के संपर्क अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से जुड़े एक छात्र संगठन ‘स्टूडेंट ऑफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ के कुछ सदस्यों से थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, रिजवान अशरफ विश्वविद्यालय का छात्र नहीं था, लेकिन वह कथित रूप से ISIS से जुड़े होने के कारण इस संगठन में घुसपैठ कर युवाओं के बीच कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने का प्रयास कर रहा था।
हालांकि, जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल विशिष्ट आरोपियों और उनके कथित नेटवर्क तक सीमित है। पूरे छात्र समुदाय या विश्वविद्यालय को इससे जोड़ना उचित नहीं है।
राकिब इमाम अंसारी की भूमिका क्या थी?
ATS की जांच में पाया गया कि राकिब इमाम अंसारी लगातार मुख्य आरोपियों के संपर्क में था। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 17 गवाह पेश किए, जिनके आधार पर यह आरोप रखा गया कि आरोपी मिलकर भारत में शरिया कानून स्थापित करने की कथित साजिश रच रहे थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए युवाओं को जिहादी गतिविधियों के लिए प्रेरित करने और हथियार जुटाने के प्रयास किए जा रहे थे। अभियोजन पक्ष ने राकिब की भूमिका को इस पूरे नेटवर्क में सक्रिय बताया।
अभियोजन पक्ष ने पेश किए मजबूत सबूत
विशेष NIA अदालत में अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और 17 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोषी को सजा सुनाई।
फिलहाल उत्तर प्रदेश ATS इस नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं और संदिग्ध संपर्कों की जांच जारी रखे हुए है।
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