अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी दोबारा लागू करते हुए ग्रेटर तुनब द्वीप, बंदर अब्बास और मिसाइल-ड्रोन ठिकानों पर हमले किए। ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई का दावा किया है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष एक बार फिर बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने बुधवार, 15 जुलाई 2026 को ईरान के बंदरगाहों पर नौसैनिक घेराबंदी दोबारा लागू करते हुए ग्रेटर तुनब द्वीप, बंदर अब्बास और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित कई सैन्य ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की तटीय रक्षा प्रणाली, क्रूज मिसाइल क्षमता और समुद्री व्यापार को निशाना बनाने वाले सैन्य ढांचे को कमजोर करना था। वहीं ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए बहरीन, कुवैत और जॉर्डन सहित कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है।
ग्रेटर तुनब द्वीप पर 90 मिनट तक चला अमेरिकी हमला
अमेरिकी सेना के मुताबिक, ग्रेटर तुनब द्वीप पर तटीय सुरक्षा प्रणाली, एयर डिफेंस सिस्टम, क्रूज मिसाइल भंडारण केन्द्रों और मिसाइल संचालन स्थलों को निशाना बनाया गया। यह द्वीप हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है।
अमेरिकी सैन्य अभियान का पहला चरण लगभग 90 मिनट तक चला। इसके बाद ईरान के अन्य हिस्सों में भी मिसाइल और ड्रोन से संबंधित ठिकानों पर हवाई हमले किए गए। ईरानी अधिकारियों और मीडिया ने बंदर अब्बास, चाबहार, अहवाज, सीरिक, कोनारक, रस्क और केशम द्वीप सहित कई क्षेत्रों में हमले होने का दावा किया है।
बंदर अब्बास के सैन्य और नौसैनिक ठिकाने निशाने पर
बंदर अब्बास ईरान का सबसे बड़ा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह है। यहां ईरानी नौसेना के कई प्रमुख अड्डे और समुद्री सैन्य प्रतिष्ठान मौजूद हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने और मिसाइल तथा ड्रोन अभियानों के लिए किया जा रहा था।
अमेरिका ने दावा किया कि उसके नौसैनिक बलों ने ईरान से जुड़े दो जहाजों को रास्ता बदलने के लिए मजबूर किया। इसके अलावा प्रतिबंधित मार्ग से खार्ग द्वीप की ओर बढ़ रहे एक तेल टैंकर को हेलफायर मिसाइल से निष्क्रिय कर दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार टैंकर ने अमेरिकी नौसेना की चेतावनियों का पालन नहीं किया था।
ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि कुवैत स्थित अली अल सलेम एयर बेस को निशाना बनाया गया, क्योंकि वहां अमेरिकी रडार, मिसाइल और ड्रोन सिस्टम तैनात थे। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को भी निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आईं।
हालांकि संबंधित देशों ने कई मिसाइलों और ड्रोन को अपने एयर डिफेंस सिस्टम से नष्ट करने की बात कही है। नुकसान और हताहतों के संबंध में दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र रूप से पूरी पुष्टि नहीं हो सकी है।
बमपुर बैरक पर हमले में सात जवानों की मौत का दावा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने दावा किया कि दक्षिण-पूर्व ईरान के बमपुर क्षेत्र में स्थित एक सैन्य बैरक पर हुए हमले में 388वीं ब्रिगेड के सात जवान मारे गए और कई अन्य घायल हुए।
ईरानी सैन्य अधिकारियों ने हमले का बदला लेने की चेतावनी दी है। हालांकि इस विशेष घटना और हताहतों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल उपलब्ध नहीं है।
गेहूं भंडारण केन्द्र पर हमले का ईरानी दावा
ईरानी मीडिया ने दावा किया कि खुजेस्तान प्रांत में स्थित एक गेहूं भंडारण केन्द्र को भी अमेरिकी कार्रवाई में निशाना बनाया गया। अमेरिका ने इस आरोप से इनकार किया है और कहा है कि उसके हमले केवल सैन्य प्रतिष्ठानों, मिसाइल भंडारण केन्द्रों और तटीय रक्षा प्रणालियों तक सीमित थे।
नागरिक और खाद्य भंडारण ढांचे को नुकसान पहुंचने के ईरानी दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ट्रंप बोले—समझौता चाहता है ईरान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान समझौता करना चाहता है और यदि संघर्ष जारी रहा तो वह जल्द युद्ध हार सकता है। ट्रंप ने ईरान द्वारा एक अमेरिकी नागरिक को देश छोड़ने की अनुमति दिए जाने का भी स्वागत किया और इसे सद्भावना का संकेत बताया।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी-ईरानी दोहरी नागरिकता रखने वाली एक महिला को देश से बाहर जाने की अनुमति दी है, जिस पर पहले जासूसी से जुड़े आरोप लगाए गए थे। ट्रंप ने कहा कि वह अब ईरान से बाहर और सुरक्षित है।
ईरान ने संघर्ष को बताया ‘अस्तित्व की लड़ाई’
ईरान ने कहा है कि अमेरिकी हमलों के बाद शांति समझौते और बातचीत की संभावनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने इस संघर्ष को अमेरिका के खिलाफ ईरान की “जरूरी और अस्तित्व की लड़ाई” करार दिया।
ईरान का कहना है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद पुराने समझौते की शर्तों का पालन करने का कोई कारण नहीं रह गया है। तेहरान ने संकेत दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में बातचीत दोबारा शुरू करना बेहद मुश्किल होगा।
ईरान के सैन्य नेतृत्व ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में और अधिक हमले करने की चेतावनी भी दी है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है महत्वपूर्ण?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निर्यात होने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
इस मार्ग में लंबे समय तक रुकावट आने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। तनाव बढ़ने और समुद्री परिवहन बाधित होने की आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ा है।
क्या और व्यापक हो सकता है अमेरिका-ईरान युद्ध?
अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री आवागमन बहाल करना और ईरान की जहाजों पर हमला करने की क्षमता को कम करना है। दूसरी ओर ईरान इसे राष्ट्रीय संप्रभुता और अस्तित्व से जुड़ी लड़ाई बता रहा है।
बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरानी हमलों के दावों ने क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ा दिया है। यदि दोनों देशों के बीच जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता है तो संघर्ष का असर खाड़ी देशों, वैश्विक समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर और गंभीर हो सकता है।
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