तमिलनाडु के प्रसिद्ध पलनी अरुल्मिगु दंडायुधपानी स्वामी मंदिर से जुड़े मठ की करीब 1.4 एकड़ जमीन कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निजी व्यक्तियों के नाम रजिस्टर किए जाने का मामला सामने आया है। पहाड़ी की तलहटी पर स्थित इस जमीन की अनुमानित कीमत करीब ₹100 करोड़ बताई जा रही है। मामला उजागर होने के बाद तमिलनाडु सरकार ने जिला रजिस्ट्रार ससिकला और पलनी के सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिकंदन को निलंबित कर दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक महेश कुमार अग्रवाल ने जांच को क्राइम ब्रांच-CID यानी CB-CID को सौंपने का आदेश दिया है। वहीं, मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने विवादित रजिस्ट्रेशन को अमान्य घोषित करते हुए जमीन के हस्तांतरण को रद्द कर दिया है।
क्या है पलनी मंदिर जमीन विवाद?
विवादित जमीन पलनी में अरुल्मिगु दंडायुधपानी स्वामी मंदिर से जुड़े मठ की बताई जा रही है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, लगभग एक शताब्दी पहले यह भूमि दंडायुधपानी स्वामी मठ के लिए समर्पित की गई थी। मंदिर प्रशासन इस जमीन का इस्तेमाल श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क पार्किंग सहित अन्य सुविधाओं के लिए करता रहा है।
आरोप है कि मुरुगदास नामक व्यक्ति ने जमीन पर पैतृक स्वामित्व का दावा करते हुए इसे वेल्लईदुरई और सेतुपति नाम के दो निजी व्यक्तियों को बेच दिया। इसके बाद कथित रूप से अयोग्य और कानूनी रूप से अमान्य दस्तावेजों के आधार पर जमीन का रजिस्ट्रेशन किया गया। HR&CE विभाग ने सब-रजिस्ट्रार, दस्तावेज लेखक और जमीन खरीदने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी।
मंदिर प्रशासन ने पहले ही जताई थी आपत्ति
मंदिर प्रशासन का दावा है कि उसे पहले ही जानकारी मिल गई थी कि एक व्यक्ति जमीन को अपने पूर्वजों की संपत्ति बताकर बेचने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद रजिस्ट्रेशन विभाग और जिला रजिस्ट्रार कार्यालय को कई पत्र भेजकर स्पष्ट किया गया था कि संबंधित जमीन मंदिर से जुड़े मठ की है और उसका रजिस्ट्रेशन निजी व्यक्तियों के नाम नहीं किया जाना चाहिए।
बताया जा रहा है कि मार्च 2026 में भी इस जमीन के रजिस्ट्रेशन की कोशिश की गई थी, लेकिन उस समय संबंधित अधिकारी ने मंदिर की संपत्ति बताते हुए आवेदन खारिज कर दिया था।
कोर्ट के आदेश का कथित रूप से किया गया गलत इस्तेमाल
रजिस्ट्रेशन से इनकार किए जाने के बाद संबंधित लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने दस्तावेज वैध पाए जाने की स्थिति में कानून के अनुसार आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया था।
मंदिर प्रशासन का आरोप है कि अदालत के सामने जमीन के पुराने सेटलमेंट दस्तावेज और मंदिर-मठ के स्वामित्व से जुड़ी पूरी जानकारी पेश नहीं की गई। बाद में इसी आदेश का हवाला देकर रजिस्ट्रेशन करवाया गया।
निलंबित सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिकंदन ने विभागीय अधिकारियों को बताया है कि उन्होंने अदालत के आदेश के आधार पर कार्रवाई की थी। हालांकि, सरकार का कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नियमों की अनदेखी जानबूझकर की गई या अधिकारियों से गंभीर प्रशासनिक लापरवाही हुई।
अधिकारी के तबादले के बाद हुई रजिस्ट्री
मामले में अधिकारियों की तैनाती और तबादले के समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जिस अधिकारी ने पहले रजिस्ट्रेशन से मना किया था, उसका जुलाई की शुरुआत में तबादला हो गया। इसके बाद नए अधिकारी के कार्यभार संभालने और छुट्टी पर जाने के दौरान जस्टिन मणिकंदन को ड्यूटी दी गई।
आरोप है कि इसी अवधि में जमीन का रजिस्ट्रेशन दो निजी व्यक्तियों के नाम कर दिया गया। जिला रजिस्ट्रार ससिकला पर जस्टिन मणिकंदन को उस समय ड्यूटी सौंपने से जुड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी का आरोप है। इसी आधार पर उन्हें भी निलंबित किया गया है।
मद्रास हाई कोर्ट ने रजिस्ट्रेशन किया रद्द
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने मामले का संज्ञान लेते हुए 1.4 एकड़ जमीन के विवादित रजिस्ट्रेशन को शून्य और अमान्य घोषित कर दिया। अदालत के आदेश के बाद जमीन के निजी व्यक्तियों के नाम किए गए हस्तांतरण को कानूनी मान्यता नहीं रहेगी।
CB-CID जांच में सामने आएगी पूरी साजिश
तमिलनाडु सरकार ने मामले की जांच CB-CID को सौंप दी है। जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि फर्जी रजिस्ट्रेशन के पीछे किन लोगों की भूमिका थी, दस्तावेज किसने तैयार किए, मंदिर प्रशासन की आपत्तियों को क्यों नजरअंदाज किया गया और क्या रजिस्ट्रेशन विभाग के अन्य अधिकारी भी कथित साजिश में शामिल थे।
राज्य के वाणिज्यिक कर एवं पंजीकरण मंत्री डी. लोगेश तमिलसेलवन ने विभागीय जांच के लिए एक समिति गठित किए जाने की भी जानकारी दी है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण में शामिल किसी भी अधिकारी या निजी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
पलनी दंडायुधपानी मंदिर का धार्मिक महत्व
पलनी का अरुल्मिगु दंडायुधपानी स्वामी मंदिर भगवान मुरुगन के छह प्रमुख पवित्र निवासों में से एक है। यह मंदिर तमिलनाडु के दिंडीगुल जिले में पलनी पहाड़ियों की तलहटी और पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है। हर वर्ष देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel