पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और नेताओं की बगावत अब खुलकर सामने आने लगी है। इसी क्रम में राज्यसभा सांसद और टॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्री कोयल मल्लिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
कोयल मल्लिक को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अप्रैल 2026 में राज्यसभा भेजा था। लेकिन महज तीन महीने के भीतर उनका इस्तीफा TMC के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
राज्यसभा अध्यक्ष को भेजा इस्तीफा
गुरुवार (16 जुलाई 2026) को कोयल मल्लिक ने राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने आधिकारिक पत्र के जरिए अपने पद से त्यागपत्र दिया, हालांकि पत्र में इस्तीफे का कोई कारण नहीं बताया गया।
कोयल इससे पहले सार्वजनिक रूप से अपने इस्तीफे की घोषणा कर चुकी थीं, लेकिन अब उनके आधिकारिक इस्तीफे ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है।
पहले भी तीन सांसद छोड़ चुके हैं TMC
कोयल मल्लिक TMC छोड़ने वाली पहली सांसद नहीं हैं। उनसे पहले पार्टी के तीन अन्य राज्यसभा सांसद—सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक—भी पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं।
इन नेताओं ने न केवल राज्यसभा की सदस्यता छोड़ी बल्कि पार्टी के सभी पदों से भी इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद उन्होंने भाजपा के समर्थन से दोबारा राज्यसभा के लिए नामांकन भी दाखिल किया।
क्या BJP में शामिल होंगी कोयल मल्लिक?
कोयल मल्लिक के इस्तीफे के बाद उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। राजनीतिक चर्चाओं को तब और बल मिला जब इस्तीफे के बाद उन्हें दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर देखा गया।
हालांकि, कोयल मल्लिक या भाजपा की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
राज्यसभा में TMC की संख्या घटी
कोयल मल्लिक के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में TMC सांसदों की संख्या घटकर 13 से 9 रह गई है। लगातार हो रहे इस्तीफों को पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
मदन मित्रा भी हुए बागी
TMC की अंदरूनी कलह यहीं नहीं रुकी। बुधवार (15 जुलाई) को पार्टी के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने भी ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हो गए।
मदन मित्रा ने अपनी नाराजगी की वजह अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को बताया। उनके इस कदम ने यह संकेत दिया कि पार्टी के भीतर असंतोष अब कई स्तरों पर फैल चुका है।
TMC में कई गुट सक्रिय
पार्टी के भीतर अब अलग-अलग गुट सामने आते दिखाई दे रहे हैं। इससे पहले काकोली घोष के नेतृत्व में करीब 20 बागी नेताओं ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया था।
अब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में खुद को “असली TMC” बताने वाला एक नया गुट भी सक्रिय हो गया है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel