जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के भद्रवाह इलाके में आधी रात को पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी SOG की कार्रवाई के दौरान गोली लगने से एक ऑटो चालक की मौत हो गई। मृतक की पहचान 30 वर्षीय आरिफ हुसैन के रूप में हुई है, जो चीका गांव का रहने वाला था। इस घटना में SOG के तीन से चार जवानों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।
यह घटना भद्रवाह शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर जाई वैली क्षेत्र में जाई-गांडोह सड़क पर हुई। पुलिस के अनुसार, इलाके में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद SOG की टीम ने नाकाबंदी कर रखी थी। रात के समय पुलिस ने वहां से गुजर रहे दो संदिग्ध व्यक्तियों को रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
पुलिसकर्मी की राइफल छीनने की कोशिश का आरोप
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, रोके जाने के बाद दोनों संदिग्धों ने कथित तौर पर जवानों के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू कर दी। आरोप है कि इस दौरान एक व्यक्ति ने पुलिसकर्मी की सर्विस राइफल छीनने की कोशिश की।
इसी छीना-झपटी के दौरान एक जवान की बंदूक से गोली चल गई, जो आरिफ हुसैन को लगी। गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। हाथापाई में SOG के कई जवानों को भी चोटें आईं। इनमें से एक जवान के सिर पर गंभीर चोट लगने की बात कही गई है।
इलाज के दौरान आरिफ हुसैन की मौत
गोली लगने के बाद आरिफ हुसैन और घायल पुलिसकर्मियों को उप-जिला अस्पताल भद्रवाह ले जाया गया। आरिफ की हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज डोडा रेफर किया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि शुरुआती जांच में फिलहाल किसी आतंकी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने दावा किया है कि मृतक कथित रूप से मवेशियों की अवैध तस्करी से जुड़ा हुआ था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
घटना के समय आरिफ के साथ मौजूद दूसरा संदिग्ध अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। उसकी तलाश के लिए पुलिस की टीमें विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर रही हैं। मामले में एक धार्मिक प्रचारक को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिए जाने की जानकारी है।
घटना की परिस्थितियों की होगी जांच
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गोली किन परिस्थितियों में चली और नाकाबंदी के दौरान घटनाक्रम किस प्रकार आगे बढ़ा। अधिकारियों द्वारा घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और घायल जवानों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।
आरिफ हुसैन की मौत के बाद स्थानीय स्तर पर घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुलिस और संदिग्धों के बीच हुई हाथापाई के दौरान फायरिंग आकस्मिक थी या इसके पीछे कोई अन्य परिस्थिति जिम्मेदार थी।
10 हजार फीट की ऊंचाई पर CRPF की कार्रवाई, पुराने आतंकी ठिकाने ध्वस्त
इस बीच जम्मू-कश्मीर के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी CRPF ने करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित आतंकियों के पुराने ठिकानों और छिपने के स्थानों को ध्वस्त किया है।
सुरक्षा बलों ने संवेदनशील और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाते हुए कई अस्थायी ऑपरेशन बेस स्थापित किए हैं। बताया गया है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद सुरक्षा रणनीति में बदलाव करते हुए विभिन्न इलाकों में लगभग 55 टेम्परेरी ऑपरेशन बेस बनाए गए।
ऊंचाई वाले इलाकों में बढ़ाई गई नियमित गश्त
पहले दुर्गम पर्वतीय इलाकों और अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में नियमित गश्त चुनौतीपूर्ण मानी जाती थी। इसका फायदा उठाकर आतंकवादी कथित रूप से जंगलों, प्राकृतिक गुफाओं और सुनसान पहाड़ी ठिकानों का इस्तेमाल करते थे।
सुरक्षा बलों ने जुलाई 2025 के बाद इन इलाकों में अभियान और निगरानी बढ़ाई। अब जवानों की टुकड़ियां नियमित अंतराल पर गश्त कर रही हैं, ताकि आतंकवादी दोबारा इन क्षेत्रों में सुरक्षित ठिकाने न बना सकें।
इन ऑपरेशन बेस के माध्यम से सुरक्षाबलों को दूरदराज के इलाकों में तेजी से अभियान चलाने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और घुसपैठ की कोशिशों को रोकने में सहायता मिल रही है।
आतंकवाद विरोधी रणनीति में बड़ा बदलाव
सुरक्षा एजेंसियों का जोर अब केवल आतंकी घटनाओं के बाद कार्रवाई करने के बजाय उन इलाकों में स्थायी मौजूदगी बढ़ाने पर है, जिनका इस्तेमाल पहले आतंकवादी छिपने और आवाजाही के लिए करते थे।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑपरेशन बेस और नियमित गश्त से आतंकियों के पुराने नेटवर्क और सुरक्षित ठिकानों पर दबाव बढ़ा है। सुरक्षाबल स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर संवेदनशील क्षेत्रों में तलाशी अभियान भी चला रहे हैं।
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