अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी चुनावी सुरक्षा को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि रूस, चीन, ईरान, उत्तर कोरिया और कुछ गैर-सरकारी समूह (Non-State Actors) अमेरिका के चुनावी ढांचे को साइबर हमलों के जरिए प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। ट्रंप ने यह दावा उनकी सरकार द्वारा जारी किए गए नए डीक्लासिफाइड (Declassified) खुफिया दस्तावेजों के आधार पर किया है।
‘Election Integrity‘ पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार की ओर से जारी किए गए दस्तावेजों का तीसरा सेट यह दर्शाता है कि अमेरिकी प्रशासन को कई वर्षों से चुनावी ढांचे में मौजूद कमजोरियों की जानकारी थी, लेकिन यह जानकारी जनता से छिपाई गई।
‘चीन की दखलंदाजी को छिपाना सिर्फ शुरुआत थी’
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि चुनावी प्रणाली में मौजूद कमजोरियां केवल एक तकनीकी समस्या नहीं हैं, बल्कि यह अमेरिकी लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा हैं।
उन्होंने कहा कि,
“चीन की दखलंदाजी को छिपाना तो सिर्फ शुरुआत थी। आज जारी किए जा रहे तीसरे दस्तावेजी सेट से साबित होता है कि कई वर्षों तक अमेरिकी जनता से चुनावी ढांचे की वास्तविक स्थिति छिपाई गई। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें और काउंटिंग सिस्टम कमजोर हैं और इनमें आसानी से सेंध लगाई जा सकती है।”
ट्रंप ने यह भी घोषणा की कि उन्होंने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में कथित चीनी दखलंदाजी को छिपाने वाले अमेरिकी अधिकारियों की जांच के आदेश दिए हैं।
रूस, चीन, ईरान और नॉर्थ कोरिया पर गंभीर आरोप
ट्रंप ने यूएस इंटेलिजेंस कम्युनिटी (US Intelligence Community) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी देशों के पास अमेरिकी चुनावी ढांचे को प्रभावित करने की तकनीकी क्षमता मौजूद है।
रिपोर्ट के अनुसार,
“हमारा आकलन है कि रूस, चीन, ईरान, उत्तर कोरिया और कुछ गैर-सरकारी समूह अमेरिकी चुनावी ढांचे से छेड़छाड़ करने की क्षमता रखते हैं।”
हालांकि, ट्रंप ने अपने संबोधन में इन देशों द्वारा किसी विशेष चुनाव में सफल हस्तक्षेप का प्रत्यक्ष प्रमाण सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया।
मतदाता डेटाबेस और चुनावी वेबसाइटें सबसे ज्यादा खतरे में
ट्रंप ने दावा किया कि खुफिया रिपोर्ट में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण डिजिटल सिस्टम को सबसे अधिक जोखिम वाला बताया गया है।
इनमें शामिल हैं—
- मतदाता पंजीकरण (Voter Registration) डेटाबेस
- इलेक्ट्रॉनिक पोलबुक (Electronic Pollbooks)
- आधिकारिक चुनावी वेबसाइटें
- वोटों की गिनती करने वाली इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियां
ट्रंप के अनुसार यदि कोई विरोधी देश या साइबर समूह इन सिस्टम तक पहुंच बना ले, तो वह चुनावी प्रक्रिया को बाधित कर सकता है।
उन्होंने इसे “अमेरिकी लोकतंत्र के केंद्र पर साइबर हमला” बताया।
जनवरी 2020 से जून 2026 तक की रिपोर्ट सार्वजनिक
व्हाइट हाउस के मुताबिक सार्वजनिक किए गए दस्तावेज जनवरी 2020 से जून 2026 के बीच तैयार किए गए खुफिया आकलनों और संबंधित रिपोर्टों पर आधारित हैं।
प्रशासन का कहना है कि इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का उद्देश्य चुनावी सुरक्षा से जुड़ी संभावित कमजोरियों को सामने लाना और भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है।
वेनेजुएला पर भी लगाए गंभीर आरोप
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि जारी किए गए दस्तावेजों में CIA की एक रिपोर्ट शामिल है, जिसमें वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार पर वर्ष 2020 के अमेरिकी चुनावों में डिजिटल हस्तक्षेप की कथित योजना बनाने का आरोप लगाया गया है।
ट्रंप के अनुसार रिपोर्ट में ऐसे डिजिटल तरीकों का उल्लेख है जिनकी मदद से वोटों की संख्या इस प्रकार बदली जा सकती थी कि सामान्य ऑडिट प्रक्रिया में भी इसका आसानी से पता न चले।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित देशों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
‘अमेरिका को तुरंत सुरक्षा मजबूत करनी होगी’
अपने संबोधन के अंत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को अपनी चुनावी प्रणाली को भविष्य के साइबर हमलों से सुरक्षित बनाने के लिए तत्काल व्यापक कदम उठाने होंगे।
व्हाइट हाउस ने भी कहा कि चुनावी मशीनों, मतगणना प्रणाली और केंद्रीय चुनावी डेटाबेस की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चिंताएं मौजूद थीं और इन्हीं पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं।
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