अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के दौरान ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाता एक विवादित विशाल बिलबोर्ड लगाया गया है। शहर के इस्लामिक रिवोल्यूशन यानी एंगलेब स्क्वायर पर लगे बिलबोर्ड में ट्रंप को खुले काले ताबूत में लेटा हुआ दिखाया गया है और उसके ऊपर अंग्रेजी में ‘We Kill Trump’ लिखा है।
एसोसिएटेड प्रेस की तस्वीरों में यह बिलबोर्ड बुधवार, 15 जुलाई 2026 को एंगलेब स्क्वायर पर दिखाई दिया। तस्वीर में ट्रंप की आंखें और मुंह बंद हैं, उनके हाथ लाल टाई के ऊपर रखे गए हैं और उन्हें शव की तरह ताबूतनुमा संरचना में दिखाया गया है। यह संदेश ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच हवाई हमले, मिसाइल हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी को लेकर संघर्ष तेज हो चुका है।
खामेनेई की मौत के बाद ईरान में बदले की मांग
यह बिलबोर्ड ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के कुछ दिनों बाद लगाया गया। खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किए गए हमलों के दौरान मौत हुई थी। जुलाई में आयोजित उनकी अंतिम यात्रा के दौरान भी कई प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप और इजरायली नेतृत्व से बदला लेने वाले पोस्टर और बैनर प्रदर्शित किए थे।
बिलबोर्ड के पास खामेनेई की बंद मुट्ठी को दर्शाती एक प्रतिमा भी स्थापित किए जाने की खबर है। मुट्ठी को ईरानी सत्ता की ओर से अमेरिका और इजरायल के खिलाफ प्रतिरोध तथा बदले के प्रतीक के रूप में पेश किया जा रहा है।
खामेनेई के बेटे और ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने भी सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित बयान में अपने पिता और युद्ध में मारे गए अन्य लोगों की मौत का बदला लेने की बात कही है। उन्होंने कहा कि बदला लेना ईरानी राष्ट्र की इच्छा है और इसे पूरा किया जाएगा।
WATCH: A new banner displayed in central Tehran's Enghelab Square shows US President Donald Trump lying in an open casket, alongside the caption "We will kill Trump" https://t.co/Il7QsmLt9i pic.twitter.com/VR2keQoxqO
— Arab News (@arabnews) July 15, 2026
‘मिनाब के बच्चों की याद में’ संदेश क्यों?
बिलबोर्ड पर दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में हुए स्कूल हमले के पीड़ितों की स्मृति से जुड़ा संदेश भी दिया गया है। 28 फरवरी 2026 को मिनाब के शजरेह तैयबेह प्राथमिक स्कूल पर मिसाइल हमला हुआ था।
एसोसिएटेड प्रेस की पड़ताल के अनुसार हमले में कम से कम 157 लोग मारे गए थे, जिनमें 123 बच्चे शामिल थे। अलग-अलग ईरानी आधिकारिक आंकड़ों में मृतकों की संख्या इससे अधिक बताई गई है। अमेरिकी सैन्य जांच के शुरुआती निष्कर्षों में कथित तौर पर अमेरिकी जिम्मेदारी की संभावना सामने आई थी, हालांकि पेंटागन ने अभी तक अंतिम सार्वजनिक रिपोर्ट जारी नहीं की है।
रॉयटर्स के अनुसार ईरानी अधिकारियों ने बाद में दावा किया कि स्कूल हमले में 175 से अधिक बच्चों और शिक्षकों की मौत हुई। अमेरिका ने कहा है कि वह जानबूझकर किसी स्कूल या नागरिक स्थल को निशाना नहीं बनाता। हमले की जिम्मेदारी और अंतिम मृतक संख्या को लेकर जांच तथा विवाद अब भी जारी है।
ट्रंप की हत्या की कथित ईरानी साजिश का अलर्ट
बिलबोर्ड का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब इजरायल द्वारा अमेरिका को ट्रंप की हत्या से जुड़ी कथित नई ईरानी साजिश के बारे में सचेत किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
AP के अनुसार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इस खुफिया अलर्ट की जानकारी दी थी। व्हाइट हाउस ने रिपोर्ट पर सार्वजनिक रूप से विस्तृत टिप्पणी नहीं की, लेकिन NATO सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान अमेरिकी नेता यानी उन्हें निशाना बनाना चाहता है।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि उनकी हत्या की स्थिति में अमेरिकी सेना को ईरान के खिलाफ अत्यंत कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था में किसी राष्ट्रपति की मृत्यु के बाद सैन्य जवाबी कार्रवाई का फैसला स्वतः लागू नहीं होता। ऐसी स्थिति में तत्कालीन राष्ट्रपति और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र अंतिम निर्णय लेंगे।
अमेरिका ने ईरान पर दोबारा किए हवाई हमले
15 जुलाई को अमेरिकी सेना ने ईरान पर नए दौर के हमले किए और कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार इन अभियानों में ईरानी तटीय रक्षा प्रणालियों, क्रूज मिसाइलों के भंडारण स्थलों और लॉन्च साइटों पर हमला किया गया।
अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा लागू करने की घोषणा भी की। अमेरिकी बलों ने एक ऐसे जहाज को निष्क्रिय करने का दावा किया, जिस पर नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश करने का आरोप था।
ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत की ओर मिसाइल तथा ड्रोन दागे। पहले के हमलों में जॉर्डन और खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी निशाने पर आए थे।
AP के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच कई दिनों से जारी जवाबी हमलों ने अंतरिम शांति समझौते को लगभग निष्प्रभावी कर दिया है और क्षेत्र में व्यापक युद्ध का खतरा फिर बढ़ गया है।
होर्मुज संकट से तेल बाजार पर असर
अमेरिका-ईरान संघर्ष का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य भी बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल व्यापार मार्गों में से एक है। फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही पर गंभीर प्रतिबंध लगाए थे।
इसके कारण तेल, उर्वरक और दूसरी आवश्यक वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव बढ़ा। अब अमेरिकी नाकेबंदी और ईरान की जवाबी धमकियों के कारण समुद्री व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और गहरी हो गई है।
क्या अमेरिका-ईरान वार्ता अब भी संभव है?
हिंसा दोबारा भड़कने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क औपचारिक रूप से पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। दोनों पक्षों के बीच परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और अंतरिम शांति व्यवस्था को लेकर बातचीत होती रही है।
हालांकि तेहरान में ट्रंप को ताबूत में दिखाने वाला बिलबोर्ड, हत्या की कथित साजिश से जुड़े खुफिया इनपुट और दोनों देशों के ताजा सैन्य हमलों ने वार्ता के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मौजूदा स्थिति में कोई भी गलत सैन्य आकलन पूरे पश्चिम एशिया को बड़े और लंबे युद्ध की ओर धकेल सकता है।
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