भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंध भले ही लंबे समय से तनावपूर्ण बने हुए हैं, लेकिन बहुपक्षीय मंचों पर भारत अपनी रणनीतिक भागीदारी लगातार बनाए हुए है। इसी नीति के तहत भारत ने शुक्रवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO के सीमा सुरक्षा प्रमुखों की 12वीं बैठक में हिस्सा लिया।
यह बैठक पाकिस्तान की अध्यक्षता में आयोजित की गई। हालांकि, भारत की ओर से बैठक में किस अधिकारी ने भाग लिया और वह किस स्तर का प्रतिनिधि था, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
बैठक में SCO सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने सीमा सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, संयुक्त सीमा अभियानों और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। भारत की भागीदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि दोनों देशों के बीच सामान्य राजनीतिक और कूटनीतिक संवाद फिलहाल बेहद सीमित है।
सीमा सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग पर चर्चा
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
इसके अलावा SCO के क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे, जिसे रीजनल एंटी-टेररिस्ट स्ट्रक्चर यानी RATS कहा जाता है, के प्रतिनिधि भी बैठक में मौजूद रहे।
बैठक के दौरान सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा, आतंकी नेटवर्क की गतिविधियों, अवैध घुसपैठ, तस्करी और संगठित अपराध जैसी साझा चुनौतियों से निपटने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।
SCO के तहत सीमा सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग एक ऐसा क्षेत्र है, जहां सदस्य देश अपने आपसी मतभेदों के बावजूद साझा सुरक्षा चुनौतियों पर मिलकर काम करते हैं।
‘सॉलिडैरिटी-2025’ अभियान के नतीजों को मंजूरी
बैठक में सदस्य देशों ने ‘सॉलिडैरिटी-2025’ नाम से चलाए गए संयुक्त सीमा अभियान के परिणामों की समीक्षा की और उन्हें मंजूरी दी।
इसके साथ ही वर्ष 2026 में प्रस्तावित ‘सॉलिडैरिटी-2026’ संयुक्त सीमा अभियान की रूपरेखा पर भी सहमति बनी। इस अभियान के अंतर्गत सदस्य देशों के बीच सीमा सुरक्षा से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान, संयुक्त रणनीति और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
बैठक में संयुक्त अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने तथा आतंकवाद और सीमा पार अपराध से जुड़ी गतिविधियों पर तेजी से कार्रवाई करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।
तनाव के बावजूद SCO में सक्रिय है भारत
भारत और पाकिस्तान के संबंध पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसके बावजूद भारत SCO को एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मंच मानते हुए उसकी बैठकों और गतिविधियों में हिस्सा लेता रहा है।
भारत ने वर्ष 2023 में SCO की अध्यक्षता की थी। इस दौरान भारत ने संगठन की कई महत्वपूर्ण बैठकों की मेजबानी की और आतंकवाद, संपर्क, आर्थिक सहयोग तथा क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था।
अक्टूबर 2024 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी पाकिस्तान में आयोजित SCO के शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक में हिस्सा लिया था। उनकी यह यात्रा कई वर्षों बाद किसी वरिष्ठ भारतीय मंत्री की पाकिस्तान यात्रा थी।
भारत की नीति यह रही है कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों में तनाव का असर बहुपक्षीय मंचों पर उसकी रणनीतिक और क्षेत्रीय भागीदारी पर नहीं पड़ना चाहिए।
पाकिस्तान संभालेगा SCO की अध्यक्षता
पाकिस्तान सितंबर 2026 से 31 अगस्त 2027 तक शंघाई सहयोग संगठन की अध्यक्षता संभालेगा। इस दौरान पाकिस्तान SCO के राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन सहित कई उच्चस्तरीय बैठकों की मेजबानी करेगा।
ऐसे में भारत की भागीदारी को लेकर आने वाले महीनों में भी कूटनीतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। दोनों देशों के बीच सीधा संवाद भले ही सीमित हो, लेकिन SCO जैसे मंचों के माध्यम से क्षेत्रीय सुरक्षा और अन्य साझा मुद्दों पर संपर्क बना हुआ है।
बिश्केक में होगा अगला SCO शिखर सम्मेलन
SCO का अगला राष्ट्राध्यक्ष शिखर सम्मेलन अगले महीने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में संगठन के सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है।
SCO के शिखर सम्मेलनों में आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा, परिवहन संपर्क और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाती है।
क्या है शंघाई सहयोग संगठन?
शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी। इसका मुख्यालय चीन की राजधानी बीजिंग में स्थित है।
संगठन का क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचा RATS उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में कार्यरत है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाना है।
भारत और पाकिस्तान वर्ष 2017 में SCO के पूर्ण सदस्य बने थे। इसके बाद ईरान को वर्ष 2023 और बेलारूस को वर्ष 2024 में संगठन की सदस्यता दी गई।
SCO को यूरेशिया क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली बहुपक्षीय संगठनों में गिना जाता है। इसमें चीन, रूस और भारत जैसी प्रमुख शक्तियों के साथ मध्य एशियाई देश भी शामिल हैं।
भारत की भागीदारी क्यों महत्वपूर्ण?
इस्लामाबाद में आयोजित सीमा सुरक्षा प्रमुखों की बैठक में भारत की मौजूदगी यह संकेत देती है कि नई दिल्ली पाकिस्तान के साथ राजनीतिक मतभेदों के बावजूद बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग को महत्वपूर्ण मानती है।
आतंकवाद, कट्टरपंथ, सीमा पार अपराध और तस्करी जैसी चुनौतियां किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। ऐसे में SCO जैसे मंच सदस्य देशों को साझा रणनीति बनाने और सुरक्षा एजेंसियों के बीच संपर्क बनाए रखने का अवसर देते हैं।
भारत की भागीदारी को क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति उसकी सक्रिय और व्यावहारिक कूटनीतिक नीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
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