अमेरिका इन दिनों जंगलों की आग, जहरीले धुएँ और विनाशकारी बाढ़ जैसी कई प्राकृतिक आपदाओं का एक साथ सामना कर रहा है। कनाडा के जंगलों से उठे घने धुएँ ने अमेरिका के ग्रेट लेक्स क्षेत्र से लेकर राजधानी वॉशिंगटन डीसी तक आसमान को धुंधला कर दिया है। वहीं पश्चिमी अमेरिका में दर्जनों बड़ी आग भड़क रही हैं और दक्षिणी राज्य टेक्सास के कई इलाके भीषण बाढ़ से प्रभावित हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आ रहे जंगल की आग के धुएँ को लेकर पड़ोसी देश पर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने कनाडा पर जंगलों और सूखी झाड़ियों का उचित प्रबंधन नहीं करने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि इस प्रदूषण से अमेरिका को हो रहे आर्थिक नुकसान को कनाडाई वस्तुओं पर लगाए गए टैरिफ में जोड़ा जा सकता है।
ट्रंप ने कनाडा पर लगाया ‘जानबूझकर लापरवाही’ का आरोप
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि कनाडा अपने जंगलों और उनमें जमा सूखी झाड़ियों की ठीक प्रकार से देखभाल नहीं कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा की लापरवाही के कारण अमेरिका को गंदी, प्रदूषित और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हवा का सामना करना पड़ रहा है।
ट्रंप ने इसे “जानबूझकर की गई लापरवाही” बताते हुए दावा किया कि इस प्रकार की घटनाओं से अमेरिका को हर साल अरबों डॉलर का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को लेकर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से सीधे बातचीत करेंगे।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि प्रदूषण के कारण अमेरिका को होने वाले आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी नुकसान की कीमत कनाडा से होने वाले आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाकर वसूली जा सकती है। हालांकि, कनाडा की ओर से कहा गया है कि अमेरिका को आलोचना करने के बजाय आग बुझाने में सहयोग करना चाहिए।
10 करोड़ से ज्यादा लोग एयर क्वालिटी अलर्ट के दायरे में
कनाडा और अमेरिका के उत्तरी हिस्सों में लगी आग से निकला धुआँ मिडवेस्ट, पूर्वोत्तर और मिड-अटलांटिक क्षेत्र तक फैल गया है। इसके कारण अमेरिका में 10 करोड़ से अधिक लोगों को किसी न किसी स्तर के एयर क्वालिटी अलर्ट के तहत रखा गया।
मिनियापोलिस, डेट्रॉइट, शिकागो, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन डीसी सहित कई प्रमुख शहरों का आसमान नारंगी और भूरे धुएँ से ढक गया। कुछ शहरों में वायु गुणवत्ता ‘बहुत अस्वास्थ्यकर’ या ‘खतरनाक’ श्रेणी में पहुँच गई। प्रशासन ने बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और सांस या हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने तथा घरों के अंदर रहने की सलाह दी है।
कनाडा में 858 सक्रिय जंगल की आग
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, गुरुवार तक कनाडा में करीब 858 जंगल की आग सक्रिय थी, जिनमें 111 को नियंत्रण से बाहर बताया गया। आग का सबसे गंभीर असर मैनिटोबा, सस्केचेवान और ओंटारियो प्रांतों में देखा जा रहा है।
तेज हवाओं के कारण जंगलों का धुआँ सीमा पार करके अमेरिका के बड़े हिस्से तक पहुँच गया। ओंटारियो प्रांत में ही करीब 200 सक्रिय आग से दमकलकर्मी जूझ रहे थे, जिनमें लगभग आधी आग नियंत्रण से बाहर बताई गई।
अमेरिका के 15 राज्यों में 68 बड़ी आग
अमेरिका में शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 तक 15 राज्यों में कुल 68 बड़ी जंगल की आग सक्रिय थी। इनमें से लगभग 17 नई आग प्रशांत उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में बिजली गिरने की घटनाओं के बाद भड़कीं।
आग पर नियंत्रण पाने के लिए पूरे अमेरिका में 17,400 से अधिक कर्मचारी, 140 हेलीकॉप्टर और अमेरिकी सेना के चार C-130 एयर टैंकर दल तैनात किए गए हैं। कम बर्फबारी, सूखा और अत्यधिक गर्मी के कारण पर्वतीय एवं पश्चिमी क्षेत्रों में वनस्पतियाँ सामान्य समय से पहले ही बेहद सूखी और ज्वलनशील हो गई हैं।
अब तक 37.2 लाख एकड़ क्षेत्र आग से प्रभावित
अमेरिका में वर्ष 2026 की शुरुआत से लेकर 17 जुलाई तक करीब 37.2 लाख एकड़ क्षेत्र जंगल की आग में जल चुका है। यह पिछले वर्ष जुलाई के मध्य तक जले क्षेत्र की तुलना में लगभग 10 लाख एकड़ अधिक है।
अधिकारियों और वैज्ञानिकों का कहना है कि सूखा, कम हिमपात, तेज हवाएँ और लगातार बढ़ता तापमान जंगलों में आग फैलने के खतरे को बढ़ा रहे हैं।
दक्षिणी अमेरिका में बाढ़ से तबाही
जहाँ अमेरिका का पूर्वी और पश्चिमी हिस्सा धुएँ एवं आग से प्रभावित है, वहीं दक्षिणी राज्य टेक्सास के हिल कंट्री क्षेत्र में लगातार तीसरे दिन भीषण बाढ़ की स्थिति बनी रही।
कुछ इलाकों में मंगलवार से शुक्रवार तक 27 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। बाढ़ के कारण कम से कम दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई, जबकि सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि बारिश कम होने के बावजूद नदियों का जलस्तर बढ़ता रह सकता है।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहा आग और बाढ़ का खतरा
जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि बढ़ता वैश्विक तापमान एक ही समय पर आग और बाढ़ जैसी विपरीत दिखने वाली आपदाओं को अधिक गंभीर बना सकता है।
गर्म वातावरण मिट्टी और पेड़-पौधों से नमी तेजी से सोख लेता है, जिससे जंगल सूखकर आग के लिए ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं। दूसरी ओर, गर्म हवा अधिक जलवाष्प जमा कर सकती है, जिससे अचानक अत्यधिक बारिश और बाढ़ की घटनाएँ बढ़ सकती हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, मानवीय गतिविधियों से प्रेरित जलवायु परिवर्तन ने लंबे समय तक एक ही स्थान पर टिके रहने वाले मौसम तंत्र की घटनाओं को भी बढ़ाया है, जिससे गर्मी, आग, धुआँ और बारिश जैसी आपदाएँ लंबे समय तक जारी रह सकती हैं।
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