भारतीय वायुसेना (IAF) के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान LCA Tejas को लेकर सोशल मीडिया पर एक बार फिर भ्रामक दावे और पाकिस्तान समर्थित प्रोपेगैंडा चर्चा में है। गुजरात के नालिया एयरबेस पर फरवरी 2026 में हुई एक घटना को आधार बनाकर तेजस विमान की विश्वसनीयता और भारतीय रक्षा तकनीक पर सवाल खड़े किए गए, जबकि उपलब्ध तथ्यों और बाद की जांच रिपोर्टों से एक अलग तस्वीर सामने आती है।
दरअसल, 7 फरवरी 2026 को गुजरात के नालिया एयरबेस पर रूटीन ट्रेनिंग उड़ान के दौरान भारतीय वायुसेना के एक तेजस Mk1 विमान के साथ लैंडिंग के समय घटना हुई थी। विभिन्न रिपोर्टों में इसे रनवे से आगे निकलना, रनवे से बाहर फिसलना या नरम जमीन में धंसने जैसी घटनाओं के रूप में बताया गया। स्थिति को देखते हुए पायलट ने मार्टिन-बेकर की जीरो-जीरो इजेक्शन सीट का उपयोग कर सुरक्षित रूप से विमान से बाहर निकलने का निर्णय लिया। पायलट को मामूली चोटें आईं और कोई जनहानि नहीं हुई।
हालांकि, घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई भ्रामक दावे वायरल हो गए। कुछ रिपोर्टों में इसे ‘क्रैश’ बताया गया, जबकि कुछ ने दावा किया कि तेजस का पूरा बेड़ा ग्राउंड कर दिया गया है। पाकिस्तान आधारित कुछ रक्षा विश्लेषकों और सोशल मीडिया अकाउंट्स ने इसे भारतीय रक्षा उद्योग की विफलता के रूप में पेश करने की कोशिश की। यहां तक कि विमान की डिजाइन में गंभीर खामियां होने और इसे पूरी तरह अविश्वसनीय बताने जैसे दावे भी किए गए।
बाद में सामने आई जांच रिपोर्टों के अनुसार, विमान को रनवे से बाहर निकलने के बाद एयरफ्रेम को नुकसान पहुंचा था। शुरुआती आकलन में ब्रेकिंग सिस्टम में संभावित खराबी या लैंडिंग के दौरान नियंत्रण खोने जैसी वजहों की चर्चा हुई। विमान नरम जमीन पर फिसल गया, जिससे उसे भारी नुकसान पहुंचा। हालांकि, इस घटना को किसी डिजाइन संबंधी मूलभूत खामी से जोड़ने के प्रमाण नहीं मिले।
इस बीच तेजस Mk1A कार्यक्रम को लेकर सकारात्मक खबरें सामने आ रही हैं। मिलिट्री ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के पास लगभग 20 तेजस Mk1A विमान तैयार हैं, जो इंजन मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इन विमानों में अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक (GE) कंपनी के इंजन लगाए जाने हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इंजन आपूर्ति की समस्या काफी हद तक सुलझ चुकी है।
अब सबसे बड़ी चुनौती इजरायली EL/M-2052 AESA रडार, हथियार नियंत्रण प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) सूट के पूर्ण एकीकरण की है। अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल और ASRAAM मिसाइल की फायरिंग के अलग-अलग परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं, लेकिन सभी प्रणालियों के पूर्ण एकीकरण की अंतिम मंजूरी अभी बाकी है।
भारतीय वायुसेना का लक्ष्य मार्च 2027 तक पहली तेजस Mk1A स्क्वाड्रन को पूरी तरह ऑपरेशनल बनाना है। यह लक्ष्य 2021 में हुए मूल अनुबंध के लगभग छह वर्ष बाद पूरा होने की उम्मीद है।
तेजस वर्तमान में तमिलनाडु के सुलूर एयरबेस और गुजरात के नालिया एयरबेस पर तैनात है। वहीं भविष्य में इसके उन्नत संस्करण तेजस Mk1A को राजस्थान के नाल एयरबेस (बीकानेर) और फलोदी एयरबेस पर तैनात किए जाने की योजना है। पाकिस्तान सीमा के निकट इन एयरबेसों पर तैनाती भारतीय वायुसेना की सामरिक क्षमता को और मजबूत करेगी।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस को विशेष रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह आधुनिक एवियोनिक्स, सटीक हथियार प्रणाली और उच्च गतिशीलता से लैस है, जो सीमित दूरी के संघर्षों में प्रभावी भूमिका निभाने में सक्षम बनाती है। पिछले एक दशक में हजारों सफल उड़ानों और ऑपरेशनल मिशनों ने तेजस की विश्वसनीयता को साबित किया है। ऐसे में नालिया एयरबेस की घटना को लेकर फैलाई गई अतिरंजित और भ्रामक खबरें वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खातीं।
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