पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया का विरोध कर रहे हजारों प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों के दौरान पाकिस्तानी रेंजर्स की फायरिंग में कम से कम 19 लोगों की मौत होने का दावा किया गया है, जबकि 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतकों में जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता सरदार उमर नजीर के भाई उस्मान नजीर का नाम भी शामिल है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार विरोध की आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग कर रही है। कई स्थानीय नागरिकों ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक मीडिया से हस्तक्षेप की मांग की है।
तीन चरणों में हो रहे हैं चुनाव
PoJK में विधानसभा चुनाव मूल रूप से 27 जुलाई को एक चरण में प्रस्तावित थे, लेकिन लगातार विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा चिंताओं के चलते चुनाव आयोग ने मतदान को तीन चरणों में कराने का फैसला किया। पहले चरण में मीरपुर डिवीजन में मतदान कराया गया। दूसरे चरण का मतदान 2 अगस्त को मुजफ्फराबाद डिवीजन और शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों पर होगा, जबकि तीसरा चरण 10 अगस्त को पुंछ डिवीजन में आयोजित किया जाएगा, जहां सबसे अधिक तनाव बना हुआ है।
Latest on Pakistani Military’s violence in Pakistan Occupied Jammu & Kashmir (PoJK). People being killed all across. 5 killed and 30 injured already. How long will the world media remain silent? No coverage to protests by civilians in PoJK by global media. pic.twitter.com/qO7lzJ5tSs
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) July 27, 2026
JAAC पर प्रतिबंध और बढ़ता आंदोलन
चुनाव से पहले जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तान सरकार की नीतियों और चुनावी व्यवस्था के खिलाफ बड़े आंदोलन का ऐलान किया था। सरकार ने 5 जून को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया और उसके कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद कुछ नेता भूमिगत हो गए, जबकि अन्य रावलाकोट सहित विभिन्न क्षेत्रों में धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। प्रतिबंध के बाद पूरे क्षेत्र में विरोध और अधिक तेज हो गया।
12 शरणार्थी सीटों पर सबसे बड़ा विवाद
JAAC के आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा PoJK विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटें हैं। विधानसभा की कुल 53 सीटों में से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि आठ सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक प्रतिनिधियों के लिए आरक्षित हैं।
विवाद का केंद्र उन 12 सीटों को लेकर है जो भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान पहुंचे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। JAAC का आरोप है कि पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों को PoJK की सरकार चुनने का अधिकार नहीं होना चाहिए। संगठन का कहना है कि इन सीटों के कारण स्थानीय मतदाताओं की राजनीतिक शक्ति कमजोर होती है और पाकिस्तान की बड़ी राजनीतिक पार्टियां इसका लाभ उठाती हैं।
हालांकि पाकिस्तान सरकार और अदालत का कहना है कि ये सीटें संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और इन्हें हटाने के लिए संविधान संशोधन आवश्यक होगा।
मतदान के दौरान हिंसा और धांधली के आरोप
पहले चरण के मतदान के दौरान कई क्षेत्रों से हिंसा और चुनावी अनियमितताओं की खबरें सामने आईं। समाहनी निर्वाचन क्षेत्र के रामलोहा पोलिंग स्टेशन के पास प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हुईं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि मतदान प्रक्रिया में दबाव और अनियमितताएं देखने को मिलीं।
इसके अलावा हथियारों के बल पर फर्जी मतदान, चुनावी धांधली और मतदाताओं को प्रभावित करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। पिछले कई सप्ताह से जारी अशांति के कारण बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि कई इलाकों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बाधित बताई जा रही हैं। पुंछ डिवीजन के कई क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने PoJK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को पाकिस्तान के लंबे समय से जारी प्रशासनिक दमन और स्थानीय लोगों के कथित शोषण का परिणाम बताया है। भारत ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग की आलोचना करते हुए कहा कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले क्षेत्र में लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का प्रयास कर रहा है।
PoJK में जारी राजनीतिक अस्थिरता, विरोध प्रदर्शन और चुनावी विवाद आने वाले चरणों में सुरक्षा और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। पूरे क्षेत्र की नजर अब दूसरे और तीसरे चरण के मतदान पर टिकी हुई है।
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