दिल्ली पुलिस ने 27 जुलाई 2026 को उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बिना किसी उकसावे के बल प्रयोग किया गया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को केवल जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना देने की अनुमति दी गई थी और संसद की ओर मार्च निकालने या निर्धारित प्रदर्शन स्थल से आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी गई थी।
पुलिस के अनुसार, कई सप्ताह तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से चलता रहा और इस दौरान प्रशासन ने प्रदर्शन स्थल को बलपूर्वक खाली कराने का कोई प्रयास नहीं किया। हालांकि स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों का एक समूह संसद का सत्र चलने के दौरान संसद भवन की ओर बढ़ने लगा और रास्ते में लगाए गए सुरक्षा बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश की।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को बार-बार सार्वजनिक घोषणाओं के माध्यम से निर्धारित स्थान पर ही रहने की अपील की गई। इसके बावजूद कुछ लोग आगे बढ़ते रहे। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान बैरिकेड्स को नुकसान पहुँचाया गया, पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया गया और कई अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की तथा बदसलूकी की गई। पुलिस ने दावा किया कि कुछ वरिष्ठ और बुजुर्ग अधिकारियों को भी भीड़ ने घेर लिया था।
पुलिस के मुताबिक, शुरुआत में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए केवल समझाने-बुझाने का प्रयास किया गया और कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई। इसके अलावा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत भीड़ को हटने की चेतावनी दी गई। जब प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स पर चढ़ने और उन्हें हटाने लगे, तब पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया तथा वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि बार-बार बैरिकेड्स तोड़े जाने, पथराव होने और पुलिसकर्मियों पर हमले जारी रहने के बाद ही सीमित स्तर पर लाठीचार्ज किया गया। इसके साथ ही स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यकता अनुसार आँसू गैस के गोले भी छोड़े गए। पुलिस ने स्पष्ट किया कि जैसे ही हालात सामान्य हुए और प्रदर्शनकारी पीछे हटने लगे, बल प्रयोग भी रोक दिया गया।
पुलिस ने दावा किया कि पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकतम संयम बरता गया। साथ ही मामले की समीक्षा जारी है, जिसमें उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस यह भी जाँच कर रही है कि कहीं किसी पुलिसकर्मी की ओर से कोई लापरवाही या अनुचित कार्रवाई तो नहीं हुई।
इस बीच CJP ने प्रशासन पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने चेतावनी दी है कि यदि दिल्ली, बिहार और अन्य राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस नहीं ली गईं, तो संगठन दोबारा आंदोलन शुरू करेगा।
Dear @JPNadda @DrJitendraSingh ji,
We are observing a complete breach of the agreement regarding no police action against the protestors. Hundreds of students have been arrested in Bihar and Bengal, and hundreds are being surveilled/harrassed in Delhi and other states. Multiple…
— Ashutosh Ranka (@AshutoshRanka) July 27, 2026
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जारी एक पोस्ट में रांका ने दावा किया कि प्रशासन ने पुलिस कार्रवाई नहीं करने के कथित समझौते का पालन नहीं किया। उन्होंने हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई, दर्ज सभी FIR वापस लेने और भविष्य में कोई नया मामला दर्ज नहीं करने की गारंटी की माँग की।
रांका ने कहा कि यदि उनकी माँगें नहीं मानी गईं तो संगठन फिर से धरने पर बैठने को मजबूर होगा। उन्होंने कानूनी मामलों और केंद्र सरकार के साथ तय समयसीमा से जुड़े कथित लिखित समझौते की प्रति भी आयोजकों को उपलब्ध कराने की माँग की है।
उधर, CJP के विरोध प्रदर्शनों के दौरान तोड़फोड़ और सरकारी एवं निजी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने के आरोपों के बाद पटना सहित कई स्थानों पर FIR दर्ज की गई हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और CJP के बीच आगे बातचीत होती है या आंदोलन एक बार फिर तेज़ होता है।
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