भारत ने स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में कुल 6,057.02 मेगावाट नई विंड पावर क्षमता जोड़ी गई। यह भारत में विंड एनर्जी सेक्टर की शुरुआत के बाद से किसी एक वित्त वर्ष में दर्ज की गई अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक बढ़ोतरी है।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राजस्थान के जयपुर से सांसद मंजू शर्मा के सवालों के जवाब में संसद में ये आंकड़े पेश किए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2026 तक भारत की कुल स्थापित विंड पावर क्षमता बढ़कर 57,443.39 मेगावाट हो गई।
विंड पावर क्षमता में गुजरात देश में नंबर वन
राज्यवार स्थापित विंड पावर क्षमता के मामले में गुजरात देश में सबसे आगे है। गुजरात में 30 जून 2026 तक कुल 16,086.655 मेगावाट विंड एनर्जी क्षमता स्थापित हो चुकी थी।
इसके बाद तमिलनाडु और कर्नाटक का स्थान रहा।
- गुजरात: 16,086.655 MW
- तमिलनाडु: 12,273.685 MW
- कर्नाटक: 8,896.34 MW
- महाराष्ट्र: 6,318.71 MW
- राजस्थान: 5,516.045 MW
- आंध्र प्रदेश: 4,461.58 MW
- मध्य प्रदेश: 3,686.45 MW
- तेलंगाना: 128.1 MW
- केरल: 71.525 MW
- अन्य राज्य: 4.3 MW
इन आंकड़ों से साफ है कि भारत की विंड एनर्जी क्षमता का बड़ा हिस्सा गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों में केंद्रित है।

पांच साल में लगातार बढ़ी विंड पावर की सालाना क्षमता
भारत में विंड पावर क्षमता जोड़ने की रफ्तार पिछले पांच वर्षों में लगातार तेज हुई है। वित्त वर्ष 2021-22 में देश ने 1,110.52 मेगावाट क्षमता जोड़ी थी, जो 2025-26 में बढ़कर 6,057.02 मेगावाट हो गई।
वित्त वर्ष के अनुसार जोड़ी गई नई क्षमता:
- 2021-22: 1,110.52 MW
- 2022-23: 2,275.55 MW
- 2023-24: 3,253.38 MW
- 2024-25: 4,151.31 MW
- 2025-26: 6,057.02 MW
इस तरह पांच वर्षों में सालाना विंड पावर क्षमता वृद्धि पांच गुना से ज्यादा हो गई है। यह बढ़ोतरी भारत की क्लीन एनर्जी नीतियों, निजी निवेश, ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं और राज्य स्तर पर विकसित किए जा रहे ऊर्जा बुनियादी ढांचे का परिणाम मानी जा रही है।
नई विंड क्षमता जोड़ने में भी गुजरात सबसे आगे
पिछले पांच वित्त वर्षों में नई विंड पावर क्षमता जोड़ने के मामले में भी गुजरात ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया।
गुजरात ने वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच क्रमशः:
- 647.4 MW
- 769.7 MW
- 1,743.8 MW
- 954.76 MW
- 2,964.775 MW
नई विंड क्षमता जोड़ी।
वित्त वर्ष 2025-26 में अकेले गुजरात ने लगभग 2,964.78 मेगावाट की क्षमता जोड़ी, जो देश में उस वर्ष जोड़ी गई कुल विंड पावर क्षमता का एक बड़ा हिस्सा है।
कर्नाटक और तमिलनाडु में भी तेजी से विस्तार
कर्नाटक ने भी विंड एनर्जी क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। राज्य ने पिछले पांच वर्षों में क्रमशः 192.3 MW, 164.05 MW, 724.66 MW, 1,331.485 MW और 1,379.04 MW नई क्षमता जोड़ी।
तमिलनाडु ने इसी अवधि में क्रमशः 258.325 MW, 150.8 MW, 586.375 MW, 1,136.375 MW और 407.32 MW क्षमता जोड़ी।
तमिलनाडु देश के सबसे पुराने और बड़े विंड एनर्जी बाजारों में शामिल है, जबकि गुजरात और कर्नाटक में हाल के वर्षों में नई परियोजनाओं की रफ्तार तेजी से बढ़ी है।
भारत में 1,163.85 GW विंड एनर्जी की संभावित क्षमता
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, भारत में विंड एनर्जी की कुल संभावित क्षमता लगभग 1,163.85 गीगावाट आंकी गई है। इसका अर्थ है कि वर्तमान स्थापित क्षमता की तुलना में देश में विंड पावर विस्तार की बहुत बड़ी संभावना अभी भी मौजूद है।
विंड एनर्जी पोटेंशियल के मामले में राजस्थान सबसे आगे है।
प्रमुख राज्यों की अनुमानित विंड पावर क्षमता:
- राजस्थान: 284,250 MW
- गुजरात: 180,790 MW
- महाराष्ट्र: 173,868 MW
- कर्नाटक: 169,251 MW
- आंध्र प्रदेश: 123,336 MW
राजस्थान में वर्तमान स्थापित क्षमता अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद विंड रिसोर्स पोटेंशियल सबसे ज्यादा है। इससे भविष्य में राज्य में बड़े पैमाने पर नए विंड एनर्जी प्रोजेक्ट विकसित होने की संभावना है।
सोलर एनर्जी में भारत के पास 3,443.37 GW की संभावना
विंड एनर्जी के साथ-साथ भारत में सोलर एनर्जी की संभावनाएं और भी बड़ी हैं। मंत्रालय ने देश की कुल सोलर एनर्जी क्षमता का अनुमान लगभग 3,443.37 गीगावाट लगाया है।
राज्यवार सोलर पोटेंशियल में राजस्थान सबसे आगे है।
- राजस्थान: 828,781.44 MW
- महाराष्ट्र: 486,678.68 MW
- मध्य प्रदेश: 318,972.16 MW
- आंध्र प्रदेश: 299,312.12 MW
- गुजरात: 243,219.9 MW
- कर्नाटक: 223,278.99 MW
- तमिलनाडु: 204,765.06 MW
रेगिस्तानी और कम आबादी वाले बड़े भूभाग के कारण राजस्थान में सोलर पावर परियोजनाओं की सबसे अधिक संभावनाएं हैं। वहीं महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश भी बड़े सोलर एनर्जी हब के रूप में उभर सकते हैं।
विंड-सोलर हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स पर सरकार का जोर
केंद्र सरकार का मानना है कि भारत के कई राज्यों में विंड और सोलर एनर्जी को मिलाकर हाइब्रिड पावर प्रोजेक्ट विकसित करने की बड़ी गुंजाइश है।
विंड-सोलर हाइब्रिड परियोजनाओं में दिन के समय सोलर एनर्जी और अनुकूल मौसम में विंड एनर्जी का उपयोग किया जाता है। इससे बिजली उत्पादन में निरंतरता बढ़ सकती है और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ विंड एनर्जी ने देश का नेशनल विंड-सोलर हाइब्रिड रिसोर्स मैप भी सार्वजनिक डोमेन में जारी किया है। इस मैप की मदद से निवेशक, राज्य सरकारें और ऊर्जा कंपनियां उन क्षेत्रों की पहचान कर सकती हैं, जहां विंड और सोलर दोनों संसाधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
महाराष्ट्र की मजबूत हाइब्रिड एनर्जी प्रोफाइल
महाराष्ट्र में लगभग 173,868 मेगावाट विंड पोटेंशियल और 486,678.68 मेगावाट सोलर पोटेंशियल मौजूद है। दोनों संसाधनों का यह संयोजन राज्य को विंड-सोलर हाइब्रिड परियोजनाओं के लिए मजबूत स्थिति में रखता है।
इसी तरह गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में भी बड़े स्तर पर हाइब्रिड एनर्जी पार्क विकसित किए जा सकते हैं।
हैदराबाद और बड़े शहरों को मिल सकती है क्लीन पावर
तेलंगाना में वर्तमान स्थापित विंड पावर क्षमता केवल 128.1 मेगावाट है, लेकिन अन्य राज्यों में विकसित होने वाले इंटर-स्टेट ग्रीन एनर्जी नेटवर्क और हाइब्रिड परियोजनाओं से हैदराबाद जैसे बड़े शहरी केंद्रों को भविष्य में स्वच्छ बिजली की आपूर्ति मिल सकती है।
हाइब्रिड पावर, बैटरी स्टोरेज और मजबूत ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के माध्यम से महानगरों, औद्योगिक क्षेत्रों और डेटा सेंटर हब को स्थिर क्लीन-पावर सप्लाई उपलब्ध कराई जा सकती है।
भारत का 2025-26 का रिकॉर्ड प्रदर्शन संकेत देता है कि देश में विंड एनर्जी सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है। विशाल विंड और सोलर पोटेंशियल का प्रभावी उपयोग होने पर भारत आने वाले वर्षों में दुनिया के प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक देशों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
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