वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
दिल्ली पुलिस ने अपराध की बर्बरता और अंकित शर्मा के शरीर पर मिली 51 चोटों का हवाला देते हुए सभी दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि दोषियों के सुधार की कोई संभावना नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने मामले को मृत्युदंड के लिए आवश्यक ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में न रखते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
किन धाराओं में दोषी ठहराए गए ताहिर हुसैन और अन्य?
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 13 जुलाई 2026 को ताहिर हुसैन और चार सह-आरोपितों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के साथ धारा 149, धारा 365 के साथ 149, धारा 147, 148, 153A और धारा 188 के तहत दोषी ठहराया था।
ये धाराएँ हत्या, गैरकानूनी जमावड़ा, घातक हथियारों के साथ दंगा, अपहरण, धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाने और सरकारी आदेश का उल्लंघन करने जैसे अपराधों से संबंधित हैं।
हालांकि, अदालत ने ताहिर हुसैन को IPC की धारा 120B के तहत आपराधिक साजिश तथा धारा 505, 109 और 114 के आरोपों से बरी कर दिया था। अन्य चार दोषियों को भी समान अपराधों में दोषी ठहराया गया।
Delhi | Karkardooma Court sentenced all other accused in the IB official Ankit Sharma murder case to life imprisonment under Section 302 of the IPC.
The convicts were also sentenced for offences including rioting, rioting with a lethal weapon, kidnapping, and murder. The court… https://t.co/vn0bbSPIkQ
— ANI (@ANI) July 31, 2026
कौन-कौन दोषी करार दिए गए?
अंकित शर्मा हत्या मामले में कोर्ट ने इन पांच लोगों को दोषी ठहराया:
ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस।
मामले में कुल 11 आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चला था। कोर्ट ने हसीन, फिरोज, गुलफाम, शोएब आलम, समीर खान और मुंतजिम को सभी आरोपों से बरी कर दिया था।
25 फरवरी 2020 को क्या हुआ था?
यह मामला 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग और खजूरी खास क्षेत्र में हुई हिंसा से जुड़ा है। दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा शाम के समय अपने घर से बाहर निकले थे, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटे।
अंकित के पिता ने उनके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। अगले दिन चांद बाग पुलिया के पास एक नाले से उनका शव बरामद किया गया। उन्हें जीटीबी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इस संबंध में दयालपुर पुलिस थाने में FIR संख्या 65/2020 दर्ज की गई थी।
कोर्ट ने क्या कहा?
दोषसिद्धि के आदेश में कोर्ट ने कहा था कि ताहिर हुसैन उस गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा था, जो हिंदू समुदाय के लोगों और उनकी संपत्तियों को निशाना बनाने के उद्देश्य से एकत्र हुई थी।
अदालत के अनुसार, हथियारों से लैस भीड़ ने अंकित शर्मा को घेरा, उन्हें खींचकर चांद बाग पुलिया की ओर ले गई और उन पर लगातार हमला किया। कोर्ट ने धारा 149 के तहत गैरकानूनी जमावड़े के प्रत्येक सदस्य को भीड़ के साझा उद्देश्य के अंतर्गत किए गए अपराधों के लिए उत्तरदायी माना।
अंकित शर्मा के शरीर पर मिली थीं 51 चोटें
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, अंकित शर्मा के शरीर पर कुल 51 चोटें पाई गई थीं। इनमें धारदार हथियारों से लगी चोटों के साथ-साथ कुंद वस्तुओं से किए गए हमले के निशान भी शामिल थे।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि सात चोटें अपने आप में मृत्यु का कारण बनने के लिए पर्याप्त थीं। दिल्ली पुलिस ने इसी आधार पर हत्या को अत्यंत क्रूर, सुनियोजित और ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला बताते हुए दोषियों के लिए फाँसी की सजा की मांग की थी।
अभियोजन ने पेश किए थे 91 गवाह
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 91 गवाहों के बयान दर्ज करवाए। पुलिस और अभियोजन ने चश्मदीदों की गवाही, फॉरेंसिक साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर अपना मामला प्रस्तुत किया।
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि अंकित शर्मा को गैरकानूनी भीड़ ने अगवा किया, उन पर जानलेवा हमला किया और हत्या के बाद उनका शव नाले में फेंक दिया।
कोर्ट ने क्यों नहीं दी फाँसी?
दिल्ली पुलिस ने तर्क दिया था कि अपराध की क्रूरता को देखते हुए दोषियों को मृत्युदंड मिलना चाहिए। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने कहा कि हर हत्या के मामले में फाँसी नहीं दी जा सकती और दोषियों से जुड़ी परिस्थितियों तथा उनके सुधार की संभावना पर भी विचार किया जाना चाहिए।
अदालत ने माना कि अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि दोषी सुधार की संभावना से पूरी तरह परे हैं। इसके बाद सभी पांचों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
अंकित शर्मा हत्याकांड में लंबी कानूनी प्रक्रिया
अंकित शर्मा की हत्या 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक रही है। करीब छह वर्ष तक चली जाँच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद जुलाई 2026 में पांच आरोपितों को दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई को उनकी सजा का ऐलान हुआ।
फैसले के समय अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। ताहिर हुसैन और अन्य चारों दोषी अदालत में शारीरिक रूप से उपस्थित थे।
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