ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के लिए नौवां दिन अब तक का सबसे सफल दिन साबित हुआ। भारतीय खिलाड़ियों ने जूडो और एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में कुल छह पदक अपने नाम किए। इनमें दो स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक शामिल रहे।
इस दमदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। भारत के खाते में अब पांच गोल्ड, 12 सिल्वर और छह ब्रॉन्ज मेडल हैं। पदक तालिका में भारत 10वें स्थान पर बना हुआ है।
जूडो में अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जीता गोल्ड
जूडो में भारत के लिए दिन ऐतिहासिक रहा। महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग में अस्मिता डे ने स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रचा। उनकी इस जीत को राष्ट्रमंडल खेलों के जूडो इतिहास में भारत की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है।
पुरुषों की जूडो स्पर्धा में हर्ष सिंह ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके साथ ही वह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरुष जूडो खिलाड़ी बने।
महिलाओं के 57 किलोग्राम भार वर्ग में यामिनी मौर्य ने रजत पदक हासिल कर भारत की पदक संख्या में इजाफा किया। इस तरह भारत ने जूडो से एक ही दिन में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता।
नीरज चोपड़ा को सिल्वर, यशवीर सिंह ने जीता ब्रॉन्ज
पुरुषों की जेवलिन थ्रो स्पर्धा में भारत ने डबल पोडियम फिनिश हासिल की। भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीता। यह उनका इस सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा।
भारत के यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। श्रीलंका के रुमेश पथिरागे ने 89.75 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता।
यशवीर सिंह का प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए बेहद उत्साहजनक रहा। उन्होंने आखिरी दौर में शानदार थ्रो करते हुए पोडियम पर जगह बनाई और नीरज चोपड़ा के साथ भारत को जेवलिन में दो पदक दिलाए।
तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में रचा इतिहास
भारत के तेजस्विन शंकर ने पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। जूडो के तीन और एथलेटिक्स के तीन पदकों की मदद से भारत ने नौवें दिन कुल छह पदक जीते।
इस प्रदर्शन के बाद भारत की कुल पदक संख्या 23 तक पहुंच गई। भारत अब अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी देशों के काफी करीब है और प्रतियोगिता के अंतिम मुकाबलों में पदक तालिका में ऊपर जाने की उम्मीद कर रहा है।
बॉक्सिंग में इतिहास: भारत के सभी 10 मुक्केबाज फाइनल में
जूडो और एथलेटिक्स के बाद भारत की सबसे बड़ी उम्मीद बॉक्सिंग से जुड़ी हुई है। भारतीय मुक्केबाजों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सभी 10 सेमीफाइनल मुकाबलों में जीत दर्ज की और गोल्ड मेडल मैच में प्रवेश किया।
इसके साथ भारत के लिए बॉक्सिंग में 10 पदक सुनिश्चित हो चुके हैं। सभी भारतीय मुक्केबाज अब स्वर्ण पदक के लिए रिंग में उतरेंगे। यह राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का अब तक का सबसे बड़ा बॉक्सिंग फाइनल दल बताया जा रहा है।
ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन सहित कई प्रमुख भारतीय मुक्केबाजों पर देश की निगाहें रहेंगी। फाइनल में अच्छे परिणाम भारत की स्वर्ण पदक संख्या और पदक तालिका की स्थिति में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
क्या पदक तालिका के टॉप-5 में पहुंच सकता है भारत?
भारत के सभी 10 मुक्केबाज फाइनल में पहुंच चुके हैं। इसलिए बॉक्सिंग से कम से कम 10 सिल्वर मेडल सुनिश्चित हैं, जबकि जीतने वाले खिलाड़ी इन पदकों को गोल्ड में बदल देंगे।
अगर भारतीय मुक्केबाज बड़ी संख्या में फाइनल जीतते हैं, तो भारत की गोल्ड मेडल संख्या तेजी से बढ़ सकती है। हालांकि भारत की अंतिम रैंकिंग केवल उसके प्रदर्शन पर निर्भर नहीं करेगी। पदक तालिका में स्थान स्वर्ण पदकों की संख्या के आधार पर तय होता है और दूसरे देशों के आगामी परिणाम भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
फिर भी बॉक्सिंग के 10 फाइनल, एथलेटिक्स और अन्य स्पर्धाओं में मौजूद अवसरों को देखते हुए भारत के पास पदक तालिका में बड़ी छलांग लगाने का मजबूत मौका है।
भारतीय खिलाड़ियों से गोल्ड की उम्मीद
अब पूरे देश की निगाहें बॉक्सिंग फाइनल और बाकी निर्णायक मुकाबलों पर टिकी हैं। भारत का प्रदर्शन जारी रहा तो ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार अभियानों में शामिल हो सकता है।
नीरज चोपड़ा, यशवीर सिंह, अस्मिता डे, हर्ष सिंह, यामिनी मौर्य और तेजस्विन शंकर के पदकों ने भारतीय दल का उत्साह बढ़ाया है। अब भारतीय मुक्केबाजों के सामने इस शानदार अभियान को स्वर्णिम अंत तक पहुंचाने की चुनौती होगी।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel