संसद के मानसून सत्र के दौरान संसद परिसर में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष द्वारा किए गए सांकेतिक प्रदर्शन पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भगवा वस्त्र पहनकर संत की भूमिका निभाई थी और मकर द्वार के पास रखी दानपेटियों के माध्यम से कथित चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाया था।
भारतीय जनता पार्टी के सांसदों और कई संत संगठनों ने प्रदर्शन को सनातन धर्म, संत समाज और धार्मिक प्रतीकों का अपमान बताया है। दूसरी ओर, विपक्ष का कहना है कि प्रदर्शन का उद्देश्य किसी धर्म या संत का अपमान करना नहीं, बल्कि राम मंदिर के चढ़ावे से संबंधित कथित गड़बड़ियों पर सरकार से जवाब मांगना था।
संसद के मकर द्वार पर हुआ था सांकेतिक प्रदर्शन
यह प्रदर्शन 31 जुलाई 2026 को संसद परिसर के मकर द्वार के पास आयोजित किया गया था। विपक्षी सांसदों ने कथित राम मंदिर चढ़ावा विवाद और छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार के विरुद्ध नारे लगाए।
प्रदर्शन के दौरान सीढ़ियों के पास दानपेटियां रखी गई थीं और पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर उनके निकट बैठे थे। विपक्षी नेताओं ने इसे व्यंग्यात्मक एवं सांकेतिक राजनीतिक प्रदर्शन बताया, लेकिन भाजपा और धार्मिक संगठनों ने संत की वेशभूषा तथा धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई।
संजय जायसवाल ने संसदीय मर्यादा का मुद्दा उठाया
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने संसद परिसर में हुए प्रदर्शन को संसदीय नियमों और सदन की मर्यादा के विरुद्ध बताया। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को नोटिस देकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।
जायसवाल का तर्क है कि संसद परिसर की व्यवस्था और अनुशासन की जिम्मेदारी लोकसभा अध्यक्ष के अधीन होती है। ऐसे में परिसर के भीतर धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल कर नाटकीय प्रदर्शन करना संसदीय विशेषाधिकार और मर्यादा से जुड़ा गंभीर विषय है।
उन्होंने मांग की कि मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजकर यह जांच की जाए कि प्रदर्शन के दौरान संसदीय नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।
‘सनातन धर्म का अपमान’ करने का आरोप
संजय जायसवाल ने आरोप लगाया कि पप्पू यादव द्वारा संत की वेशभूषा में किया गया प्रदर्शन सनातन परंपरा की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला था। भाजपा नेताओं ने इसे केवल सरकार विरोधी प्रदर्शन न मानकर संत समाज और भगवान राम से जुड़ी धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया है।
हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 25 के उल्लंघन संबंधी दावा भाजपा नेताओं का राजनीतिक और कानूनी तर्क है। यह तय करना न्यायालय या सक्षम संवैधानिक प्राधिकारी का विषय होगा कि प्रदर्शन से किसी संवैधानिक अधिकार या कानून का वास्तविक उल्लंघन हुआ या नहीं।
साक्षी महाराज ने पप्पू यादव पर साधा निशाना
भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने पप्पू यादव के प्रदर्शन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि संतों, साधुओं, भगवान रामलला और भगवा परंपरा का राजनीतिक प्रदर्शन में इस्तेमाल कर धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाई गई है।
साक्षी महाराज ने इसे विपक्ष की ओर से सनातन परंपरा को बदनाम करने की कथित साजिश बताया। संत संगठनों और अयोध्या से जुड़े कई धार्मिक नेताओं ने भी प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा कि चढ़ावे से संबंधित आरोपों की जांच अलग विषय है, लेकिन इसके लिए संतों की वेशभूषा का उपहास नहीं किया जाना चाहिए।
राहुल सिन्हा ने भी प्रदर्शन पर उठाए सवाल
भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने आरोप लगाया कि संत का अभिनय कर हिंदू धार्मिक परंपराओं की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध दर्ज कराने के कई लोकतांत्रिक तरीके उपलब्ध हैं, लेकिन किसी समुदाय की धार्मिक वेशभूषा को व्यंग्य का माध्यम बनाना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समाज की सहिष्णुता का अनुचित लाभ नहीं उठाया जाना चाहिए। उनकी टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हुई, क्योंकि आलोचकों ने धार्मिक समुदायों की तुलना वाले बयानों को अनावश्यक और भड़काऊ बताया।
दिल्ली पुलिस को दी गई शिकायत, वाराणसी में मामला दर्ज
दिल्ली भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली पुलिस के समक्ष पप्पू यादव, राहुल गांधी, अवधेश प्रसाद और प्रदर्शन में शामिल अन्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ शिकायत दी थी। शिकायत में धार्मिक भावनाएं आहत करने और संसद परिसर का अनुचित इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया।
दिल्ली पुलिस से जुड़ी उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, शिकायत दिए जाने के समय तक वहां FIR दर्ज नहीं की गई थी। इसलिए दिल्ली की शिकायत को सीधे दर्ज FIR बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
वहीं, वाराणसी में राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद सहित विपक्षी नेताओं के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में मामला दर्ज किए जाने की खबर सामने आई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोप न्यायिक जांच में सिद्ध होना अभी बाकी है।
समाजवादी पार्टी ने क्या कहा?
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने पप्पू यादव के संत की वेशभूषा धारण करने को गलत बताया। उन्होंने कहा कि संतों का कथित चढ़ावा चोरी से कोई संबंध नहीं है और प्रदर्शन में संत समाज को इस प्रकार प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए था।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े आरोपों की सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए। समाजवादी पार्टी ने विपक्षी नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों को अनावश्यक बताते हुए सरकार से मूल आरोपों पर स्पष्टीकरण देने की मांग की।
कांग्रेस ने सरकार पर मुद्दा भटकाने का आरोप लगाया
कांग्रेस ने पप्पू यादव और अन्य विपक्षी सांसदों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की आलोचना की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार कथित चढ़ावा अनियमितता के आरोपों की जांच कराने के बजाय प्रदर्शन करने वाले सांसदों पर कार्रवाई कर रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार धार्मिक भावनाओं की आड़ लेकर मूल वित्तीय आरोपों से ध्यान हटाना चाहती है। भाजपा ने इन आरोपों को राजनीतिक प्रचार बताते हुए खारिज किया है।
पप्पू यादव ने अपने प्रदर्शन का किया बचाव
पप्पू यादव ने कहा कि उनका उद्देश्य भगवान राम, संत समाज या भगवा परंपरा का अपमान करना नहीं था। उनके अनुसार, वह केवल राम मंदिर को मिलने वाले चढ़ावे से जुड़े कथित घोटाले और चोरी के आरोपों पर सवाल उठा रहे थे।
उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज मामले और राजनीतिक विरोध को आवाज दबाने की कोशिश बताया। विवाद के बीच नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक व्यक्ति ने कथित रूप से उन पर चप्पल फेंकी। पप्पू यादव ने इसे अपने खिलाफ साजिश बताया, जबकि पुलिस मामले की जांच कर रही है।
संत संगठनों ने जताई नाराजगी
विश्व हिंदू परिषद और अखिल भारतीय संत समिति सहित कई धार्मिक संगठनों ने संसद परिसर में हुए प्रदर्शन की आलोचना की। उनका कहना है कि किसी कथित वित्तीय अनियमितता का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उसके लिए संत की वेशभूषा और धार्मिक प्रतीकों का व्यंग्यात्मक प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
संत संगठनों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन से यह संदेश गया कि संत समाज कथित चढ़ावा चोरी में शामिल है। उन्होंने विपक्षी नेताओं से माफी और संसदीय कार्रवाई की मांग की।
संसद परिसर में प्रदर्शन से जुड़े नियमों पर बहस
संसद परिसर में सांसद अक्सर विभिन्न विषयों पर तख्तियों, नारों और सांकेतिक गतिविधियों के माध्यम से विरोध दर्ज कराते हैं। हालांकि, धार्मिक वेशभूषा, प्रतीकों और अभिनय के इस्तेमाल ने इस प्रदर्शन को सामान्य राजनीतिक विरोध से अलग और अधिक विवादास्पद बना दिया।
भाजपा सांसदों का कहना है कि मामला संसद की गरिमा और विशेषाधिकार से जुड़ा है। विपक्ष इसे अभिव्यक्ति और राजनीतिक विरोध का अधिकार बता रहा है। इस पर अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष या संबंधित संसदीय समिति द्वारा लिया जा सकता है।
झारखंड लोक सेवा आयोग पर निशिकांत दुबे का हमला
राम मंदिर प्रदर्शन विवाद के बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने झारखंड लोक सेवा आयोग से जुड़े मामलों को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आयोग में कथित भाई-भतीजावाद, राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
दुबे ने दावा किया कि पिछले कई वर्षों से भर्ती प्रक्रियाओं पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे झारखंड के युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग में नियुक्त कुछ सदस्यों के कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा से राजनीतिक संबंध हैं।
ये निशिकांत दुबे द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। आयोग या संबंधित व्यक्तियों की दोषसिद्धि से जुड़ा कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है।
पेपर लीक और युवा आंदोलनों का मुद्दा
निशिकांत दुबे ने झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और कथित पेपर लीक मामलों को लेकर हो रहे आंदोलनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कड़ा कानून तथा निष्पक्ष जांच जरूरी है।
इससे पहले उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ अत्यंत कठोर कानून बनाने की मांग भी की थी। हालांकि, उनके कुछ अन्य बयानों पर छात्र संगठनों ने आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया था कि वह प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की चिंताओं को कम करके आंक रहे हैं।
राजनीतिक विवाद के दो अलग मुद्दे
संसद के बाहर दिए गए बयानों में राम मंदिर चढ़ावा प्रदर्शन और झारखंड लोक सेवा आयोग का विवाद एक साथ सामने आया, लेकिन दोनों स्वतंत्र मुद्दे हैं।
पहला मामला संसद परिसर में धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल, कथित चढ़ावा अनियमितता और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है। दूसरा मामला झारखंड में भर्ती परीक्षाओं, आयोग की कार्यप्रणाली और कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है। समाचार प्रस्तुति में दोनों विषयों को अलग संदर्भ में रखना आवश्यक है।
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