तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को उनकी उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट से जुड़े पुलिस मामले की जांच में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होने की अनुमति मांगी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन में रहने वाले जनप्रतिनिधि विरोध-प्रदर्शन या संभावित हमले की आशंका का हवाला देकर जांच एजेंसी के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने से नहीं बच सकते। मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने की।
अदालत ने यह भी कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट पहले ही महुआ मोइत्रा को अंतरिम संरक्षण देते हुए जांच में सहयोग करने का निर्देश दे चुका है, इसलिए मौजूदा स्तर पर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
‘राजनीति में आने का फैसला किया और अब अंडों से डर रही हैं?’
महुआ मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि उनकी मुवक्किल को पुलिस स्टेशन जाने पर भीड़ द्वारा हमला किए जाने की आशंका है।
इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने सवाल किया कि एक निर्वाचित सांसद जांच में वर्चुअल रूप से ही क्यों शामिल होना चाहती हैं।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने स्वतंत्रता सेनानियों का उदाहरण देते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में आने वाले लोगों को विरोध का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। कोर्ट की टिप्पणी में अंडे फेंके जाने की आशंका और स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा गोलियां झेलने का उल्लेख किया गया।
फेसबुक पोस्ट से जुड़ा है मामला
यह विवाद जून 2026 में दर्ज एक FIR से जुड़ा है। शिकायत एक भाजपा नेता की ओर से की गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि महुआ मोइत्रा द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए दो वीडियो में आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया था जब कथित तौर पर भाजपा समर्थक कृष्णानगर की एक अदालत के बाहर अंडे और टमाटर लेकर महुआ मोइत्रा के खिलाफ प्रदर्शन करने पहुंचे थे।
महुआ मोइत्रा के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मामला मुख्य रूप से एक फेसबुक पोस्ट से संबंधित है और उनकी मुवक्किल पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- ‘वर्चुअली क्यों, सिर्फ इसलिए कि आप सांसद हैं?’
मोइत्रा की ओर से दलील दी गई कि पिछली बार उनके क्षेत्र में जाने के दौरान उन पर अंडे फेंके गए थे। इसी वजह से व्यक्तिगत रूप से थाने में पेश होने को लेकर सुरक्षा संबंधी आशंका बनी हुई है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट इससे सहमत नहीं हुआ और पूछा कि उन्हें सिर्फ सांसद होने के कारण वर्चुअल पेशी की विशेष सुविधा क्यों दी जानी चाहिए।
अदालत का रुख था कि जांच में व्यक्तिगत पेशी संबंधी हाई कोर्ट के निर्देश का पालन किया जाना चाहिए।
कलकत्ता हाई कोर्ट पहले दे चुका है अंतरिम राहत
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश का भी उल्लेख किया।
हाई कोर्ट महुआ मोइत्रा को फिलहाल किसी कठोर कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण दे चुका है। साथ ही उन्हें पुलिस जांच में सहयोग करने और जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि व्यक्तिगत पेशी या हाई कोर्ट के आदेश के पालन के बाद कोई कानूनी समस्या पैदा होती है, तो महुआ मोइत्रा पहले कलकत्ता हाई कोर्ट के समक्ष उचित उपाय अपना सकती हैं।
14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने होना होगा पेश
सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका पर विचार करने से इनकार किए जाने के बाद महुआ मोइत्रा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी।
इसके बाद शीर्ष अदालत ने याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया।
इसका मतलब है कि कलकत्ता हाई कोर्ट का मौजूदा निर्देश प्रभावी रहेगा और महुआ मोइत्रा को 14 अगस्त 2026 को जांच अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
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