सावन के महीने में जारी कांवड़ यात्रा के बीच ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी के एक विवादित बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। रशीदी ने कांवड़ यात्रा में शामिल कुछ लोगों के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए उन्हें कथित तौर पर “नशेड़ी” और “आतंकवादी” तक कह दिया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी सभी कांवड़ियों के लिए नहीं है। बयान सामने आने के बाद संत समाज और कई राजनीतिक नेताओं ने तीखी आपत्ति जताते हुए उनसे सार्वजनिक माफी तथा कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
कांवड़ यात्रा को लेकर क्या बोले मौलाना साजिद रशीदी?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मौलाना साजिद रशीदी ने आरोप लगाया कि कांवड़ यात्रा में शामिल कुछ लोग धार्मिक यात्रा की आड़ में नशा, हंगामा और हिंसा जैसी गतिविधियों में शामिल होते हैं। उन्होंने कथित तौर पर स्कूल वाहन में तोड़फोड़, पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट और सड़कों पर हंगामे जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए ऐसे लोगों को वास्तविक शिवभक्त मानने से इनकार किया।
इसी क्रम में उन्होंने बेहद विवादास्पद शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ऐसे लोगों को “नशेड़ी और आतंकवादी” बताया। हालांकि रशीदी ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि वह सभी कांवड़ियों को इस श्रेणी में नहीं रख रहे हैं।
CM योगी आदित्यनाथ की नीति पर भी उठाए सवाल
रशीदी ने उत्तर प्रदेश में धार्मिक आयोजनों और सड़क पर होने वाली गतिविधियों को लेकर प्रशासन की नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस रुख का उल्लेख किया जिसमें सार्वजनिक सड़कों पर धार्मिक गतिविधियों के कारण यातायात प्रभावित न करने की बात कही जाती रही है।
रशीदी ने आरोप लगाया कि नमाज के दौरान सड़कों के इस्तेमाल पर प्रशासन सख्ती दिखाता है, जबकि कांवड़ यात्रा के दौरान बड़े पैमाने पर सड़कें इस्तेमाल की जाती हैं। इस टिप्पणी ने विवाद को और बढ़ा दिया।
मस्जिदों के लाउडस्पीकर का मुद्दा भी उठाया
मौलाना रशीदी ने पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने से जुड़े विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियम सभी धार्मिक स्थलों और आयोजनों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि यदि कोई लाउडस्पीकर तय समय और कानूनी डेसीबल सीमा के भीतर चलाया जा रहा है तो उसे मनमाने तरीके से हटाना उचित नहीं है।
संत समाज ने जताई कड़ी आपत्ति
रशीदी की कांवड़ियों को लेकर की गई टिप्पणी पर हरिद्वार के संत समाज ने नाराजगी जताई है। महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश समेत संतों ने कहा कि कांवड़ यात्रा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी धार्मिक परंपरा है और पूरी यात्रा को कुछ घटनाओं के आधार पर अपमानजनक शब्दों से जोड़ना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
संत समाज की ओर से मौलाना रशीदी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है। साथ ही उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार से मामले का संज्ञान लेकर उचित कानूनी कार्रवाई करने की अपील भी की गई है।
विवाद में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज
मामला केवल धार्मिक संगठनों तक सीमित नहीं रहा। भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने भी रशीदी की टिप्पणी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने हजरतगंज कोतवाली में शिकायत देकर बयान को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया।
इस विवाद के बाद कांवड़ यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।
कुछ घटनाओं और पूरी धार्मिक यात्रा में फर्क जरूरी
कांवड़ यात्रा में करोड़ों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। अलग-अलग स्थानों पर तोड़फोड़ या हिंसा की कुछ घटनाओं की खबरें सामने आने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन किसी पूरी धार्मिक यात्रा या उसके सभी श्रद्धालुओं को उन घटनाओं से जोड़ना सामाजिक तनाव बढ़ा सकता है।
मौलाना साजिद रशीदी ने स्वयं अपनी टिप्पणी को सभी कांवड़ियों पर लागू नहीं बताया है, लेकिन “आतंकवादी” जैसे शब्द के इस्तेमाल ने विवाद को व्यापक बना दिया है। अब संत समाज और राजनीतिक नेताओं की ओर से सार्वजनिक माफी तथा कार्रवाई की मांग के बाद यह मामला और तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है।
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